Thursday, December 8, 2011

ममता को मनाने में जुटे केंद्र ने दिया विशेष आर्थिक पैकेज


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीते माह पैट्रोल मूल्य वृद्धि के फैसले पर सहनशीलता दिखाने का यूपीए सहयोगी तृणमूल कांग्रेस को इनाम दे दिया है। केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल की ममता बैनर्जी सरकार की काफी समय से चली आ रही आर्थिक पैकेज की मांग को पूरा करते हुए राज्य को लगभग नौ हजार करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पिछड़ा क्षेत्र विकास कोष से राज्य को विशेष आर्थिक सहायता देने के फैसले पर मुहर लगाई। इसके तहत राज्य को 8750 करोड़ रुपये की सहायता दी जानी है। तृणमूल समेत अन्य सहयोगियों के विरोध के चलते खुदरा बाजार में प्रत्यक्ष विदेश निवेश के फैसले पर फौरी ब्रेक लगाने के बाद सरकार ने पश्चिम बंगाल की विशेष पैकेज मांग को पूरा कर अपने अहम सहयोगी को खुश करने की भी कोशिश की है। हालांकि यह बात और है कि ममता बैनर्जी की ओर से राज्य के लिए मांगी गई 19 हजार करोड़ रुपये की सहायता के मुकाबले सरकार ने अपने खजाने से फिलहाल आधी से भी कम रकम निकाली है। दरअसल, यूपीए सरकार ने बीते माह पैट्रोलियम मूल्य वृद्धि को लौटाने के लिए रौद्र रूप दिखा रही तृणमूल कांग्रेस ने विशेष आर्थिक पैकेज की अपनी मंशा स्पष्ट कर दी थी। जाहिर है पार्टी सरकार को संकट से बचाने की कीमत वसूलने का मौका नहीं गंवाना चाहती थी। मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने आठ नवंबर 2011 को पश्चिम बंगाल के राजभवन में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ अपनी मुलाकात में राज्य के लिए करीब 20 हजार करोड़ की सहायता की दरकार बताई थी। वहीं तृणमूल सांसदों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आगे भी इसके लिए पेशबंदी की थी। महत्वपूर्ण है कि नवंबर में पैट्रोल की कीमतों में दो बार हुई बढ़ोतरी के खिलाफ तृणमूल ने सरकार से बाहर होने का भी दबाव बनाया था। तात्कालिक तौर पर तो मनमोहन सरकार ने अपने फैसले को जायज बताते हुए सख्ती दिखाई थी। साथ ही वित्त मंत्री विशेष आर्थिक पैकेज की मांग को भी ठुकरा दिया था। लेकिन बाद में सरकार की ओर से न केवल पैट्रोल की कीमतों में कमी का फैसला आया बल्कि राज्य के लिए पैकेज को भी मंजूरी मिल गई। वैसे पश्चिम बंगाल के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की ममता बैनर्जी की मांग नई नहीं है। मई 2011 में राज्य की कमान संभालने के बाद से ममता इसकी मांग करती रही हैं। इसके वो हर मंच पर उठाती भी रही हैं। यह बात और है कि सरकार ने अपने अहम सहयोगी की मांग को कान तब दिए जब सियासी मुसीबत में वजूद बचाने के लिए उसका साथ अनिवार्य नजर आने लगा।

लोकपाल में आरक्षण न मिला तो नहीं चलने देंगे संसद


महंगाई, कालेधन और भ्रष्टाचार के सवालों के बीच देश के डेढ़ सौ से अधिक दलित सांसदों ने एससी, एसटी के आरक्षण के मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है। वे कार्यकारी आदेश से सरकारी नौकरियों में मिले इस आरक्षण के लिए संसद के इसी सत्र में कानून बनाने की मांग पर अड़ गए हैं। साथ ही प्रस्तावित लोकपाल में भी दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों व महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर दी है। ऐसा नहीं होने पर एससी-एसटी संसदीय फोरम ने संसद को न चलने देने की चेतावनी भी दे दी है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अनुसूचित जाति-जनजाति (एसटी-(एससी) संसदीय फोरम के बैनर तले एकजुट सांसदों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री नारायण सामी से बुधवार को यहां आरक्षण के मुद्दे पर फिर से बात की। नारायणसामी से मुलाकात के बाद फोरम के सदस्य व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया, फोरम के सचिव व राज्यसभा सदस्य जेडी सीलम, लोजपा प्रमुख व राज्यसभा सदस्य रामविलास पासवान ने बुधवार को यहां संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि इन मसलों पर अब वे गुरुवार को प्रधानमंत्री से भी मिलेंगे। जबकि, संसद के पिछले सत्र में भी उनसे व नारायणसामी से मिल चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। पुनिया ने कहा कि प्रस्तावित लोकपाल के लिए बनने वाली सर्च कमेटी, सेलेक्शन कमेटी और लोकपाल के ढांचे (संस्था) में भी दलितों, पिछड़ों (ओबीसी), अल्पसंख्यकों व महिलाओं को मिलाकर 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति का 15 प्रतिशत व जनजाति का 7.5 प्रतिशत दशकों पुराना आरक्षण अभी तक महज एक कार्यकारी आदेश पर टिका हुआ है। फोरम की मांग इस आरक्षण के लिए संसद से कानून बनाने की है। नारायणसामी ने कानून मंत्रालय से मशविरा कर विधेयक लाने को कहा था, अब कुछ नहीं हुआ। फोरम की मांग न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति में भी एससी-एसटी का आरक्षण की है।

Wednesday, December 7, 2011

आदतन भ्रष्टाचारियों को बचाते हैं पवार : अन्ना


कृषि मंत्री शरद पवार को एक युवक द्वारा थप्पड़ मारने के बाद बस एक ही थप्पड़ की टिप्पणी से विवाद में आए अन्ना हजारे ने नए सिरे से आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया है। हजारे ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि पवार की भ्रष्ट लोगों को बचाने की पुरानी आदत है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पवार ने भ्रष्टाचार के कई मामलों से आंखें मूंद लीं। अगर जांच का आदेश दिया जाता है, तो स्पष्ट हो जाएगा कि कौन जिम्मेदार रहा है। उन्होंने थप्पड़ वाली अपनी टिप्पणी को भी जायज ठहराया। हजारे ने कहा कि 24 नवंबर को दिल्ली में एक समारोह से निकलते वक्त पवार को एक सिख युवक ने थप्पड़ मार दिया था। अब इस बात पर चर्चा करना जरूरी है कि युवक ने थप्पड़ क्यों मारा। आज भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। भ्रष्टाचार ने आम आदमी का जीना दूभर कर दिया है। भ्रष्टाचार के कारण ही महंगाई बढ़ी है। जब पवार पर हमले की घटना पर पत्रकारों ने अन्ना हजारे से प्रतिक्रिया मांगी थी, तो उन्होंने कहा था कि बस एक थप्पड़। उन्होंने माना है कि उन्होंने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंसा की, लेकिन समाज की बेहतरी के लिए ऐसा किया। कई राजनेताओं को हमले की घटना से बुरा लगा। उनमें से कई काफी नाराज भी हुए। पवार पर हमला करते हुए उन्होंने लिखा है कि शरद केंद्र में कृषि मंत्री हैं और राज्य में बिजली मंत्री भी उनकी ही पार्टी के हैं। आज 22 साल बाद भी किसानों के बिजली पंप कम वोल्टेज के कारण जल जाते हैं, फसलें खराब हो जाती हैं, ट्रांसफॉर्मर जल जाते हैं, लेकिन तब भी राजनेताओं को गुस्सा नहीं आता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने लिखा है कि किसानों ने पुणे के पास प्रदर्शन किया। उन पर गोलियां चलाई गई। तीन किसानों की मौत हो गई, लेकिन राजनेताओं को गुस्सा नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि पवार ने सड़े गेहूं का आयात किया और उसे बड़े गड्ढों में दबा दिया गया। पवार के संबंधी पद्मसिंह पाटिल कैबिनेट में मंत्री थे। जब वह मंत्री थे, तो भ्रष्टाचार में लिप्त थे। मैंने जांच की मांग की। जांच नहीं हुई, तो आंदोलन शुरू किया। नतीजतन जांच का आदेश देना पड़ा। मंत्री दोषी साबित हुए और उन्हें कैबिनेट से हटाया गया।

Monday, December 5, 2011

सोनिया गांधी तोड़ें चुप्पी : गडकरी

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी स्वदेशी की बात करने वाले गांधी की पार्टी नहीं रह गई है। वरन यह भारतीयों को किसी लायक न समझने वाली सोनिया गांधी की विदेशी कांग्रेस पार्टी हो गई है। उन्होंने देश के मौजूदा हालातों पर सोनिया गांधी से चुप्पी तथा प्रधानमंत्री से असहाय बने रहने की स्थिति तोड़ने को कहा। उन्होंने ऐलान किया कि पार्टी राज्य में वापसी और 2014 में केंद्र की सत्ता में आयेगी तो राज्य को मौजूदा केंद्र सरकार द्वारा छीना गया औद्योगिक पैकेज वापस दिलाएंगे। रविवार को नगर के ऐतिहासिक डीएसए फ्लैट मैदान में आयोजित पार्टी की जनसभा में गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार अब खुदरा व थोक बाजार में विदेशी कंपनियों को ला रहे हैं। ऐसा स्वदेशी की बात करने वाले गांधी की कांग्रेस नहीं कर सकती। महंगाई केंद्र सरकार की गलत नीतियों और भ्रष्ट प्रशासन के कारण बढ़ी है। निशंक एवं खंडूड़ी दोनों सरकारों की तारीफ करते हुए उन्होंने जनता से अटल के सुशासन के अनुरूप भ्रष्टाचारमुक्त व स्वच्छ प्रशासन तथा पं. दीनदयाल के अंत्योदय के अनुरूप गरीबों के घर तक विकास पहुंचाने का वादा किया। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने खंडूड़ी सरकार की देश में पहला जन लोकपाल व जनसेवा का अधिकार लाने की सराहना की। राष्ट्रीय महामंत्री थावर चंद्र गहलौत ने कहा, जब-जब कांग्रेस आती है देश में महंगाई और भ्रष्टाचार बढ़ता है। प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल ने नैनीताल आये राष्ट्रीय नेताओं का स्वागत किया तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को तलवार भेंट की। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने विपक्षी कांग्रेस पार्टी को राज्य की जनता की दुश्मन बताते हुए कहा कि सीएम खंडूड़ी द्वारा छोड़ी गई जन लोकपाल की मिसाइल के वार से वह 2012 में पस्त हो जाएगी तथा 2014 में खड़ी भी नहीं हो पाएगी। मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अपनी सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्हें जारी रखने के लिए जनता से एक और अवसर देने की अपील की तथा दो दिन पूर्व आये केंद्र के पत्र का उल्लेख करते हुए टिहरी डैम से उत्पन्न बिजली का नियमानुसार राज्य को मिलने वाले 12 फीसद हिस्से में कटौती किये जाने की जानकारी देते हुए लगातार राज्य से अन्याय करने का आरोप लगाया। पूर्व सीएम डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि पूरी कांग्रेस सरकार ने राज्य को 16 हजार करोड़ के कर्ज में डुबो दिया। कांग्रेस पर 56 घोटाले करने का आरोप लगाया, और अपनी सरकार को बेदाग बताया। संचालन काबीना मंत्री गोविंद सिंह बिष्ट ने किया।

Friday, December 2, 2011

पिछड़ों के हिस्से से मुस्लिम कोटा


यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कितना फायदा होगा, वह तो नतीजे बताएंगे, लेकिन उसके बहाने देश के मुस्लिम समुदाय को फायदा जरूर होने जा रहा है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही मुस्लिमों को नौकरियों में आरक्षण की कागजी कार्रवाई लगभग पूरी होने को है। संकेत साफ हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सरकार पिछड़ों के कोटे से ही मुसलमानों को आरक्षण का एलान कर देगी। सरकार और कांग्रेस के रणनीतिकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव भी आगामी फरवरी उत्तराखंड व पंजाब राज्यों के साथ ही हो सकते हैं। ऐसे में मुस्लिम आरक्षण के मामले में अब और देरी नहीं होगी। कांग्रेस की चुनावी तैयारियां भी उसी लिहाज से चल रही हैं, जिसमें उसका सबसे ज्यादा फोकस उत्तर प्रदेश पर है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने मुस्लिम आरक्षण पर अपनी कवायद पूरी कर ली है। उसने रंगनाथ मिश्र की अगुवाई वाले धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिम आरक्षण के मामले में सभी राज्यों व लगभग दो दर्जन केंद्रीय मंत्रालयों से उनकी राय मांगी थी। इसी परिप्रेक्ष्य में केंद्र सच्चर कमेटी की सिफारिशों व आंध्र प्रदेश, कर्नाटक व केरल में लागू मुस्लिम आरक्षण का भी परीक्षण कर चुकी है। सूत्र बताते हैं कि मुस्लिम आरक्षण पर सारी कवायद के बाद सरकार पिछड़ों के 27 प्रतिशत आरक्षण में से ही अल्पसंख्यकों को पिछड़ा मानते हुए 8.4 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को सबसे मुफीद मान रही है, जिसमें छह प्रतिशत मुस्लिमों को और 2.4 प्रतिशत बाकी अल्पसंख्यकों के लिए हो सकता है। हालांकि, इस फैसले पर सपा, राजद व जद-यू जैसे गैर कांग्रेस दलों के पिछड़े नेताओं के विरोध की आशंका भी सरकार को है, लेकिन कांग्रेस चुनावी लिहाज से इसमें भी अपना फायदा व विरोधियों का नुकसान देख रही है। सूत्रों का कहना है कि पिछड़े नेताओं ने यदि इसका ज्यादा विरोध किया तो सरकार के सामने आरक्षण के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव के लिए संविधान संशोधन के सिवा कोई रास्ता नहीं होगा। तब सरकार उस हद तक जा सकती है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी गुरुवार को यहां संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा, सरकार ने मुस्लिम आरक्षण का जो वादा किया था, अब उसका समय आ गया है। उन्होंने कहा, यह मुद्दा दो साल से सरकार के एजेंडे में था, केंद्रीय कैबिनेट इस पर जल्द ही फैसला करेगा। हालाकि, उन्होंने इस बाबत निर्णय का निश्चित समय नहीं बताया। हालांकि जब खुर्शीद से पूछा गया कि यह फैसला यूपी विधानसभा चुनाव से पहले आ रहा है तब उन्होंने तपाक से कहा, क्या हमें राज्य में चुनाव से पहले काम करना छोड़ देना चाहिए। हम जो कुछ सोच रहे हैं, वह हमारी जिम्मेदारी है और हम उसे कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मायावती पर निशाना साधते हुए कहा, यदि वह चिंतित हैं तो वह मुसलमानों को ऐसा ही आरक्षण देने को स्वतंत्र हैं। हम ऐसा केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए कर रहे हैं। यदि वह चिंतित हैं तो वह भी उत्तर प्रदेश में ऐसा ही कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी गत दिनों मुस्लिमों के एक सम्मेलन में इसमें अब और देरी न होने की बात कही थी।

पीएम को जवाबी चिट्ठी में मुस्लिम आरक्षण भूलीं माया


यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मुस्लिम आरक्षण पर केंद्र को चिट्ठी लिखने वाली मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जवाबी चिट्ठी के जवाब के बाद उन्हें एक और पत्र लिखा है। हालांकि मायावती ने अपने इस पत्र में बसपा और राज्य सरकार के मुस्लिमों का सबसे बड़ा खैरख्वाह होने का दावा तो किया पर उन्हें आरक्षण दिए जाने संबंधी अपनी पूर्व की मांग का जिक्र तक नहीं किया। मुख्यमंत्री मायावती ने 14 सितंबर को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर मुस्लिमों के लिए आबादी के आधार पर आरक्षण की मांग की थी, जिस पर मनमोहन सिंह ने 24 अक्टूबर को भेजे जवाबी पत्र में कहा, वह (मायावती) चाहें तो कर्नाटक, केरल व आंध्र प्रदेश की तर्ज पर यूपी में मुस्लिमों को आरक्षण दे सकती हैं। मायावती ने इस पत्र के जवाब में पीएम को एक और पत्र लिखा, जिसमें इस राय पर कुछ नहीं कहा, लेकिन मुस्लिम की बदहाली का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते हुए यह जरूर लिखा कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए अत्यंत संवेदनशील तथा कटिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने 24 नवंबर को लिखे पत्र में कहा है कि केंद्र से अपेक्षित सहयोग न मिलने से राज्य सरकार को अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई कई योजनाओं के संचालन में कठिनाई आ रही है। अति पिछड़े वर्ग, जिसमें मुस्लिम वर्ग के अति पिछड़े भी शामिल हैं, के छात्रों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति में राज्य सरकार ने 5286.63 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। इस धनराशि में केन्द्रांश के रूप में 3372.14 करोड़ की धनराशि प्राप्त होनी थी, लेकिन राज्य को अभी तक सिर्फ 346.18 करोड़ रुपये ही मिले हैं। केंद्र सरकार को इस धनराशि को शीघ्र अवमुक्त करना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में बसपा सरकार ने 1995 से ही अन्य पिछड़े वर्गो के लिए लोक सेवाओं में आरक्षण व्यवस्था के तहत मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वगरें को जाति प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था की। इतना ही नहीं 38 जातियों/ उपजातियों को अन्य पिछड़े वर्ग की सूची में सम्मिलित करके उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश में कांशीराम उर्दू, अरबी-फारसी विवि की स्थापना भी की गई है। अल्पसंख्यक समुदाय की आलिम (इंटरमीडिएट) में पढ़ने वाली बालिकाओं को 25 हजार रुपये एवं नि:शुल्क साइकिल देने की व्यवस्था की गयी है। माया ने पत्र में आगे लिखा है कि राज्य सरकार द्वारा पारित उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान प्राधिकरण विधेयक- 2011 भी मंजूरी के लिए केंद्र के पास लंबित है।

Wednesday, November 30, 2011

बादल सरकार की गलत नीतियों से पिछड़ा पंजाब


पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को कहा कि अकाली-भाजपा सरकार की गलत नीतियों से पंजाब देश भर में विकास के मामले में पहले से 18वें स्थान पर खिसक गया है। राज्य में 47 लाख बेरोजगार हैं, जिनके रोजगार का सरकार कोई प्रबंध नहीं कर पाई है। कैप्टन मंगलवार को यहां पंजाब बचाओ रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 2.72 करोड़ की आबादी में 47 लाख बेरोजगार हैं, लेकिन अकाली-भाजपा सरकार ने इन्हें रोजगार देने के लिए कोई उपाय नहीं किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आते ही सभी बेरोजगारों के लिए नौकरी के अवसर पैदा किए जाएंगे। कैप्टन ने कहा कि बादल सरकार ने पचास हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं व समर्थकों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करवाए गए हैं। सत्ता में आने पर सभी मुकदमों को रद कर दोषियों को सबक सिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में नंगल डैम, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पीजीआई कांग्रेस की देन हैं, जबकि बादल ने अपने शासन में कभी कोई बड़ा काम नहीं किया। बादल परिवार व इनके रिश्तेदारों ने बस राज्य को लूटा है। उन्होंने कहा कि बादल के शासन में अमीरों के लिए तो बड़े बडे़ शिक्षण संस्थान व अस्पताल हैं, लेकिन गरीब इनसे महरूम हैं। कांगे्रस सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी कि गरीबों को भी ये सुविधाएं आसानी से मिल सकें। रैली को विधायक सुनील जाखड़ व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगमीत बराड़ ने भी संबोधित किया। उधर, फाजिल्का में पंजाब बचाओ यात्रा की आखिरी रैली को संबोधित करते हुए कैप्टन ने कहा कि बादल अब बूढ़े हो चले हैं, इसलिए उन्हें अब राजनीति छोड़ देनी चाहिए। भले ही उनकी पार्टी कह रही है कि अकाली सरकार बनी तो मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही होंगे, लेकिन जनता ऐसा नहीं होने देगी। हमने रिलायंस के मुकेश अंबानी को निवेश के लिए आमंत्रित किया था। रिलायंस ग्रुप ने राज्य के सभी 12600 गांवों में नए बीज, नई फसलें, बिजाई से लेकर उसे मंडी लाने और बिक्री का प्रबंध करना था, लेकिन बादल सरकार ने पूरी योजना पर पानी फेर दिया।