Wednesday, June 1, 2011

अल्पसंख्यकों के लिए खुलेंगे विश्वविद्यालय


अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने बिहार के किशनगंज में रफी अहमद किदवई यूनिवर्सिटीज आफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज, राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज यूनिवर्सिटीज आफ प्रोफेशनल टेक्नोलॉजी और कर्नाटक के बेंगलूर में टीपू सुल्तान यूनिवर्सिटीज आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी खोलने का फैसला किया है। यह तीनों विश्वविद्यालय वक्फ की जमीन पर खोले जाएंगे। मुस्लिम समुदाय में उच्च शिक्षा की कमी को देखते हुये मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उक्त तीनों विश्वविद्यालयों के गठन पर सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। मानव संसाधन मंत्रालय ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से कहा है कि वह अगर इन तीनों विश्वविद्यालयों को ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में खुलवाना चाहता है तो वह इसके लिए जमीन और अतिरिक्त संसाधन शीघ्र उपलब्ध कराएं क्योंकि इस योजना की राशि देश में सोलह केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए पहले ही आवंटित कर दी गई है। ये केंद्रीय विश्वविद्यालय इस पंचवर्षीय योजना के अंत तक बन कर तैयार भी हो जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के पास तीन विकल्प रह गए हैं। पहला विकल्प यह कि वक्फ की जमीन में मुस्लिम समुदाय खुद इसे शुरू कर दे और इसे डीम्ड यूनिवर्सिटीज घोषित कर दिया जाए। दूसरा संसद से कानून पास करके अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की तरह इसे अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किया जाए। तीसरा विकल्प है कि सरकार और वक्फ बोर्ड मिलकर इसकी स्थापना करें। वक्फ बोर्ड जमीन देकर और सरकार पैसा लगाकर इसके गठन में योगदान करें। मानव संसाधन विकास मंत्रालय तीनों में से किसी भी विकल्प के आधार पर इन विश्वविद्यालयों की स्थापना करने के लिए तैयार है। शिक्षा मंत्रालय नए विश्वविद्यालय खोलने के बजाय इन तीनों को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटीज की विस्तार योजना से जोड़ देने के लिए भी तैयार है.


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