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Monday, February 27, 2012

कांग्रेस व बसपा भ्रष्टाचार की पहली पाठशाला


लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने 2जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल, चीनी मिल और एनआरएचएम समेत कई घोटाले गिनाते हुए कांग्रेस और बसपा को भ्रष्टाचार की पहली पाठशाला बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों सरकारों के भ्रष्टाचार में डूबने के कारण ही महंगाई बढ़ी है। भाजपा नेत्री ने हिंदू-मुस्लिम कार्ड भी खेला। कहा, भाजपा मुस्लिमों की विरोधी नहीं पर भारत-पाकिस्तान मैच में मुस्लिम पाक का समर्थन करें, यह नाकाबिले बर्दाश्त है। सुषमा ने मंगलवार को यहां महंगाई, भ्रष्टाचार और किसानों की समस्याओं को गिनाते हुए केंद्र की संप्रग सरकार, सपा और बसपा को जमकर कोसा। कहा, कांग्रेस का हाथ गरीबों और मध्यम वर्गीय जनता की गर्दन मरोड़ रहा है। केंद्र की कांग्रेस और यूपी की बसपा सरकार के मंत्री भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार करते जा रहे हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार के कई मंत्री जेल में हैं, कई जाने की कतार में हैं। जब तक भ्रष्टाचार नहीं थमेगा, महंगाई नहीं थम सकती।

माया को चुभती हैं राहुल की बातें


बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे प्रहार किए। कहा, 50 साल केंद्र और 40 साल तक यूपी में कांग्रेस सत्ता में रही तो क्या किया? कितनी गरीबी, भुखमरी दूर की? फिर कैसे दावे कर रहे हैं कि पांच साल दे दो, यूपी से गरीबी और बेरोजगारी दूर कर देंगे? भीड़ से मुखातिब होकर कहा, राहुल की बातें उन्हें चुभती हैं। दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों को आगाह किया कांग्रेस से सर्वाधिक सावधान रहना होगा। सत्ता की भूखी कांग्रेस जीती तो प्रदेश से गरीबों का पलायन शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री मायावती ने आगरा और अलीगढ़ में अपने भाषण का ज्यादातर समय कांग्रेस और केंद्र सरकार को कोसने में खर्च किया। उन्होंने कहा, राहुल गांधी कहते हैं कि वह कांशीरामजी का सम्मान करते हैं। यह कांग्रेस का दोहरा चरित्र है, क्योंकि कांशीरामजी के देहांत पर जातिवादी मानसिकता वाली इस सरकार ने राष्ट्रीय शोक तक घोषित नहीं किया था। सपा का भी यही रवैया रहा। कांग्रेस की गलत नीतियों ने गरीबी और बेरोजगारी को बढ़ाया है। रोजी-रोटी के लिए यूपी वाले बाहर जाने को मजबूर हैं और कांग्रेस उनका मजाक बना रही है। हमें विरासत में खजाना खाली मिला था। केंद्र भी सहयोग नहीं दे रहा। गन्ना किसानों को सपा-राज का बकाया 2600 करोड़ भी हमने चुकाया है। यूपी के लिए केंद्र से 80,000 करोड़ मांगे थे, कुछ नहीं मिला। केंद्रीय योजनाओं में हजारों करोड़ मिलने थे, वो नहीं दिए। मजबूरन बसपा ने प्राइवेट सेक्टर की योजनाओं से पिछड़े क्षेत्रों का विकास कराया। पश्चिमी यूपी में निजी भागीदारी से कई योजनाएं लाए थे, केंद्र ने उन्हें मंजूरी नहीं दी। बोलीं, केंद्र सरकार आड़े न आई तो इस बार बसपा सरकार प्रदेश को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति देगी।

केंद्र से मिला पैसा साइकिल ने चुराया, हाथी ने खाया


कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सूबे की बदहाली के लिए पिछले 22 साल के सपा, भाजपा और बसपा के शासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश को सबने लूटा है। एक बार फिर जनता को गुमराह करने के लिए वादे कर रहे हैं। उनके निशाने पर ज्यादातर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ही रहे। सवाल किया कि जब बसपा सरकार किसानों पर जुल्म ढा रही थी, तब वह कहां थे? राहुल ने मंगलवार को मैनपुरी, एटा, बुलंदशहर व मेरठ में जनसभा को संबोधित किया। सभाएं मुलायम के प्रभाव वाले इलाकों में थी। लिहाजा, राहुल के निशाने पर भी सबसे अधिक वही थे। कहा, मुलायम सिंह यादव वादे करके चौथी बार मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। कांग्रेस वादे नहीं करती, काम कर दिखाने में विश्वास रखती है। हम बेरोजगारी भत्ता नहीं रोजगार देंगे। किसानों की तरफ मुखातिब होकर बोले, मुलायम तब कहां थे, जब बसपा सरकार किसानों की जमीन कौड़ी के भाव ले रही थी। भट्टा-पारसौल और टप्पल में किसानों के सीने पर पुलिस की गोलियां चल रही थी। तब केवल राहुल गांधी दर्द बांटने पहुंचा था। मुस्लिमों पर भी पांसा फेंका। सवाल किया, मुलायम अब आरक्षण की बात कह रहे हैं, जब वह सत्ता में थे तो क्यों नहीं दिया? उन्होंने कहा, मुस्लिम समाज के युवाओं के भविष्य को संवारने को केंद्र ने जो स्कॉलरशिप भेजी, पहले साइकिल ने चुराया, इसके बाद हाथी ने खाया। बसपा पर हमला बोलते हुए कहा, केंद्र ने मनरेगा और अन्य योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये भेजे, लेकिन इस प्रदेश की मुखिया को वह नाटक लगा। राहुल ने जनता से वादा भी किया कि जब तक यूपी खड़ा नहीं होता, वह यूपी छोड़कर नहीं जाएंगे।

यूपी में और बढ़े त्रिशंकु विधानसभा के आसार


पहले चार चरण में बढ़े मतदान और मतदाताओं के रुझान ने यूपी के सियासी नतीजों को और उलझा दिया है। मतदान शुरू होने तक दो ही सवाल थे। पहला बसपा और सपा में कौन प्रथम होगा? दूसरा भाजपा और कांग्रेस के बीच तीसरे नंबर पर कौन होगा? मगर अब चार चरणों के बाद पहले नंबर की तस्वीर तो कुछ साफ होती नजर आ रही है, लेकिन दूसरे और तीसरे नंबर की लड़ाई पेचीदी हो गई है। त्रिशंकु विधानसभा की तरफ जा रहे यूपी के नतीजे वास्तव में 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले का लिटमस टेस्ट होंगे। जाहिर तौर पर जितनी नजरें सपा-बसपा पर हैं, उससे कहीं ज्यादा देश की नजर दोनों राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और भाजपा के प्रदर्शन पर हैं। दरअसल, मतदान शुरू होने से पहले लग रहा था कि पहले-दूसरे नंबर की लड़ाई में यानी सपा और बसपा होंगे और तीसरे चौथे नंबर का संघर्ष भाजपा-कांग्रेस के बीच होगा। मगर ऐसा लगता है कि जैसे यूपी के मतदाताओं ने परिवर्तन का मन बना लिया है। बढ़ा मतदान प्रतिशत और उसमें भी युवाओं और महिलाओं की बढ़ी भागीदारी ने यूपी का सियासी समर दिलचस्प कर दिया है। सत्ताधारी बसपा को छोड़ दें तो सपा, भाजपा और कांग्रेस सभी इस बढ़े मतदान प्रतिशत को अपने-अपने पक्ष में तर्को की चाशनी में भिगोकर पेश करने में जुटे हैं। तीनों ही दलों की परिवर्तन की थ्योरी तो समझ में आ रही है, लेकिन बदलाव का वोट किसी एक के खाते में जाने के संकेत कम से कम सियासी पंडित तो नहीं पकड़ पा रहे हैं। दरअसल, जिस सामाजिक गणित को भिड़ाकर बसपा पिछले चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई थी, वह उन्हें कायम नहीं कर सकी। यह भी ठीक है कि मौजूदा चुनाव में 2007 की तरह तत्कालीन सपा शासन में गुंडागर्दी और अराजकता के खिलाफ रोष भी नहीं। मगर बसपा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के साथ-साथ पार्क, मूर्ति और मैदान जैसे मुद्दे शहरी आबादी को तो चिढ़ा ही रहे हैं। तीनों ही विपक्षी दलों ने इन तथ्यों के मद्देनजर ही अपना चुनावी अभियान चलाया। सपा ने मौके को लपकते हुए न सिर्फ विचारधारा और सोच बदली, बल्कि काफी हद तक पार्टी का चेहरा तक बदल दिया है। मुलायम सिंह ने सारे पुराने चेहरों को नेपथ्य में भेज दिया है। वह खुद पूरी कमान अपने हाथ में लिए हैं और नए चेहरे के तौर पर पुत्र अखिलेश को आगे कर दिया है। साथ ही पिछले कार्यकाल में अपराधीकरण के आरोपों के लिए मुलायम खुद सबसे माफी मांग रहे हैं। साथ ही अंग्रेजी और अंग्रेजियत का विरोध करते रहे मुलायम अब युवाओं का साथ पाने की मंशा से कंप्यूटर और टैबलेट बांटने की बात कर रहे हैं। इसका असर भी दिख रहा है और पहले चार चरण में निर्विवाद रूप से सपा को सभी बढ़त दे रहे हैं। दूसरा रोचक तथ्य है भाजपा और कांग्रेस की सियासत। देखा जाए तो यूपी चुनाव का पूरा एजेंडा कांग्रेस ने तैयार किया। मुस्लिम आरक्षण और बाटला हाउस के मुद्दों पर कांग्रेस ने ऐसा माहौल तैयार किया कि सभी दल उसके इर्द-गिर्द ही घूम रहे हैं। देखा जाए तो कांग्रेस के इस मुस्लिम एजेंडे ने ही भाजपा को वोटों के ध्रुवीकरण का मौका दे दिया है। बहुतायत में ब्राह्मण वोटों की वापसी और यादव और कुर्मी को छोड़कर कुशवाहा, लोध, शाक्य और दूसरी पिछड़ी जातियों के बीच भाजपा फिलहाल पहली पसंद के रूप में उभरी है, लेकिन मुस्लिम कार्ड खेलने के बावजूद कांग्रेस इस वर्ग के बीच पहली पसंद के तौर पर नहीं दिख रही है। राहुल जैसा युवा नेता और ताकत होने के बावजूद कांग्रेस निश्चय ही पहले से तो बेहतर करता दिख रही है, लेकिन यूपी में खुद को किसी विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिशें सफल होने में संदेह है।