उत्तर प्रदेश के 403 विधायकों में 189 यानी कुल 47 फीसदी ऐसे हैं, जिनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। इनमें 98 ऐसे हैं जिन पर गंभीर अपराधों के तहत मुकदमे दर्ज हैं। वहीं दो तिहाई से कुछ ज्यादा यानी 271 विधायक करोड़पति हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच ने रविवार को पत्रकार वार्ता में नवनिर्वाचित विधायकों के हलफनामे का विश्लेषण करते हुए संख्या जारी की। पिछली बार 140 दागी थे। सूबे में आपराधिक मामलों में लिप्त विधायकों की संख्या में 12 फीसदी की वृद्धि हुई है। आपराधिक आरोपों से घिरे विधायकों में बसपा के 29, सपा के 111, भाजपा के 25, कांग्रेस के 13, रालोद के दो, पीस पार्टी के दो, कौमी एकता दल के एक समेत पांच निर्दलीय भी हैं। यूपी इलेक्शन वॉच के मुताबिक सूबे में सबसे अमीर विधायक नवाब काजिम अली खान हैं जो रामपुर जिले के स्वार क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुने गए हैं। दूसरे नंबर पर मुबारकपुर विधानसभा क्षेत्र से बसपा से चुने गए शाह आलम व तीसरे नंबर पर नोएडा के भाजपा विधायक महेश शर्मा हैं। नवाब काजिम अली खान की संपत्ति 56.89 करोड़, शाह आलम की 54.44 करोड़ और महेश शर्मा की 37.45 करोड़ है। छह विधायकों ने अपनी संपत्ति पांच लाख या इससे भी कम घोषित की है। 22 विधायकों ने अपनी देनदारियां एक करोड़ या इससे ज्यादा घोषित की है। 2012 में चुने गए 271 विधायक करोड़पति हैं जबकि 2007 में इनकी संख्या सिर्फ 124 थी। करोड़पति विधायकों की संख्या में यह इजाफा करीब 37 फीसदी का है। इलेक्शन वॉच ने मुख्य राजनीतिक दलों के प्रत्येक उम्मीदवार की औसतन संपत्ति भी घोषित की है। इसमें बसपा की 4.44 करोड़, सपा की 2.52 करोड़, भाजपा की 4.01 करोड़ और कांग्रेस की 4.61 करोड़ है। सूबे के 239 विधायकों की शैक्षिक योग्यता स्नातक या इससे अधिक है। दस फीसदी भी नहीं महिलाएं : सूबे में कुल 32 महिला विधायक चुनी गई हैं। इनमें सपा की 19, बसपा की तीन, भाजपा की छह और कांग्रेस से जीतने वाली दो महिलाएं हैं। केवल 40 विधायक आठवीं पास और इससे भी कम हैं। इनमें 14 केवल साक्षर हैं। दसवीं पास 41 और 12वीं पास 76 विधायक हैं। इस बार विधान सभा चुनाव में 6839 उम्मीदवारों ने 223 दलों का प्रतिनिधित्व किया है। 2007 में 6086 उम्मीदवारों ने 131 दलों का प्रतिनिधित्व किया था। 2007 के मुकाबले 2012 में राजनीतिक दलों में 70 फीसदी और उम्मीदवारों में 12 फीसदी की वृद्धि है। विधानसभा के अबकी चुनाव में केवल 11 दलों के उम्मीदवार जीते, जिनमें छह निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं।
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Wednesday, March 14, 2012
उत्तराखंड में कोटद्वार का नतीजा सबसे पहले
लगभग सवा दो महीने चली विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के बाद अब अंतत: मंगलवार को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में कैद कुल 788 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला हो जाएगा। साथ ही साफ हो जाएगा कि उत्तराखंड में जनता ने अगले पांच साल के लिए किस पार्टी के पक्ष में जनादेश दिया। सुबह ठीक आठ बजे राज्य के सभी तेरह जिलों में बनाए गए 16 मतगणना केंद्रों में एक साथ वोटों की गिनती आरंभ होगी। संभावना है कि दोपहर बाद लगभग एक बजे तक सभी 70 सीटों के नतीजे सामने आ जाएंगे। सबसे कम बूथों वाली विधानसभा सीट होने के कारण पौड़ी जिले में कोटद्वार का नतीजा सबसे पहले सामने आ सकता है, इस सीट से मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी मैदान में हैं। राज्य की 70 विधानसभा सीटों के लिए 30 जनवरी को 9744 मतदान केंद्रों पर एक साथ मतदान हुआ था। इस बार राज्य के कुल 63.63 लाख मतदाताओं में से 67.22 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। सभी 70 सीटों पर भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सपा, उत्तराखंड क्रांति दल-पी, रक्षा मोर्चा समेत कई अन्य दलों व निर्दलीय समेत कुल 788 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संख्या 262 है। जिन दिग्गजों की किस्मत दांव पर है उनमें मुख्य हैं, भुवन चंद्र खंडूड़ी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विस अध्यक्ष हरबंस कपूर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य, डॉ. हरक सिंह रावत। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने बताया कि मतगणना के लिए राज्य के सभी 16 मतगणना केंद्रों में चाकचौबंद व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतगणना को लेकर भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर न आने वाले कार्मिकों और आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
राहुल-अखिलेश की मेहनत का नतीजा आज
उत्तर प्रदेश में 22 साल सत्ता वापसी के लिए प्रयासरत कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और एक बार फिर से अपने पिता को मुख्यमंत्री देखने का सपना सजोने वाले सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की मेहनत का फैसला मंगलवार को होगा। वोटों की गिनती मंगलवार को सुबह आठ बजे से शुरू होगी और दोपहर तक नतीजे आने की संभावना है। इस बार के चुनाव में 403 सीटों की नुमाइंदगी का फैसला 6839 उम्मीदवारों में होगा। इनमें कई बड़े सूरमा भी हैं। पहला नतीजा 11 बजे तक आ जाने की संभावना है। अनुमान है कानपुर की आर्यनगर सीट का परिणाम सबसे पहले आएगा। वहां सबसे कम मतदान केंद्र हैं। 24 दिसंबर को 16वीं विधानसभा के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ शुरू चुनावी गहमा-गहमी तीन मार्च को अंतिम चरण के मतदान के बाद भले थम गई हो लेकिन नतीजों को लेकर उत्सुकता अब शबाब पर है। रिकार्ड मतदान से अप्रत्याशित नतीजों के कयास लगाए जा रहे हैं। लाख टके का सवाल फिजा में यही तैर रहा है कि किसकी सरकार बनेगी। एक्जिट पोल में किसी को भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की बात आने से जोड़-तोड़ की संभावना को बल मिला है। इस बीच नेताओं के बीच जुबानी जंग बढ़ गई है। नतीजे आने से पहले ही केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कांग्रेस-रालोद व बसपा गठबंधन की वकालत कर यूपी की राजनीति में नए विकल्प की संभावना जगा दी है। वर्मा इस पर अड़े हैं कि स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में वह सपा की सरकार नहीं बनने देंगे तो उधर सपा नेताओं ने भी बेनी प्रसाद वर्मा को खूब खरी-खोटी सुनाई। अखिलेश ने उन्हें कांग्रेस में उधार का कमांडर करार दिया जोकि अपनी हार सुनिश्चित जानकर अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में अलग-अलग तरह के विकल्पों की चर्चा हो रही है। प्रमुख विकल्प के रूप में सपा-कांग्रेस व रालोद गठबंधन के कयास लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि भले ही अभी दोनों दल एक दूसरे को नकार रहे हों लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए साम्प्रदायिक ताकतों को परास्त करने के नाम पर हाथ मिला सकते हैं। एक विकल्प यह भी जताया जा रहा है कि अगर समाजवादी पार्टी को ज्यादा विधायकों की जरूरत नहीं पड़ी तो रालोद और अन्य छोटे दलों के साथ सपा सरकार बना सकती है। तीसरे विकल्प में बसपा-कांग्रेस-रालोद की चर्चा है। चौथा विकल्प जो चर्चा में है वह बसपा-रालोद और छोटे दलों का है। भाजपा भले ही बार-बार दोहराया रही है कि बसपा के साथ उसका कोई समझौता नहीं होगा पर बसपा-भाजपा गठबंधन की भी खूब चर्चा है। सभी चैनलों के एक्जिट पोल में नंबर एक सपा में उत्साह का माहौल है। वैसे तो पार्टी के लोग आन रिकार्ड स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है लेकिन आफ द रिकार्ड वो लोग यह कह रहे हैं कि अगर स्पष्ट बहुमत नहीं भी मिलता है तो भी उन्हें जरूरी समर्थन जुटाने में कोई मुश्किल नहीं आएगी। समर्थन किससे लिया जाएगा, यह इस पर निर्भर है कि समर्थन के लिए उसे कितने विधायकों की जरूरत पड़ती है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह व अखिलेश यादव सोमवार को लखनऊ में ही थे। उनकी मीडिया के लोगों से जब-जब भी बात हुई, उनसे यही सवाल हुआ कि स्पष्ट बहुमत न आने की स्थिति में क्या कांग्रेस से समर्थन लिया जा सकता है, दोनो नेताओं ने कहा उन्हें पूरा विश्वास है कि सपा को स्पष्ट बहुमत मिल रहा है। मुलायम ने कहा, अब जब नतीजे आने में कुछ ही घंटे का रह गए हैं तो कयासबाजी करने का कोई औचित्य नहीं है। सपा और कांग्रेस में इस बार मुस्लिम मतों की मारामारी रही है। परिणाम से साबित हो जाएगा कि सूबे के मुस्लिम ने सियासी रूप से किसका साथ दिया है। बसपा की सोशल इंजीनियरिंग इस बार शुरू से ही छितराई नजर आई है। चुनाव से पहले मायावती के बीस से अधिक मंत्रियों और सौ से अधिक विधायकों का टिकट काटने का फार्मूला कितना असरदार होता है, यह भी देखने की बात होगी। इसके अलावा सुशासन के राग के साथ उतरी भाजपा की पिछड़ों को साथ जोड़ने व बाबू सिंह कुशवाहा के खतरों को नजरअंदाज करने के रणनीतिक फैसले की मीमांसा भी होगी। कांग्रेस ने यूपी के इस समर में बड़ी उम्मीदें पाली हैं। उसके मुस्लिम आरक्षण कार्ड, रालोद से गठबंधन और बाहरी उम्मीदवारों पर भरोसा जताने के निर्णय पर जनता का क्या रुख रहा, परिणाम यह भी साबित कर देंगे।
Wednesday, February 29, 2012
मायावती ने सपा, कांग्रेस व भाजपा पर साधा निशाना
कई वर्षो तक एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस सरकार ने गरीबों को और गरीब बनाया और बसपा में पांच वर्ष के कार्यकाल में विकास की गंगा बहाई है। राहुल जिन्हें भिखारी बता रहे हैं, कांग्रेस के शासन में वही लोग रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश से पलायन कर दूसरे राज्यों में जाकर बसे थे। यह बातें मुख्यमंत्री मायावती ने यहां बुधवार को पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में आठ विधानसभा क्षेत्रों की संयुक्त जनसभा में कही। उन्होंने सपा, भाजपा व कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। कहा, बसपा सरकार को पूर्व सरकारों की गलत आर्थिक नीतियां विरासत में मिलीं। इसके चलते वर्ष 2007 में सरकार बनने पर सबसे पहले अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों में विकास कराया गया। मायावती ने कहा कि यदि प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो गुंडाराज कायम हो जाएगा। शाम ढलते ही महिलाओं का घर से निकलना तक दूभर होगा।
महंगाई और भ्रष्टाचार पर पीएम जनता को जवाब दें
भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आगामी तीन मार्च को गोवा विधानसभा चुनाव से पहले अपने चुनावी अभियान के दौरान जनता को यह जवाब देना होगा कि वह क्यों मंहाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर अंकुश नहीं लगा पाए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री को हमें बताना होगा कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं। वह क्यों महंगाई पर काबू नहीं पा पाए तथा देश में बेरोजगारी के मुद्दे के हल के लिए उन्होंने क्या किया। नायडू ने कहा कि तीन राष्ट्रीय मुद्दे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई गोवा चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि राज्य की दिगम्बर कामत नीत सरकार ने स्थिरता प्रदान की।
मणिपुर में 67 मतदान केंद्रों पर चार को पुनर्मतदान
मणिपुर विधानसभा चुनाव में कथित अनियमितताओं की खबरों के बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को राज्य में नौ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 67 मतदान केंद्रों पर चार मार्च को पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया है। मणिपुर में विधानसभा की 60 सीटों के लिए 28 जनवरी को मतदान हुआ था। चुनाव आयोग ने कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने के निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया है। कांग्रेस शासित राज्य मणिपुर में भाजपा, एनसीपी, सीपीआई, जदयू मणिपुर पीपुल्स पार्टी सहित अनेक प्रमुख विपक्षी दलों ने मतदान में कथित गड़बड़ी की चुनाव आयोग से शिकायत की थी।
छठवें चरण में वोटर भी बढ़े और मतदान भी
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा के मुताबिक छठवें चरण के मतदान में 45 फीसद अधिक लोगों ने वोट डाले। पिछले चुनाव में यहां 89.48 लाख मतदाताओं ने वोट डाले थे। इस बार यह संख्या बढ़कर एक करोड़ 39 लाख है। मतदाताओं की संख्या के हिसाब से यह वृद्धि 45 फीसद है। वैसे मतदान प्रतिशत में भी 13.05 प्रतिशत वृद्धि हुई है। गत चुनाव में यहां सिर्फ 46.81 प्रतिशत ही मतदान हुआ था जो इस बार 60.10 फीसद है। मतदान के दौरान 68 शिकायतें आईं जिनमें अधिकांश मतदान सूची में नाम न होने व वोटर पर्ची से जुड़ी शिकायतें थीं। इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में गड़बड़ी की 28 शिकायतें आईं जिन्हें दूर कराया गया। उन्होंने बताया कि आयोग ने 365 मतदान केंद्रों से मतदान का सीधा प्रसारण किया। इसके अलावा 1015 वीडियो कैमरे व 2353 डिजटल कैमरे लगाए। हर केंद्र पर केंद्रीय पुलिस बल मौजूद रहा। एक लाख पंद्रह हजार कर्मचारियों ने चुनाव संपन्न कराया। विकास कार्य न होने से क्षुब्ध होकर सहारनपुर के बेहट विधानसभा क्षेत्र के दो गांवों हुसैन मलक और शाहपुरा ने मतदान का बहिष्कार किया। यह पूछे जाने पर कि कुछ स्थानों पर मतदाताओं को वोट देने से रोकने के आरोप सामने आए हैं, उन्होंने कहा कि अभी तक आयोग के सामने यह मामला नहीं आया है। कहीं से हिंसा का समाचार भी नहीं प्राप्त हुआ।
किसानों की जमीन नीलाम नहीं होने देगी सपा : मुलायम
सपा सुप्रीमो व सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव बसपा और कांग्रेस पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि सत्ता में आए तो किसानों की जमीन नीलाम नहीं होने देंगे। वैट की तरह यूपी में विदेशी खुदरा व्यापार नहीं होने देंगे। कैंसर जैसे गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों का सरकारी खर्चे से उपचार कराया जाएगा। सपा सुप्रीमो मंगलवार को बरेली और बदायूं में जनसभाओं को संबोधित कर रहे थे। बसपा सरकार पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पांच साल में इस सरकार ने बस पत्थर लगवाने और रुपया गिनने का काम किया। सवाल किया कि मुख्यमंत्री बताएं कि उन्होंने दलितों के लिए क्या किया? दलितों की बेटियों के साथ बलात्कार की 19 सौ घटनाएं हुई, लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। कहा, बीएसपी के विधायक ही बलात्कारी हैं। बदायूं और बांदा की घटनाएं इसका उदाहरण हैं। अब ऐसी दलित विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। कहा, सत्ता में आने पर किसानों का 50 हजार का कर्ज मांग करेंगे। 4 प्रतिशत पर किसानों को कर्ज मुहैया कराएंगे। किसी किसान की जमीन को नीलाम नहीं होने देंगे। कक्षा 12 तक की पढ़ाई अनिवार्य की जाएगी। कापी-किताबें मुफ्त की जाएंगी। अच्छे नंबर से पास होने वाले छात्र-छात्राओं को 25 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।
Monday, February 27, 2012
कांग्रेस व बसपा भ्रष्टाचार की पहली पाठशाला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने 2जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल, चीनी मिल और एनआरएचएम समेत कई घोटाले गिनाते हुए कांग्रेस और बसपा को भ्रष्टाचार की पहली पाठशाला बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों सरकारों के भ्रष्टाचार में डूबने के कारण ही महंगाई बढ़ी है। भाजपा नेत्री ने हिंदू-मुस्लिम कार्ड भी खेला। कहा, भाजपा मुस्लिमों की विरोधी नहीं पर भारत-पाकिस्तान मैच में मुस्लिम पाक का समर्थन करें, यह नाकाबिले बर्दाश्त है। सुषमा ने मंगलवार को यहां महंगाई, भ्रष्टाचार और किसानों की समस्याओं को गिनाते हुए केंद्र की संप्रग सरकार, सपा और बसपा को जमकर कोसा। कहा, कांग्रेस का हाथ गरीबों और मध्यम वर्गीय जनता की गर्दन मरोड़ रहा है। केंद्र की कांग्रेस और यूपी की बसपा सरकार के मंत्री भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार करते जा रहे हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार के कई मंत्री जेल में हैं, कई जाने की कतार में हैं। जब तक भ्रष्टाचार नहीं थमेगा, महंगाई नहीं थम सकती।
माया को चुभती हैं राहुल की बातें
बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे प्रहार किए। कहा, 50 साल केंद्र और 40 साल तक यूपी में कांग्रेस सत्ता में रही तो क्या किया? कितनी गरीबी, भुखमरी दूर की? फिर कैसे दावे कर रहे हैं कि पांच साल दे दो, यूपी से गरीबी और बेरोजगारी दूर कर देंगे? भीड़ से मुखातिब होकर कहा, राहुल की बातें उन्हें चुभती हैं। दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों को आगाह किया कांग्रेस से सर्वाधिक सावधान रहना होगा। सत्ता की भूखी कांग्रेस जीती तो प्रदेश से गरीबों का पलायन शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री मायावती ने आगरा और अलीगढ़ में अपने भाषण का ज्यादातर समय कांग्रेस और केंद्र सरकार को कोसने में खर्च किया। उन्होंने कहा, राहुल गांधी कहते हैं कि वह कांशीरामजी का सम्मान करते हैं। यह कांग्रेस का दोहरा चरित्र है, क्योंकि कांशीरामजी के देहांत पर जातिवादी मानसिकता वाली इस सरकार ने राष्ट्रीय शोक तक घोषित नहीं किया था। सपा का भी यही रवैया रहा। कांग्रेस की गलत नीतियों ने गरीबी और बेरोजगारी को बढ़ाया है। रोजी-रोटी के लिए यूपी वाले बाहर जाने को मजबूर हैं और कांग्रेस उनका मजाक बना रही है। हमें विरासत में खजाना खाली मिला था। केंद्र भी सहयोग नहीं दे रहा। गन्ना किसानों को सपा-राज का बकाया 2600 करोड़ भी हमने चुकाया है। यूपी के लिए केंद्र से 80,000 करोड़ मांगे थे, कुछ नहीं मिला। केंद्रीय योजनाओं में हजारों करोड़ मिलने थे, वो नहीं दिए। मजबूरन बसपा ने प्राइवेट सेक्टर की योजनाओं से पिछड़े क्षेत्रों का विकास कराया। पश्चिमी यूपी में निजी भागीदारी से कई योजनाएं लाए थे, केंद्र ने उन्हें मंजूरी नहीं दी। बोलीं, केंद्र सरकार आड़े न आई तो इस बार बसपा सरकार प्रदेश को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति देगी।
केंद्र से मिला पैसा साइकिल ने चुराया, हाथी ने खाया
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सूबे की बदहाली के लिए पिछले 22 साल के सपा, भाजपा और बसपा के शासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश को सबने लूटा है। एक बार फिर जनता को गुमराह करने के लिए वादे कर रहे हैं। उनके निशाने पर ज्यादातर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ही रहे। सवाल किया कि जब बसपा सरकार किसानों पर जुल्म ढा रही थी, तब वह कहां थे? राहुल ने मंगलवार को मैनपुरी, एटा, बुलंदशहर व मेरठ में जनसभा को संबोधित किया। सभाएं मुलायम के प्रभाव वाले इलाकों में थी। लिहाजा, राहुल के निशाने पर भी सबसे अधिक वही थे। कहा, मुलायम सिंह यादव वादे करके चौथी बार मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। कांग्रेस वादे नहीं करती, काम कर दिखाने में विश्वास रखती है। हम बेरोजगारी भत्ता नहीं रोजगार देंगे। किसानों की तरफ मुखातिब होकर बोले, मुलायम तब कहां थे, जब बसपा सरकार किसानों की जमीन कौड़ी के भाव ले रही थी। भट्टा-पारसौल और टप्पल में किसानों के सीने पर पुलिस की गोलियां चल रही थी। तब केवल राहुल गांधी दर्द बांटने पहुंचा था। मुस्लिमों पर भी पांसा फेंका। सवाल किया, मुलायम अब आरक्षण की बात कह रहे हैं, जब वह सत्ता में थे तो क्यों नहीं दिया? उन्होंने कहा, मुस्लिम समाज के युवाओं के भविष्य को संवारने को केंद्र ने जो स्कॉलरशिप भेजी, पहले साइकिल ने चुराया, इसके बाद हाथी ने खाया। बसपा पर हमला बोलते हुए कहा, केंद्र ने मनरेगा और अन्य योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये भेजे, लेकिन इस प्रदेश की मुखिया को वह नाटक लगा। राहुल ने जनता से वादा भी किया कि जब तक यूपी खड़ा नहीं होता, वह यूपी छोड़कर नहीं जाएंगे।
यूपी में और बढ़े त्रिशंकु विधानसभा के आसार
पहले चार चरण में बढ़े मतदान और मतदाताओं के रुझान ने यूपी के सियासी नतीजों को और उलझा दिया है। मतदान शुरू होने तक दो ही सवाल थे। पहला बसपा और सपा में कौन प्रथम होगा? दूसरा भाजपा और कांग्रेस के बीच तीसरे नंबर पर कौन होगा? मगर अब चार चरणों के बाद पहले नंबर की तस्वीर तो कुछ साफ होती नजर आ रही है, लेकिन दूसरे और तीसरे नंबर की लड़ाई पेचीदी हो गई है। त्रिशंकु विधानसभा की तरफ जा रहे यूपी के नतीजे वास्तव में 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले का लिटमस टेस्ट होंगे। जाहिर तौर पर जितनी नजरें सपा-बसपा पर हैं, उससे कहीं ज्यादा देश की नजर दोनों राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और भाजपा के प्रदर्शन पर हैं। दरअसल, मतदान शुरू होने से पहले लग रहा था कि पहले-दूसरे नंबर की लड़ाई में यानी सपा और बसपा होंगे और तीसरे चौथे नंबर का संघर्ष भाजपा-कांग्रेस के बीच होगा। मगर ऐसा लगता है कि जैसे यूपी के मतदाताओं ने परिवर्तन का मन बना लिया है। बढ़ा मतदान प्रतिशत और उसमें भी युवाओं और महिलाओं की बढ़ी भागीदारी ने यूपी का सियासी समर दिलचस्प कर दिया है। सत्ताधारी बसपा को छोड़ दें तो सपा, भाजपा और कांग्रेस सभी इस बढ़े मतदान प्रतिशत को अपने-अपने पक्ष में तर्को की चाशनी में भिगोकर पेश करने में जुटे हैं। तीनों ही दलों की परिवर्तन की थ्योरी तो समझ में आ रही है, लेकिन बदलाव का वोट किसी एक के खाते में जाने के संकेत कम से कम सियासी पंडित तो नहीं पकड़ पा रहे हैं। दरअसल, जिस सामाजिक गणित को भिड़ाकर बसपा पिछले चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई थी, वह उन्हें कायम नहीं कर सकी। यह भी ठीक है कि मौजूदा चुनाव में 2007 की तरह तत्कालीन सपा शासन में गुंडागर्दी और अराजकता के खिलाफ रोष भी नहीं। मगर बसपा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के साथ-साथ पार्क, मूर्ति और मैदान जैसे मुद्दे शहरी आबादी को तो चिढ़ा ही रहे हैं। तीनों ही विपक्षी दलों ने इन तथ्यों के मद्देनजर ही अपना चुनावी अभियान चलाया। सपा ने मौके को लपकते हुए न सिर्फ विचारधारा और सोच बदली, बल्कि काफी हद तक पार्टी का चेहरा तक बदल दिया है। मुलायम सिंह ने सारे पुराने चेहरों को नेपथ्य में भेज दिया है। वह खुद पूरी कमान अपने हाथ में लिए हैं और नए चेहरे के तौर पर पुत्र अखिलेश को आगे कर दिया है। साथ ही पिछले कार्यकाल में अपराधीकरण के आरोपों के लिए मुलायम खुद सबसे माफी मांग रहे हैं। साथ ही अंग्रेजी और अंग्रेजियत का विरोध करते रहे मुलायम अब युवाओं का साथ पाने की मंशा से कंप्यूटर और टैबलेट बांटने की बात कर रहे हैं। इसका असर भी दिख रहा है और पहले चार चरण में निर्विवाद रूप से सपा को सभी बढ़त दे रहे हैं। दूसरा रोचक तथ्य है भाजपा और कांग्रेस की सियासत। देखा जाए तो यूपी चुनाव का पूरा एजेंडा कांग्रेस ने तैयार किया। मुस्लिम आरक्षण और बाटला हाउस के मुद्दों पर कांग्रेस ने ऐसा माहौल तैयार किया कि सभी दल उसके इर्द-गिर्द ही घूम रहे हैं। देखा जाए तो कांग्रेस के इस मुस्लिम एजेंडे ने ही भाजपा को वोटों के ध्रुवीकरण का मौका दे दिया है। बहुतायत में ब्राह्मण वोटों की वापसी और यादव और कुर्मी को छोड़कर कुशवाहा, लोध, शाक्य और दूसरी पिछड़ी जातियों के बीच भाजपा फिलहाल पहली पसंद के रूप में उभरी है, लेकिन मुस्लिम कार्ड खेलने के बावजूद कांग्रेस इस वर्ग के बीच पहली पसंद के तौर पर नहीं दिख रही है। राहुल जैसा युवा नेता और ताकत होने के बावजूद कांग्रेस निश्चय ही पहले से तो बेहतर करता दिख रही है, लेकिन यूपी में खुद को किसी विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिशें सफल होने में संदेह है।
Saturday, February 18, 2012
भ्रष्टाचार ने रोका यूपी का विकास
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रदेश की दुर्दशा के लिए प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यहां कहा कि केंद्र के पैकेज और आर्थिक सहायता के दुरुपयोग ने प्रदेश को पिछड़ेपन की ओर धकेल दिया। उन्होंने कांग्रेस सरकार आने पर प्रदेश की गाड़ी को विकास के पथ पर फिर से दौड़ाने का वादा कर केंद्र की उपलब्धियों के साथ मिशन-2020 की स्वर्णिम योजनाएं गिनाईं। प्रधानमंत्री यहां कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के बड़े राज्य यूपी की सियासी अहमियत है। बीते 22 साल से गैर कांग्रेसी सरकारों ने इसे पिछड़ेपन की तरफ धकेल दिया। कानपुर मैनचेस्टर कहा जाता था, लेकिन यहां के कारखाने बंद होते गए। दूसरे शहरों में भी बेरोजगारी बढ़ी। बिजली, पानी व सड़कों की दुर्दशा हुई। शिक्षण संस्थान बंद हुए और कानून व्यवस्था की स्थिति भी खराब हुई। बिजली उत्पादन अपेक्षित ढंग से नहीं बढ़ा, जबकि घर हो या कारखाने, सभी जगह बिजली की जरूरत है। चीनी मिलें या तो बंद कर दी गईं या बेच दी गईं। बुनकरों को सूत देने वाली 32 मिलों में ताले पड़ गए। आम आदमी की समस्याएं नहीं समझी गई। उन्होंने कहा कि आज यूपी के हालात बदलने की जरूरत है। ऐसी सरकार चाहिए जो शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर ध्यान दे और जिसका लक्ष्य जातिवादी राजनीति नहीं बल्कि विकास हो। उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस ही ऐसी सरकार दे सकती है। उन्होंने एनआरएचएम का बिना नाम लिए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन आम आदमी को इसका लाभ नहीं मिला। उत्तर प्रदेश सरकार को किसानों का कोई ध्यान नहीं है। केंद्र सरकार तो खाद दे रही है, लेकिन राज्य सरकार की वजह से आम आदमी तक वह नहीं पहुंच पा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार अब आम लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा कानून लाने जा रही है। इसे संसद में रखा गया है। हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। अल्पसंख्यकों के लिए विशेष कार्यक्रम लाए गए हैं। इसमें छात्रों के लिए वजीफा तो मदरसा शिक्षकों के लिए वेतन बढ़ोतरी में सहायता दी गई है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो राज्य का विकास किया जाएगा ताकि कमजोर तबके को इसका लाभ मिले। उन्होंने मिशन-2020 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कांग्रेस ने विजन डाक्यूमेंट तैयार किया है। इसमें सामाजिक न्याय और अधिकार का मजबूत ढांचा है। अच्छा शासन देने के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे ताकि किसी को राज्य छोड़कर नहीं जाना पड़े। प्रधानमंत्री ने प्रदेश सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि राज्य सरकार के लगातार असहयोग के बाद भी पिछली सरकारों के मुकाबले यूपी की पांच गुना ज्यादा मदद की गई। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क रोजगार योजना में 12 हजार सड़कों के लिए साढ़े 9 हजार करोड़ रुपये, हाईवे व फोरलेन के लिए 24 हजार करोड़ रुपये देने के साथ ही कानपुर, फर्रुखाबाद, कासगंज मथुरा रेलवे लाइन को ब्राडगेज कराया जा रहा है। रायबरेली में 1685 करोड़ रुपये से कोच फैक्ट्री स्थापित कराई गई। बुंदेलखंड के लिए 17 सौ करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया ताकि कृषि, डेयरी व पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ हो और पिछड़ापन दूर हो।
प्रदेश में होगा रामराज और बनेगा राम मंदिर : आडवाणी
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुरुवार को यहाँ केंद्र में सरकार बनने पर पृथक बुंदेलखंड व तेलंगाना राज्य बनाने के संकेत दिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश को बीमारू के विश्लेषण से मुक्त कराने व रामराज की स्थापना के लिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने का आह्वान किया। वह यहां भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। भाजपा नेता ने खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी की पंक्तियां सुनाते हुए वीरांगना की नगरी झाँसी से आत्मीय संबंध जोड़े और प्रत्याशी रवि शर्मा को विधानसभा चुनाव की बेला में यहां बुलाने का धन्यवाद किया। उन्होंने जनसंघ के समय से की जा रही छोटे राज्यों की हिमायत का जिक्र किया और याद दिलाया कि भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश में उत्तरांचल, बिहार में झारखंड राज्य बनने की बात थी। पहली बार 1998 में सरकार बनाने का अवसर मिला, तब सर्वसम्मति से इन तीनों राज्यों का गठन कर दिया। तेलंगाना पर कहा कि यूपीए की सरकार के समय में ही तेलंगाना राज्य बन जाता, यदि यूपीए सहयोगी चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी कह देती। आडवाणी ने कहा कि हिंदुस्तान में बिहार का बी, मध्य प्रदेश का एमए, राजस्थान का आर, उत्तर प्रदेश का यू शब्द मिलकर ही बीमारू बन गया। इन चारों प्रांतों में गरीबी, अशिक्षा व पिछड़ापन देख कर तकलीफ होती थी, लेकिन कई प्रदेशों में बदलाव आया, लेकिन उत्तर प्रदेश की स्थिति नहीं बदली। भाजपा की सरकार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास का रास्ता झाँसी से होकर गुजरता है। उन्होंने जनता से भाजपा प्रत्याशी को जिताकर विकास का मार्ग प्रशस्त करने का आह्वान किया।
Wednesday, February 15, 2012
यूपी में अपना दल ने बढ़ाई बड़े दलों की उलझन
इलाहाबाद की बारा विधानसभा सीट पिछली बार भाजपा के कब्जे में थी लेकिन इस बार कुछ भी हो सकता है। यहां बड़े दलों के उम्मीदवारों की मेहनत पर अपना दल भारी है। पिछले चुनाव में इस दल ने यहां के चुनावी समीकरण पलटे थे। इस बार भी ऐसी ही आशंकाएं जताई जा रही हैं। सिर्फ बारा ही नहीं, इलाहाबाद से लेकर वाराणसी तक दो दर्जन से अधिक सीटों पर यही स्थिति है जिसमें इस अपना दल के प्रत्याशियों ने बड़े नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। कुछ तो अपने प्रतिबद्ध पटेल मतों से और कुछ इनके साथ अन्य जातियों के समीकरण बनाकर। संदेश साफ है-जीते तो जीते नहीं तो खेल बिगाड़ेंगे। यही अपना दल की विशिष्टता है। अपने मतों को बिखरने न देना और इसके बूते दूसरों के समीकरण को छिन्न-भिन्न कर देना। पिछले चुनाव यानि 2007 में इस दल को एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी लेकिन 39 सीटों पर चुनाव लड़कर उसने दस फीसदी से अधिक वोट हासिल किए थे। इनमें जहां भी कम मतों से हार-जीत का फैसला हुआ, उसमें उलटफेर का कारण अपना दल उम्मीदवार ही रहे। पार्टी के वरिष्ठ नेता जवाहर लाल पटेल दावा करते हैं-इस बार हम सिर्फ उलटफेर ही नहीं करने जा रहे हैं। हम कई सीटों पर जीतेंगे भी। उनका इशारा रोहनियां से चुनाव लड़ रहीं अनुप्रिया पटेल, इलाहाबाद पश्चिम सीट पर चुनाव लड़ रहे अतीक अहमद, मंडि़याहू से चुनाव लड़ रहे मुन्ना बजरंगी की ओर है। रोहनिया पटेल बाहुल्य क्षेत्र है तो अतीक अहमद के इलाके में इस बार परिसीमन के बाद कई ऐसे क्षेत्र आ गए हैं, जिनमें पटेलों की संख्या अधिक है। पार्टी के लोगों की मानें तो बांदा, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, जौनपुर, फतेहपुर वाराणसी, चंदौली आदि कई जिलों में 45 सीटें ऐसी हैं जिनमें यह पार्टी वोटों का गणित बिगाड़ने में सक्षम है। 2002 में अपना दल गंगापुर की सीट जीतने में भी सफल रहा था। कमेरा समाज को न्याय दिलाने के लिए बना यह दल सोने लाल पटेल के जीवन काल से ही अपना मत प्रतिशत बढ़ाने की कोशिशों में जुटा हुआ है। 1996 के चुनाव में 155 सीटों पर लड़ने वाले इस दल के प्रत्याशियों में 154 की जमानत जब्त हो गई थी। मत भी मात्र दो फीसदी ही हासिल हो सके थे। 2002 में यह दल अवश्य चर्चा में आ गया जबकि इसने 223 उम्मीदवार उतारे लेकिन इसके तीन उम्मीदवार जीतने में सफल रहे। इस बार मतों का प्रतिशत 3.78 प्रतिशत रहा। 2007 में इस दल ने सिर्फ चुनिंदा सीटों यानी 39 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारे और 10.49 फीसदी वोट हासिल कर लिए। सोने लाल पटेल की मौत के बाद संगठन बिखरने का खतरा था राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनकी पुत्री अनुप्रिया पटेल ने किसी भी तरीके से जीत या फिर अपनी हैसियत जताने का फलसफा अपनाया। इसलिए जहां दल ने बाहुबली और माफिया को टिकट देने से परहेज नहीं किया, वहीं अन्य दलों के नेताओं के लिए भी दरवाजे खोलकर रखे। दल ने बसपा से क्षुब्ध आधा दर्जन उम्मीदवारों को टिकट दिया है तो सपा से आये प्रत्याशियों की संख्या भी काफी है। इसके पीछे का उद्देश्य भी साफ है कि किसी भी तरह से मतों का प्रतिशत बढ़े। पार्टी के लचीलेपन को इस तरीके से भी समझा जा सकता है कि रोहनिया में अनुप्रिया पटेल का परचा भरते समय उनके साथ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष हरिवंश सिंह भी मौजूद थे। पार्टी के एक नेता कहते हैं-हमने जहां दूसरी जातियों के लोगों को टिकट दिए हैं, वहां यदि थोड़ा-बहुत भी वोट हमारे पाले में बढ़ा तो परिणाम चौंकाने वाले होंगे।
तीसरे चरण में दस जिलों की 56 सीटों पर मतदान आज
लोकतंत्र को मजबूत करने का एक और मौका आ गया। इस बार इसकी जिम्मेदारी तीसरे चरण के मतदाताओं की उठानी है। उन्हें बुधवार को वोट डालने के लिए घरों से निकलना है। इस चरण में पहले दो चरणों के मुकाबले ज्यादा वोट पड़ने की संभावना है। इसकी वजह इस चरण में उन जिलों का शामिल होना है जिसने देश को कई प्रधानमंत्री दिये हैं। जाहिर है कि ऐसे में यहां के मतदाताओं से जागरूकता की ज्यादा उम्मीद की जा रही है। विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में दस जिलों की 56 सीटों पर मतदान होना है। ये जिले हैं- छत्रपति शाहूजी महराज नगर (अमेठी), सुल्तानपुर, कौशाम्बी, इलाहाबाद, जौनपुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदासनगर, मिर्जापुर और सोनभद्र। मतदान सुबह सात बजे से शुरू होगा। चंदौली जिले के चकिया और सोनभद्र जिले के राबर्टसगंज व दुद्धी निर्वाचन क्षेत्रों में सायं चार बजे तक मतदान होगा। बाकी सभी स्थानों पर शाम पांच बजे तक वोट पड़ेंगे। तीसरे चरण में 77 महिलाओं सहित कुल 1018 प्रत्याशी मैदान में हैं। करीब 1.77 करोड़ से अधिक मतदाता उनकी तकदीर का फैसला करेंगे। इनमें 97.50 लाख पुरुष और 80.30 महिलाएं शामिल हैं। इस चरण में 11607 मतदान केन्द्रों के कुल 18374 पोलिंग स्टेशनों पर मतदान होगा। मंगलवार को ज्यादातर उम्मीदवारों ने जहां बूथ मैनेजमेंट में अपनी ताकत झोंकी वहीं जनसम्पर्क के जरिये मतदाताओं को भी लुभाने का प्रयास किया। इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान भी सभी दलों के दिग्गज नेता जनता के बीच अपनी-अपनी बातें रख चुके हैं। प्रत्याशी भी अपने वादे-इरादे जाहिर कर चुके हैं। अब फैसला मतदाताओं को करना है कि वह अपना कैसा जनप्रतिनिधि चाहते हैं। ये दिग्गज हैं मैदान में इस चरण में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह भाजपा से, मायावती सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, इन्द्रजीत सरोज, विनोद सिंह व मंत्री पद से हटाये गये रंगनाथ मिश्र बसपा से, बसपा सरकार में मंत्री रहे राकेश धर त्रिपाठी निर्दलीय, पूर्व मंत्री अमिता सिंह कांग्रेस से और पूर्व मंत्री उज्जवल रमण सिंह सपा से चुनाव मैदान में हैं। दांव पर दलों की प्रतिष्ठा परिसीमन से पहले सन 2007 के विधानसभा चुनाव में इन दस जिलों की कुल 53 सीटों पर बसपा ने 31, सपा ने 11, भाजपा ने छह, कांग्रेस ने तीन व जदयू ने एक पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में बसपा पर जहां पूंजी बचाने का सर्वाधिक दबाव है वहीं सपा की कोशिश अपना दबदबा कायम करने की है। राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र के कारण यह चरण कांग्रेस की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर होने के कारण भाजपा भी इस चरण को लेकर खासी फ्रिकमंद है। पिछली बार हुआ था 42.63 प्रतिशत मतदान तीसरे चरण के इन जिलों में पिछले विधानसभा चुनाव में 42.63 प्रतिशत मतदान हुआ था। सबसे अधिक मतदान इलाहाबाद जिले के बारा निर्वाचन क्षेत्र में 53.33 प्रतिशत और सबसे कम इलाहाबाद के ही उत्तरी निर्वाचन क्षेत्र में 24.01 प्रतिशत
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