Wednesday, June 29, 2011

गोरखालैंड पर त्रिपक्षीय समझौता चाहती हैं ममता


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गोरखालैंड मसले के समाधान के लिए केंद्र के साथ त्रिपक्षीय समझौता करना चाहती हैं। राज्य सरकार और गोरखा मुक्ति मोर्चा के बीच हुए समझौते से गठित नई पर्वतीय परिषद को जहां ताकत मिल जाएगी, वहीं उसे अधिक स्वायत्तता मिल जाएगी। ममता बनर्जी ने उम्मीद जताई की इसी समझौते से वहां के विकास को गति मिल जाएगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा गोरखालैंड उनका ड्रीम लैंड है, जिसे हम स्विट्जरलैंड बनाना चाहते हैं। वहां के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने कहा कि वह उसे स्विट्जरलैंड बनाएंगी। दार्जिलिंग के विकास के लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे। ममता बनर्जी ने पर्वतीय क्षेत्र के साथ जंगल महल क्षेत्र के विकास को भी प्राथमिकता देने के अपने वादे को पूरा करने का संकल्प दुहराया। भूमि अधिग्रहण विधेयक की राह में रोड़ा बनती आ रही ममता बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह नहीं चाहती हैं कि किसी किसान की जमीन का अधिग्रहण उसकी मर्जी के खिलाफ जबरन किया जाए। पश्चिम बंगाल की बेहाली की चर्चा करते हुए उन्होंने पूर्ववर्ती वाम सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए स्पेशल ऑडिट के साथ श्वेत पत्र भी जारी किया जाएगा। ताकि राज्य की जनता को उनकी पूर्ववर्ती सरकार की करतूतों का पता चल सके। राज्य की प्रशासनिक प्रणाली के बारे में पूछे सवाल पर ममता ने कहा कि वामपंथी सरकार ने उसका राजनीतिकरण कर रखा था। अब उन्हीं अफसरों को काम करने का अच्छा मौका दिया जाएगा, जो बिना किसी भेदभाव के लोगों की सेवा करेंगे, सितंबर से हर सरकारी कर्मचारी को बैंकों से वेतन मिलने लगेगा। राज्य में माओवादियों से वार्ता के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह हमेशा इसकी पक्षधर रहीं हैं। जंगल महल इलाके का अध्ययन कराने के बाद पैकेज तैयार हैं।


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