Saturday, February 18, 2012

ददुआ के बेटे के उतरने से चित्रकूट में मुकाबला रोचक

पूरे वि में जिस स्थान चित्रकूट की पहचान मर्यादा पुरुषोत्तम राम की तपस्थली के रूप में है, वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों में कुख्यात डकैत ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल की उम्मीदवारी को लेकर चर्चा में है, जिन्हें समाजवादी पार्टी ने यहां मैदान में उतारा है। आगामी 19 फरवरी को होने वाले मतदान में इस बात का फैसला होगा कि जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके पटेल को क्या इस बार भी मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिलेगा, क्योंकि उनकी उम्मीदवारी से नाराज कुछ मतदाता सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की चुनाव सभा में पटेल को वोट देने से साफ इनकार कर चुके हैं। श्री यादव के ही मुख्यमंत्रित्वकाल में पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। पटेल के खिलाफ आठ आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं और जिला पंचायत के काम में भ्रष्टाचार का आरोप भी है। श्री यादव ने पटेल के पक्ष में सभा में बुंदेलखंड को इस्रइल बनाने का बयान देकर विवाद को जन्म देने के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं को नाराज कर दिया था। भाजपा ने चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय को चुनाव मैदान में उतारा है, जो पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के निजी सहायक रह चुके हैं। दो साल पहले मुख्य विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद श्री उपाध्याय सक्रिय राजनीति में आए हैं। उनकी पृष्ठभूमि भी राजनीतिक नहीं रही है, इसलिए कोई विवाद भी उनके साथ चर्चा में नहीं है। बसपा ने राम सेवक शुक्ल को प्रत्याशी बनाया है। भाकपा के उम्मीदवार अमित पटेल हैं तो जनतादल (यू) ने जब्बर सिंह पटेल को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह हैं। राष्ट्रीय लोकमंच के आशीष रघुवंशी समेत कुल तेरह प्रत्याशी मैदान में हैं। चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में कुल दो लाख 95 हजार 623 मतदाता हैं, जिनमें एक लाख 29 हजार 186 महिलाएं हैं। छह हजार 752 नए मतदाता बने हैं, जो पहली बार वोट डालेंगे। लगभग 72 हजार ब्राह्मण मतदाता वाले इस क्षेत्र में 65 हजार दलित दूसरे नंबर पर आते हैं। यादव 25 हजार, वैश्य 22 हजार और तेरह हजार मुस्लिम मतदाता हैं। ब्राह्मण मतदाताओं की बडी संख्या को देखते हुए ही भाजपा ने श्री उपाध्याय को मैदान में उतारा है। पार्टी का अपना वोट बैंक भी यहां ठीक ठाक है। बसपा ने भी ब्राह्मण प्रत्याशी उतार कर बड़ा दांव खेला है। पिछली बार दलित ब्राह्मण गठजोड़ से यह सीट बसपा के पास चली गई थी। इस बार सोशल इंजीनियरिंग का प्रभाव नहीं दिख रहा है। पिछले चुनाव में बसपा के प्रत्याशी दिनेश मिश्र थे और उन्होंने कम अंतर से सपा के आरकेपटेल को हराया था। पिछले चुनाव में मुकाबला क्षेत्रीय पार्टी के बीच सिमटकर रह गया था। (एजेंसी)

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