Saturday, February 18, 2012

यहां का मुद्दा आलू-पानी


एत्मादपुर विस क्षेत्र के मतदाता इस पसोपेश में हैं कि अपना प्रतिनिधि मुद्दों के आधार पर चुने या जाति का ख्याल रखें। बहरहाल यहां सबसे बड़ा मुद्दा आलू और पानी का है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आलू की पैदावार सबसे अधिक इसी इलाके में होती है, लेकिन समस्याओं की जमीन पर हो रही यह खेती खतरे में है। दूसरी तरफ नए परिसीमन ने इस क्षेत्र का गणित बदल दिया है। अब यह सीट सुरक्षित नहीं है। जातीय समीकरण बदल गए हैं और अधिकतर प्रत्याशी जातीय भावना को भुनाकर मतदाताओं का मत हड़पने की फिराक में हैं। फिलहाल मतदाताओं के के लिए आलू और पानी अहम है या जाति, यह जानना मुश्किल है। वैसे जाति पर आलू भारी दिख रहा है। इन दिनों एत्मादपुर क्षेत्र में जो चुनावी माहौल है, उसमें आलू और पानी गूंज रहा है। तमाम प्रत्याशी चुनावी सभाओं में आलू और पानी का मुद्दा उठाते हैं और इसी आधार पर वोट मांगते हैं। इलाके में आलू का पानी से गहरा संबंध है। यहां की छोटी नहरों की सफाई व मरमम्त 10-12 सालों से नहीं हुई है। सिंचाई विभाग गर्मी में जब पानी की ज्यादा जरूरत होती है तब नहरों में पानी नहीं छोड़ता लेकिन बीते दिसम्बर में तो विभाग ने हद कर दी और नहरों में पानी छोड़ दिया। जिससे करीब ढाई सौ बीघे में आलू की फसल डूब गई थी। ऐसे में क्षेत्र में सिंचाई के लिए बोरिंग एक मात्र विकल्प है और यहां करीब दो सौ फीट पर बोरिंग होती है। इससे भविष्य में भूजल स्रेत के भी प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है। जहां तक पेयजल की बात है तो अधिकतर इलाके में लोग पानी खरीद कर पीते हैं। पानी की सबसे अधिक किल्लत यमुनापार इलाके में है। मतदाताओं का कहना है कि आलू से जुड़ी समस्याओं के मामले में बीते कई चुनावों में सिर्फ आासनों की घुट्टी पिलाई गई। इस क्षेत्र में आलू मंडी और पोटैटो प्लांट लगाने का वादे चुनाव के दौरान किये जाते रहे हैं। इस बार भी ये वादे किए जा रहे हैं। मतदाताओं का कहना है कि आलू निर्यात न होने से भी बेहद नुकसान हो रहा है। इसलिए वे चाहते है कि इस आलू बेल्ट को कर्मठ प्रतिनिधि मिले। जहां तक प्रत्याशियों की बात हैं तो परिसीमन में सामान्य हुई इस सीट पर भाजपा के रामप्रताप सिंह चौहान, कांग्रेस-रालोद गठबंधन के बाबा हरदेव सिंह और सपा के प्रेम सिंह बघेल पहली बार चुनाव लड़ रहे है। बसपा से धर्मपाल सिंह मैदान में हैं। चुनावी चर्चाओं में जातीय हिसाब-किताब भी खूब लगाया जा रहा है। ठाकुर बाहुल्य इस क्षेत्र में तीन प्रमुख उम्मीदवार ठाकुर हैं। वैसे जब प्रमुख दलों के प्रत्याशियों से बात की गई तो उन्होंने जातीय समीकरण को खारिज करते हुए कहा कि वे सिर्फ विकास के आधार पर वोट मांग रहे हैं। गौरतलब है कि इस क्षेत्र का शहरी इलाका काफी बड़ा है। जो शहर की तीनों विधानसभा क्षेत्रों की हवा से प्रभावित हो सकता है। इस कारण सभी प्रत्याशियों की नजर यमुना पार के शहरी इलाकों पर भी है। क्षेत्र में किसी एक प्रत्याशी का बोलबाला नहीं रहा है और प्रमुख दलों में बराबर की टक्कर कही जा रही है। कु ल मतदाता ..................3,51,736 पुरुष मतदाता ..................1,98,854 महिला मदताता.................1,52,878 पुराने परिसीमन पर वर्ष 2007 तक हुए विधानसभा चुनाव में कभी किसी एक दल का आधिपत्य लंबे समय तक नहीं रहा है। 1989 से अब तक प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक इस प्रकार हैं : 1989 ......चंद्रभान मौर्य .........जनतादल 1991 ......चंद्रभान मौर्य ........जनता दल 1993 ......चंद्रभान मौर्य.............सपा 1996 ......गंगा प्रसाद पुष्कर ........बसपा 2002 ......गंगा प्रसाद पुष्कर ........रालोद 2007 ......नारायण सिंह सुमन.......बसपा 2009 लोकसभा चुनाव में स्थिति बसपा..........................49533 कांग्रेस .........................13288 सपा ...........................33210 भाजपा .........................47671 एत्मादपुर सीट

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