Monday, July 11, 2011

सिब्बल से छिनेगा दूरसंचार


घोटालों-भ्रष्टाचार के बीच विपक्षी हमले झेल रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस बार मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल करने जा रहे हैं। सरकार के लिए मुसीबत बने करीब आधा दर्जन मंत्रियों के पत्ते कट सकते हैं। अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन को मदद (50 करोड़ रुपये के जुर्माने को पांच करोड़ करने) पहंुचाने के आरोपों में घिरे कपिल सिब्बल से दूरसंचार मंत्रालय छिनना तय है। कांग्रेस कोटे के कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। अहम विभागों वाले मंत्रियों के कामकाज में फेरबदल भी होगा। कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी की पखवाड़े भीतर प्रधानमंत्री से हुई तीसरी मुलाकात और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी की डीएमके प्रमुख करुणानिधि के साथ बैठक के बाद सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल तय माना जा रहा है। मौजूदा मंत्रियों में वीके हांडिक, एमएस गिल, विलासराव देशमुख, वीरभद्र सिंह, सीपी जोशी, कांतिलाल भूरिया की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है। कांग्रेस नेतृत्व भूरिया को पहले ही मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना चुका है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय मंत्री होने के साथ ही कांग्रेस संगठन में महासचिव के पद पर काबिज गुलाम नबी आजाद और मुकुल वासनिक को संगठन या सरकार में से एक जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है। इसी तरह प्रवासी भारतीय मंत्रालय के साथ ही नागरिक उड्डयन मंत्री का कार्यभार संभाल रहे वायलार रवि और मानव संसाधन विकास मंत्री के साथ ही दूरसंचार मंत्रालय को भी देख रहे कपिल सिब्बल का बोझ कम किया जाना भी तय है। रिलायंस कम्युनिकेशन पर जुर्माने की राशि घटाए जाने का मामला सामने आने के बाद सिब्बल से दूरसंचार मंत्रालय छिनना तय माना जा रहा है। अंबानी समूह के वकील रह चुके सिब्बल ने खुद ही स्वीकारा है कि उन्होंने ही नवंबर 2010 से फरवरी 2011 तक 13 टेलीकॉम सर्किलों में बाधित सेवाओं को लेकर आरकाम पर हुए 50 करोड़ के जुर्माने को घटाकर पांच करोड़ करने का फैसला लिया था। इस मामले में सिब्बल ने शनिवार को प्रधानमंत्री को सफाई भी दी है। कारपोरेट मामलों के मंत्री मुरली देवड़ा खुद ही इस्तीफा देकर संगठन में काम करने की इच्छा जता चुके हैं। शनिवार को चेन्नई में करुणानिधि से मुलाकात के बाद प्रणव मुखर्जी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डीएमके के साथ कांग्रेस का गठबंधन बना रहेगा। साफ है कि डीएमके कोटे के मंत्री ए. राजा व दयानिधि मारन के इस्तीफे के बाद डीएमके के दो नये चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि चर्चा यह भी है कि अब डीएमके से एक कैबिनेट और दो राज्यमंत्री बनाये जा सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी के प. बंगाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी जगह उनकी ही पार्टी के दिनेश त्रिवेदी (मौजूदा स्वास्थ्य राज्यमंत्री) को रेल मंत्री बनाया जा सकता है। इस बार मंत्रिमंडल फेरबदल में उत्तर प्रदेश को खासा फायदा हो सकता है। पहले से स्वतंत्र प्रभार के स्टील राज्यमंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को कैबिनेट मंत्री बनाने की पूरी संभावना है, जबकि आगामी विस चुनाव को देखते हुए प्रदेश से एक राजपूत सांसद को मंत्री बनाने की उम्मीद है। इसके लिए राजकुमारी रत्ना सिंह, हर्षबर्धन, जगदंबिका पाल का नाम चर्चा में है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री सलमान खुर्शीद को और अहम मंत्रालय दिये जाने की बात कही जा रही है। वैसे चर्चा में राजबब्बर का भी नाम है, जिन्हें लोकसभा चुनाव के दौरान मंत्री बनाने का वादा किया गया था।


 दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) , 10 जुलाई, 2011


    

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