Wednesday, June 15, 2011

बसपा के विकल्प की जिद्दोजहद


समाजवादी पार्टी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन मंगलवार को आगरा में शुरू हो गया। इसमें पार्टी का पूरा फोकस सूबे में खुद को बसपा का असली विकल्प साबित करने पर केंद्रित रहा। उसने इसे साबित करने करने के लिए यह दलील भी दी कि बसपा भी सपा को ही अपना दुश्मन नंबर एक मानती है। कांग्रेस के उभार और भाजपा के उमा भारती को आगे कर पिछड़ा वर्ग कार्ड खेलने की कोशिश को लेकर पार्टी खासी चिंतित नजर आई। पार्टी का पूरा जोर विधानसभा चुनाव में वोटों के विभाजन को रोकने पर रहा। पार्टी का मानना है कि चुनावों में वोटों का बिखराव हो गया तो सूबे में सत्ता हासिल करने का उसका ख्वाब-ख्वाब ही रह जाएगा। मुस्लिम वोट बैंक की चिंता : अधिवेशन में सपा मुस्लिम मतों के बिखराव और विशेषकर कांग्रेस के प्रति उनके झुकाव को लेकर वह खासी चिंतित नजर आई। पार्टी को यह डर है कि लोकसभा की तर्ज पर यदि विधानसभा चुनावों में भी मुसलमानों का झुकाव कांग्रेस की ओर हो गया तो उसे खासी दुश्वारियां हो सकती हैं। यही वजह रही कि पार्टी ने अधिवेशन में सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की रिफारिशों को लागू न करने पर कांग्रेस को निशाना बनाया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने साफ किया कि जब तक केंद्र, सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को आरक्षण नहीं देता, तब तक इस कौम का भला नहीं होगा।
लक्ष्य यूपी, निगाह केंद्र पर : अधिवेशन में सपा का सतही लक्ष्य तो सूबे की सत्ता रहा,लेकिन उसकी निगाह केंद्र के मौजूदा हालात पर भी लगी है। मुलायम ने इसे छिपाया भी नहीं। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य 2012 में राज्य में सरकार बनाना तो है ही साथ में 2014 के लोकसभा चुनाव में इतनी सीटें जीतना है कि उसके बिना सहयोग के केंद्र में सरकार न बन सके। उन्होंने केंद्र और प्रदेश दोनों ही सरकारों को भ्रष्टाचारी करार देते हुए तीखा हमला बोला। हालांकि उन्होने सीधे तौर पर बाबा रामदेव का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन विदेशों में जमा कालेधन का मुद्दा उठाकर बाबा के आंदोलन का समर्थन कर इरादे जाहिर कर दिए।
सीमाओं पर बढ़ता खतरा : सपा मुखिया सीमाओं के प्रति केंद्र की उदासीनता का मुद्दा अर्से से उठा रहे हैं। विशेषकर चीन की सीमा पर सक्रियता का मामला। इसका जिक्र अधिवेशन में भी कर केंद्र को निशाना बनाया। सीमा पर पाक प्रायोजित आतंवाद के मुद्दे को उठाकर उन्होंने अपनी चिंताएं जाहिर की। आतंकी ओसामा बिन लादेन की मौत के साथ पाकिस्तान की स्वायत्तता पर अमेरिकी हस्तक्षेप को अफगानिस्तान और इराक पर हमला जैसा ही गंभीर मामला बताया। इसके अलावा 2 जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल घोटालों का जिक्र करते हुए कहा कि यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार से लड़ने का हौसला नहीं है। महंगाई का जिक्र कर आम जनता की नब्ज छूने की कोशिश की। साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने और सरकार को बेनकाब करने को कहा।
आजम रहे गैरहाजिर : अधिवेशन के पहले दिन फायरब्रांड नेता मोहम्मद आजम खां की गैर मौजूदगी भी आश्चर्यजनक रही। वैसे पार्टी का कहना रहा कि वह बुधवार को अधिवेशन में शामिल होंगे।


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