Thursday, July 28, 2011

मोदी विरोधियों के हाथों खेल रहे संजीव भट्ट


गुजरात दंगों के लिए मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराने वाले आइपीएस अधिकारी संजीव भट्ट अब अपने बचाव के लिए मोदी विरोधियों की शरण में है। सुप्रीम क ोर्ट के समक्ष दिए गए संजीव के बयान की कई बातें झूठ निकल रही हैं। ऐसे में खुद को बचाने के लिए वह कांग्रेसी नेताओं, वामपंथी कार्यकर्ताओं, नौकरशाहों और मोदी विरोधी सामाजिक कार्यकर्ताओं से मदद की गुहार लगा रहे हैं। भट्ट का इन सभी से ईमेल के जरिए हुआ सूचनाओं का आदान-प्रदान पूरे मसले में ऐसी ही साजिश के पुख्ता संकेत दे रहा है,जिसमें वह भी मोहरा बने। सूत्रों के मुताबिक, गोधरा मामलों की जांच कर रही एसआईटी को मिले भट्ट के ईमेल का ब्यौरा खुद उनके ही खिलाफ जा रहा है। ईमेल से गोधरा कांड के बाद 27 फरवरी, 2002 की रात उनके मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में शामिल रहने के दावे पर सवालिया निशान लग गए हैं। भट्ट ने सुप्रीमकोर्ट में 23 अप्रैल 2011 को दाखिल हलफनामे में आरोप लगाया है कि मोदी ने बैठक के दौरान अफसरों से कहा था कि हिंदुओं का गुस्सा निकल जाने दो और मुसलिमों को मुंहतोड़ जवाब देने दो, मगर भरपूर कोशिश के बावजूद वह बैठक में मौजूदगी का सुबूत नहीं जुटा पा रहे हैं। भट्ट ने यह भी दावा किया था कि मुख्यमंत्री आवास पर बैठक के दौरान उनकी पूर्व मंत्री हरेन पंड्या (बाद में उनकी हत्या हो गई) से भेंट हुई थी, जबकि पांड्या के काल रिकार्ड इस गलत ठहराते हैं। भट्ट ने अपने आईपीएस साथी राहुल शर्मा की मदद से पांड्या के गांधीनगर में होने के सुबूत तलाशने की भरसक कोशिश की। इस कड़ी में 12 से 22 मई, 2011 के बीच भट्ट व राहुल के बीच मेल पर लंबा पत्राचार भी हुआ। 22 मई की सुबह 7.42 पर राहुल ने भट्ट को मेल किया कि पांड्या के दिए गए नंबर पर आखिरी काल रात 10.52 पर आई उस समय वह गांधी नगर की तरफ नहीं बल्कि अपने क्षेत्र में थे। 27 की रात और 28 को तड़के तक उनके गांधीनगर में होने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इसके अलावा भट्टा लगातार तीस्ता सीतलवाड़ और कांग्रेस नेताओं के संपर्क में रहे। अप्रैल में कभी वकील तो कभी तथ्यों को लेकर उनकी तीस्ता, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन मोडवाढि़या और विस में नेता प्रतिपक्ष शक्ति सिंह गोहित से लगातार बात होती रही। इस दौरान भट्ट ने कांग्रेस नेता गोहित से कागजों के साथ- साथ ब्लैकबेरी मोबाइल भी मंगाया और उसे पाने की पुष्टि की। भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी और एमाइकस क्यूरी (अदालत का मददगार) को भी प्रभावित करने के लिए सिविल सोसाइटी का सहारा लिया। इस कड़ी में गैर सरकारी संस्था अनहद की शबनम हाशमी और प्रशांत संस्था के फादर सेड्रिक प्रकाश को पत्र लिखकर अभियान चलाने की मदद भी मांगी। 9 मई को ऐसे ही संस्थाओं को पत्र भेजकर हस्ताक्षर अभियान की गुजारिश भी की.

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