महंगाई, कालेधन और भ्रष्टाचार के सवालों के बीच देश के डेढ़ सौ से अधिक दलित सांसदों ने एससी, एसटी के आरक्षण के मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है। वे कार्यकारी आदेश से सरकारी नौकरियों में मिले इस आरक्षण के लिए संसद के इसी सत्र में कानून बनाने की मांग पर अड़ गए हैं। साथ ही प्रस्तावित लोकपाल में भी दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों व महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर दी है। ऐसा नहीं होने पर एससी-एसटी संसदीय फोरम ने संसद को न चलने देने की चेतावनी भी दे दी है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अनुसूचित जाति-जनजाति (एसटी-(एससी) संसदीय फोरम के बैनर तले एकजुट सांसदों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री नारायण सामी से बुधवार को यहां आरक्षण के मुद्दे पर फिर से बात की। नारायणसामी से मुलाकात के बाद फोरम के सदस्य व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया, फोरम के सचिव व राज्यसभा सदस्य जेडी सीलम, लोजपा प्रमुख व राज्यसभा सदस्य रामविलास पासवान ने बुधवार को यहां संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि इन मसलों पर अब वे गुरुवार को प्रधानमंत्री से भी मिलेंगे। जबकि, संसद के पिछले सत्र में भी उनसे व नारायणसामी से मिल चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। पुनिया ने कहा कि प्रस्तावित लोकपाल के लिए बनने वाली सर्च कमेटी, सेलेक्शन कमेटी और लोकपाल के ढांचे (संस्था) में भी दलितों, पिछड़ों (ओबीसी), अल्पसंख्यकों व महिलाओं को मिलाकर 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति का 15 प्रतिशत व जनजाति का 7.5 प्रतिशत दशकों पुराना आरक्षण अभी तक महज एक कार्यकारी आदेश पर टिका हुआ है। फोरम की मांग इस आरक्षण के लिए संसद से कानून बनाने की है। नारायणसामी ने कानून मंत्रालय से मशविरा कर विधेयक लाने को कहा था, अब कुछ नहीं हुआ। फोरम की मांग न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति में भी एससी-एसटी का आरक्षण की है।
Showing posts with label पेज न.३. Show all posts
Showing posts with label पेज न.३. Show all posts
Thursday, December 8, 2011
Monday, October 17, 2011
कश्मीर पर प्रशांत भूषण की भाषा बोलीं मेधा पाटकर
टीम अन्ना के एक और सहयोगी मेधा पाटकर ने अलगाववादियों के सुर में सुर मिलाकर गांधीवादी नेता अन्ना हजारे के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पाटकर ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफास्पा) को कश्मीर समस्या की जड़ करार दिया है। इससे पहले प्रशांत भूषण ने पाकिस्तानी सरकार के रुख की हिमायत करते हुए कहा था कि कश्मीर की जनता अगर जनमत के जरिए विभाजन के पक्ष में फैसला करती है तो उसे देश से अलग कर देना चाहिए। विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने रविवार को कवयित्री व आंदोलनकर्ता इरोम चानू शर्मीला के छेड़े गए अभियान के तहत अफास्पा हटाने के लिए श्रीनगर में रैली निकाली, जिसमें करीब साठ लोगों ने हिस्सा लिया। इस पहले लाल चौक स्थित प्रेस कॉलोनी में धरना भी दिया गया। पाटेकर ने कहा कि इस कानून के कारण लोगों का लोकतंत्र से विश्वास उठ चुका है। जब तक यह कानून रहेगा तब तक राज्य में शांति बहाल नहीं हो सकती। इस कानून से लोग दहशत में हैं। वह खुलकर सांस नहीं ले पा रहे हैं। हमें कोशिश करनी चाहिए कि इन कानूनों को हटाकर लोगों को आजादी से सांस लेने दी जाए। तभी यहां के लोगों के दिल जीते जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर एक जटिल समस्या है। इसके लिए अफास्पा को हटाना जरूरी है। मणिपुर, पंजाब, असम व जम्मू-कश्मीर के लोगों को इस कानून का खामियाजा भुगतना पड़ा है। कश्मीर समस्या सियासी ढंग से ही हल की जा सकती है। कश्मीर में जनमत संग्रह के बारे में उन्होंने कहा कि हम यहां अफास्पा हटाने की मांग लेकर आए हैं। फिलहाल हमें इसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य प्रशांत भूषण के कश्मीर पर दिए गए बयान पर पाटकर ने कहा कि यह उनकी निजी राय है। केंद्र को कश्मीर समस्या से संबंधित रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि वार्ताकारों की सिफारिशों के साथ केंद्र को कश्मीरियों की सिफारिशों पर भी गौर करना चाहिए। कश्मीरी अफास्पा हटाने की सिफारिश कर रहे हैं। सरकार को जनशक्ति को ध्यान में रखते हुए अफास्पा हटाना ही होगा।
Subscribe to:
Posts (Atom)