Wednesday, June 29, 2011

भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को पक्ष रखने का निर्देश


आधी रात में रामलीला मैदान खाली कराने के मामले में दिल्ली पुलिस के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव के भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति पी. सथाशिवम व न्यायमूर्ति एके. पटनायक की पीठ ने घटना पर दिल्ली पुलिस के जवाबी हलफनामे को देखने के बाद भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आचार्य वीरेन्द्र विक्रम को नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस आयुक्त के हलफनामे में कहा गया है कि रामलीला मैदान में योग शिविर लगाने के लिए अनुमति मांगी गई थी, लेकिन दूसरे ही दिन सुबह वहां करीब एक लाख की भीड़ एकत्र हो गई। पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस के इस दावे पर वे ट्रस्ट से जवाब चाहते हैं। पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव से भी हलफनामा दाखिल कर बाबा रामदेव व उनके साथियों पर हमले की खुफिया सूचना के बारे में जवाब देने को कहा है। इससे पहले सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस आयुक्त की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता यूयू ललित ने लाठीचार्ज से इंकार किया और कहा कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने लाठीचार्ज के आदेश नहीं दिए थे। बाबा रामदेव के समर्थकों ने पत्थरबाजी और गमले फेंक कर पुलिस को कार्रवाई के लिए उकसाया था। इसी बीच वकील अजय अग्रवाल ने खड़े हो कर कहा कि पुलिस ने बड़े पैमाने पर क्रूरता दिखाई। इस हमले में घायल महिला राजबाला अभी भी जीवन-मृत्यु से संघर्ष कर रही है। उन्होंने सीसी टीवी कैमरे जमा कराने और घटना की जांच के लिए एसआइटी गठित करने की मांग की। हालांकि ललित ने अग्रवाल का विरोध किया और कहा कि उनकी याचिका खारिज हो चुकी है और उन्हें इस मामले में बोलने का हक नहीं है। पीठ ने अग्रवाल से कहा कि घटना के संबंध में उनके पास पर्याप्त तथ्य हैं। पुलिस आयुक्त के हलफनामे में बताया गया है कि कुल 74 लोग घायल हुए थे, जिनमें 49 आम नागरिक थे और 24 पुलिसकर्मी। 49 में से 41 को उसी शाम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, जबकि 5 अन्य को दूसरे दिन सुबह अस्पताल से छुट्टी मिली। दो लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद भेज दिया गया। सिर्फ एक व्यक्ति अस्पताल में है। कोर्ट ने कहा कि अगर उन्हें भविष्य में जरूरत लगी तो वे उनकी (अग्रवाल) मदद ले लेंगे फिलहाल उनकी दलीलें सुनना ठीक नहीं होगा, क्योंकि पहले वाली पीठ उनकी याचिका खारिज कर चुकी है। इसके साथ ही कोर्ट ने भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई 11 जुलाई तक टाल दी।


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