हृ सरकारी व अनुदानित कॉलेजों में स्नातक स्तर तक लड़कियों को मुफ्त शिक्षा हृ असाध्य रोग हृदय का ऑपरेशन, कैंसर, लीवर, किडनी आदि के मरीजों का मेडिकल कालेज में मुफ्त इलाज हृ निजी उच्च व व्यावसायिक शिक्षा के लिए पांच लाख वार्षिक आय से कम वाले परिवारों के बच्चों की फीस माफ होगी हृ हाईस्कूल तक की शिक्षा प्राप्त लड़कियों को कन्या विद्या धन व अच्छे अंक पाने वाली लड़कियों को साइकिल हृ कक्षा दस पास मुस्लिम लड़कियों को आगे की शिक्षा या निकाह के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान हृ विश्वविद्यालय व कालेजों में छात्रसंघ की बहाली हृ सरकारी उर्दू मीडियम स्कूलों की स्थापना हृ सच्चर आयोग व रंगनाथ मिश्र कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों पर अमल हृ दहशतगर्दी के नाम पर बंद बेकसूर मुसलिम नौजवान की रिहाई और मुआवजा भी हृ मुसलमानों को दलित की तरह जनसंख्या के आधार पर अलग से आरक्षण हृ किसानों की उपज का लागत मूल्य निर्धारित करने के लिए आयोग का गठन हृ 65 वर्ष की उम्र प्राप्त करने वाले छोटी जोत के किसानों के लिए पेंशन का इंतजाम हृ दो फसल देने वाली जमीन के अधिग्रहण में किसानों को सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा मिलेगा हृ शिक्षामित्रों का दो वर्ष में विनियमितीकरण हृ सिंचाई के सरकारी साधन नहर, सरकारी नलकूप से किसानों को मुफ्त पानी हृ किसानों का कर्ज माफ करना, सीमान्त किसानों को 4 फीसदी ब्याज पर कर्ज देना हृ अधिवक्ता कल्याण निधि होगी दो सौ करोड़ की व वृद्ध अधिवक्ताओं को मिलेगी पेंशन हृ सभी तरह के लाइसेंस दस वर्ष का एकमुश्त धन लेकर आजीवन करने हृ साइकिल व रिक्शा बनाने का कारखाना लगाने हृ 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करना हृ वैट की दरें पड़ोसी राज्यों के बराबर करना हृ पदोन्नति में आरक्षण संबंधी हाईकोर्ट के आदेश पर कार्यवाही करना।
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Wednesday, March 14, 2012
भत्ते के लिए ही चाहिए 15 हजार करोड़
स्पष्ट बहुमत के साथ ही सूबे की सत्ता हासिल कर चुकी सपा के सामने अब सूबे के लोगों से किए वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी। वादा निभाने के लिए सरकार को न केवल अरबों रुपये की दरकार होगी बल्कि कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के साथ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कड़े फैसले भी लेने होंगे। बेरोजगारी भत्ते के लिए ही चाहिए डेढ़ हजार करोड़ : समाजवादी पार्टी ने सत्ता में आने पर बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा कर रखी है। पार्टी ने इससे पहले के कार्यकाल में जहां पांच सौ रुपये महीने भत्ता दिया था वहीं इस बार बेरोजगार नौजवानों को एक हजार रुपये देने का वायदा किया गया है। पिछले कार्यकाल में बेरोजगारी भत्ता देने से सरकारी खजाने पर हर वर्ष पांच सौ करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ा था। वैसे तो बेरोजगारी भत्ता पाने के लिए पात्र बेरोजगार नौजवानों का अभी सही-सही आंकड़ा नहीं है, लेकिन भत्ते की राशि दुगनी करने के साथ ही सीमित सरकारी नौकरियों को देखते हुए मोटे तौर पर यह माना जा रहा है कि बेरोजगारी भत्ता देने से इस बार तकरीबन डेढ़ हजार करोड़ रुपये का सालाना वित्तीय भार आएगा। ज्यादा व मुफ्त बिजली देना होगी चुनौती : पार्टी ने दो वर्ष में गांवों के लिए 20 घंटे व शहर को 22 घंटे बिजली देने का वादा किया है। किसानों की तरह गरीब बुनकर को भी मुफ्त बिजली देने की बात घोषणा पत्र में कही गई है। उद्योग व कृषि क्षेत्र को भरपूर बिजली देने के साथ ही निजी व सरकारी क्षेत्र में बिजली उत्पादन को प्राथमिकता देते हुए नए बिजलीघरों का निर्माण व पुराने का सुधार तथा बिजली चोरी रोकने को लाइन लॉस घटाने की घोषणा भी की गई है। गौर करने की बात यह है कि अभी बिजली के उत्पादन व उपलब्धता की जो स्थिति है उससे ज्यादातर शहरों को ही 16-18 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है जबकि गांवों को तो औसतन नौ घंटे बिजली ही आपूर्ति हो रही है। चूंकि बिजली घरों की स्थापना में ही करीब चार वर्ष लगते हैं इसलिए फिलहाल बिजली की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार होता नहीं दिखता। मुफ्त बिजली देने से डेढ़-दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ उस पावर कारपोरेशन पर पड़ेगा जो पहले से ही आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक के घाटे में है। ऐसे में सपा सरकार के सामने इस वादे को पूरा करने के लिए न केवल महंगी दरों पर अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ेगी बल्कि गरीब किसानों-बुनकरों को मुफ्त बिजली देने के लिए बिजली दर बढ़ाकर सूबे के लोगों पर बोझ डालने जैसे अप्रिय निर्णय लेने की चुनौती भी होगी। टैबलेट व लैपटॉप के लिए 3800 करोड़ की होगी दरकार : पार्टी ने हाईस्कूल व इंटर पास विद्यार्थियों को मुफ्त टैबलेट पीसी और लैपटॉप बांटने का वादा किया है। मोटे तौर पर इस वर्ष हाईस्कूल पास विद्यार्थियों की संख्या 25 लाख व इंटर पास 21 लाख रहने की उम्मीद है। अगर टैबलेट पीसी का न्यूनतम मूल्य 50 डालर यानी लगभग 2500 रुपये ही माना जाए तो हाईस्कूल उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उसे देने के लिए सालाना 625 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसी तरह लैपटॉप की न्यूनतम कीमत 15000 रुपये मानने पर इंटरमीडिएट पास विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटॉप मुहैया कराने पर प्रति वर्ष 3150 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। इस तरह से मुफ्त टैबलेट पीसी तथा लैपटॉप देने के लिए ही सरकारी खजाने पर तकरीबन 3800 करोड़ का वित्तीय भार आएगा।
लड़कियों को मुफ्त मिलेगी उच्च शिक्षा : बादल
जनता से पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनने का फरमान लेकर होला मोहल्ला में सियासी कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि वाहेगुरु शक्ति दें, ताकि वह जनता की और सेवा कर सकें। बादल ने विधानसभा चुनाव में बहुमत देने के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अकाली दल धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। पार्टी ने नौ हिंदू मैदान में उतारे, सभी जीते। मालेरकोटला से मुसलमान महिला विधानसभा में पहुंची। अकाली दल सभी धर्मो का सम्मान करता है। बादल ने कहा कि पंजाब में लंगर प्रथा बहुत अच्छी है। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने प्रदेश में आटा-दाल स्कीम चलाई है, जो कि देश में पहली स्कीम है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार बराबरी की नीति पर काम करती है। लड़कियों को लड़के के बराबर करने के उद्देश्य से सरकार नौवीं व दसवीं में पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त साइकिल देगी। इसी तरह बीए व एमए की पढ़ाई भी मुफ्त की जाएगी। कांफ्रेंस में रूपनगर के विधायक डा. दलजीत सिंह चीमा की मांग पर उन्होंने आनंदपुर साहिब व चमकौर साहिब में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने की घोषणा की। आनंदपुर साहिब में भाई जीवन सिंह व चमकौर साहिब में भाई संगत सिंह की याद में स्टेडियम बनाया जाएगा। बादल ने मंच से ही सुखबीर बादल को स्टेडियम की रूपरेखा तय करने का निर्देश दिया। इससे पहले कांफ्रेंस में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल ने घोषणा की कि पंजाब को नशामुक्त राज्य बनाया जाएगा। नशा बेचने वालों को सलाखों के पीछे किया जाएगा। वह यहां परमात्मा का शुक्रिया अदा करने आए हैं।
Monday, February 27, 2012
श्रीप्रकाश के बयान पर यूपी की सियासत में उबाल
केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भले ही दिल्ली पहुंचकर कानपुर में दिए गए अपने बयान से मुकर गए हों, लेकिन उनके बयान से यूपी की सियासत गरमा गई है। इलाहाबाद में मौजूद भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने चुनाव बाद यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाने संबंधी श्रीप्रकाश जायसवाल के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा संविधान के साथ खिलवाड़ किया है। चुनाव परिणाम आने से पहले इस तरह की बयानबाजी एक सोची-समझी चाल है। कांग्रेस इससे पहले भी राष्ट्रपति शासन लगा संविधान के साथ खिलवाड़ कर चुकी है। आडवाणी ने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर ने भी कभी नहीं सोचा रहा होगा कि विषम परिस्थितियों में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने संबंधी संविधान की इस कड़ी का दुरुपयोग होगा। समाजवादी पार्टी ने जायसवाल के बयान को अपनी जीत के रूप में लिया। मतदान के लिए इटावा पहुंचे समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि श्रीप्रकाश जायसवाल के बयान से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है, इसलिए राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकी दे रही है, लेकिन इसकी नौबत नहीं आने वाली है। समाजवादी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल रहा है। उधर, आगरा में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि अब लाट साहब की सरकार बनवाने के लिए कांग्रेसी युवराज के कुछ दरबारी दबाव बना रहे हैं। वह प्रदेश की जनता को गवर्नर राज की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव होते हैं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखने के लिए, न कि राष्ट्रपति शासन के लिए। कांग्रेस संवैधानिक प्रक्रिया को पूरी तरह ध्वस्त करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह हताश हो चुकी है। भाजपा पूरे बहुमत से प्रदेश में सरकार बनाएगी।
Wednesday, December 7, 2011
आदतन भ्रष्टाचारियों को बचाते हैं पवार : अन्ना
कृषि मंत्री शरद पवार को एक युवक द्वारा थप्पड़ मारने के बाद बस एक ही थप्पड़ की टिप्पणी से विवाद में आए अन्ना हजारे ने नए सिरे से आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया है। हजारे ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि पवार की भ्रष्ट लोगों को बचाने की पुरानी आदत है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पवार ने भ्रष्टाचार के कई मामलों से आंखें मूंद लीं। अगर जांच का आदेश दिया जाता है, तो स्पष्ट हो जाएगा कि कौन जिम्मेदार रहा है। उन्होंने थप्पड़ वाली अपनी टिप्पणी को भी जायज ठहराया। हजारे ने कहा कि 24 नवंबर को दिल्ली में एक समारोह से निकलते वक्त पवार को एक सिख युवक ने थप्पड़ मार दिया था। अब इस बात पर चर्चा करना जरूरी है कि युवक ने थप्पड़ क्यों मारा। आज भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। भ्रष्टाचार ने आम आदमी का जीना दूभर कर दिया है। भ्रष्टाचार के कारण ही महंगाई बढ़ी है। जब पवार पर हमले की घटना पर पत्रकारों ने अन्ना हजारे से प्रतिक्रिया मांगी थी, तो उन्होंने कहा था कि बस एक थप्पड़। उन्होंने माना है कि उन्होंने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंसा की, लेकिन समाज की बेहतरी के लिए ऐसा किया। कई राजनेताओं को हमले की घटना से बुरा लगा। उनमें से कई काफी नाराज भी हुए। पवार पर हमला करते हुए उन्होंने लिखा है कि शरद केंद्र में कृषि मंत्री हैं और राज्य में बिजली मंत्री भी उनकी ही पार्टी के हैं। आज 22 साल बाद भी किसानों के बिजली पंप कम वोल्टेज के कारण जल जाते हैं, फसलें खराब हो जाती हैं, ट्रांसफॉर्मर जल जाते हैं, लेकिन तब भी राजनेताओं को गुस्सा नहीं आता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने लिखा है कि किसानों ने पुणे के पास प्रदर्शन किया। उन पर गोलियां चलाई गई। तीन किसानों की मौत हो गई, लेकिन राजनेताओं को गुस्सा नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि पवार ने सड़े गेहूं का आयात किया और उसे बड़े गड्ढों में दबा दिया गया। पवार के संबंधी पद्मसिंह पाटिल कैबिनेट में मंत्री थे। जब वह मंत्री थे, तो भ्रष्टाचार में लिप्त थे। मैंने जांच की मांग की। जांच नहीं हुई, तो आंदोलन शुरू किया। नतीजतन जांच का आदेश देना पड़ा। मंत्री दोषी साबित हुए और उन्हें कैबिनेट से हटाया गया।
Friday, December 2, 2011
पीएम को जवाबी चिट्ठी में मुस्लिम आरक्षण भूलीं माया
यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मुस्लिम आरक्षण पर केंद्र को चिट्ठी लिखने वाली मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जवाबी चिट्ठी के जवाब के बाद उन्हें एक और पत्र लिखा है। हालांकि मायावती ने अपने इस पत्र में बसपा और राज्य सरकार के मुस्लिमों का सबसे बड़ा खैरख्वाह होने का दावा तो किया पर उन्हें आरक्षण दिए जाने संबंधी अपनी पूर्व की मांग का जिक्र तक नहीं किया। मुख्यमंत्री मायावती ने 14 सितंबर को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर मुस्लिमों के लिए आबादी के आधार पर आरक्षण की मांग की थी, जिस पर मनमोहन सिंह ने 24 अक्टूबर को भेजे जवाबी पत्र में कहा, वह (मायावती) चाहें तो कर्नाटक, केरल व आंध्र प्रदेश की तर्ज पर यूपी में मुस्लिमों को आरक्षण दे सकती हैं। मायावती ने इस पत्र के जवाब में पीएम को एक और पत्र लिखा, जिसमें इस राय पर कुछ नहीं कहा, लेकिन मुस्लिम की बदहाली का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते हुए यह जरूर लिखा कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए अत्यंत संवेदनशील तथा कटिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने 24 नवंबर को लिखे पत्र में कहा है कि केंद्र से अपेक्षित सहयोग न मिलने से राज्य सरकार को अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई कई योजनाओं के संचालन में कठिनाई आ रही है। अति पिछड़े वर्ग, जिसमें मुस्लिम वर्ग के अति पिछड़े भी शामिल हैं, के छात्रों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति में राज्य सरकार ने 5286.63 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। इस धनराशि में केन्द्रांश के रूप में 3372.14 करोड़ की धनराशि प्राप्त होनी थी, लेकिन राज्य को अभी तक सिर्फ 346.18 करोड़ रुपये ही मिले हैं। केंद्र सरकार को इस धनराशि को शीघ्र अवमुक्त करना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में बसपा सरकार ने 1995 से ही अन्य पिछड़े वर्गो के लिए लोक सेवाओं में आरक्षण व्यवस्था के तहत मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वगरें को जाति प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था की। इतना ही नहीं 38 जातियों/ उपजातियों को अन्य पिछड़े वर्ग की सूची में सम्मिलित करके उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश में कांशीराम उर्दू, अरबी-फारसी विवि की स्थापना भी की गई है। अल्पसंख्यक समुदाय की आलिम (इंटरमीडिएट) में पढ़ने वाली बालिकाओं को 25 हजार रुपये एवं नि:शुल्क साइकिल देने की व्यवस्था की गयी है। माया ने पत्र में आगे लिखा है कि राज्य सरकार द्वारा पारित उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान प्राधिकरण विधेयक- 2011 भी मंजूरी के लिए केंद्र के पास लंबित है।
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