कोलकाता रैली एवं होर्डिग्स स्थल के बदलाव पर आम सहमति बनाने के ध्येय से राइटर्स में शुक्रवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रैली व होर्डिग्स लगाने के वर्तमान स्थलों में बदलाव चाहती हैं, लेकिन विपक्ष इससे सहमत नहीं है। विपक्ष इसे लोगों के जनतांत्रिक अधिकारों के हनन की संज्ञा दे रहा है, जबकि मुख्यमंत्री का तर्क है कि सियासी रैलियों से आम जनता को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री बनर्जी वर्तमान रैली स्थलों में बदलाव कर ऐसे स्थल का चयन करना चाहती हैं जहां लोगों को रैली के दौरान आवागमन में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। वर्तमान में राजनीतिक पार्टियां मेट्रो सिनेमा के सामने, शहीद मीनार, रानीरासमणि एवेन्यू आदि स्थानों पर रैली व सभा करती हैं। मुख्यमंत्री चाहती हैं कि मेट्रो के सामने रैली व सभा न हो बल्कि इसके बदले महात्मा गांधी की मूर्ति मेयो रोड में रैली व सभा की जाए। इसी तरह राजनीतिक होर्डिग्स के लिए वह दस स्थानों को चयनित करना चाहती हैं। बैठक में इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल तृणमूल एवं विपक्ष वाममोर्चा के बीच खासी तकरार हुई। विपक्ष ने ऐसे फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। यही नहीं बैठक से बाहर आने के बाद माकपा के नेता मोहम्मद सलीम ने सरकार पर रैली स्थलों के बदलाव के नाम पर लोगों के गणतांत्रिक अधिकारों का हनन का आरोप जड़ दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में रैली व होर्डिग्स के अलावा महंगाई व राज्य में खून खराबा जैसे ज्वलंत मुद्दे हैं जिस पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। इस पर मुख्यमंत्री ममता भड़क गई और पलटवार में उन्होंने माकपा नेता पर झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा दिया। भाजपा नेता तथागत राय भी इस मुद्दे पर वामो के साथ हैं। उन्होंने कहा कि पहले जिन स्थानों पर रैली करने की अनुमति थी उन स्थानों में परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। एसयूसीआई के सोमेन बसु ने कहा कि वह राजनीतिक रैली पर किसी तरह की पाबंदी का विरोध करते हैं। वामफ्रंट के 15 पाडियरें में 12 को इस बैठक में आमंत्रित किया गया था जिसमें तीन पार्टियां नहीं आई थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लोगों की सुविधाओं को सर्वोपरि मानती हैं। किसी राजनीतिक दल को लोगों को परेशान कर रैली व सभा नहीं करनी चाहिए, लेकिन माकपा के लोग इस मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं। जबकि 35 वर्षो के उनके शासन की कारगुजारियां सामने हैं। उन्होंने कहा कि वह साढ़े तीन माह में चार बार सर्वदलीय बैठक बुला चुकी हैं जबकि माकपा 35 वर्षो के शासन में कभी इस तरह के सर्वदलीय बैठकें नहीं बुलाई। उन्होंने कहा कि कोलकाता में इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। धर्मतल्ला में लाखों लोग आते हैं। आंदोलन व रैली से आम लोगों को दिक्कतें होती हैं। रानी रासमणि एवेन्यू के बजाय सुबोध मल्लिक स्क्वायर में रैली की इजाजत देने पर विचार किया जा रहा है
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Saturday, September 17, 2011
बरकरार रहेगी राहुल गांधी की बढ़ी हुई भूमिका
सोनिया की गैरमौजूदगी में सरकार और संगठन के निर्णय तंत्र का अहम हिस्सा बन चुके राहुल गांधी की बढ़ी हुई भूमिका कांग्रेस अध्यक्ष की वापसी के बाद भी बरकरार है। कांग्रेस अध्यक्ष की सक्रिय वापसी के बाद हुई पहली कोर कमेटी की बैठक से पहले प्रधानमंत्री से राहुल की मुलाकात ने इस सियासी संदेश को और मजबूती दी है। शुक्रवार शाम प्रधानमंत्री आवास पर महंगाई के मुद्दे पर हुई पार्टी की सर्वाधिक अधिकार संपन्न समिति की बैठक से पहले राहुल की प्रधानमंत्री से मुलाकात को युवराज के बढ़ते दखल और प्रभाव से जोड़ा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोल के बढ़े दामों और रसोई गैस के दाम बढ़ाने की तैयारियों से आम जनता में बेचैनी व नाराजगी के मुद्दे पर राहुल ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात रखी। पेट्रोलियम पदार्थो की मूल्य वृद्धि पर सरकार के सीधे दखल की स्थिति में नीति बदलने पर चर्चा हुई। गुरुवार को उत्तर प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में हिस्सा लेने वाली सोनिया सेहत के मद्देनजर प्रधानमंत्री आवास पर हुई कोर कमेटी की बैठक में नहीं पहुंचीं। अलबत्ता बैठक से करीब आधे घंटे पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अकेले में बातचीत की। इसके बाद प्रणब मुखर्जी, अहमद पटेल, एके एंटनी और पी. चिदंबरम जैसे नेताओं के साथ हुई कोर कमेटी की बैठक में वह कुछ ही देर रुके। यह पहला मौका है कि कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में भी राहुल ने शिरकत की हो। सूत्रों के मुताबिक, पहले कोर कमेटी में सोनिया आने वाली थीं, लेकिन दामों में बढ़ोत्तरी और दूसरे विषयों पर सवेरे से ही राहुल विभिन्न नेताओं व अपनी कोर टीम से विचार-विमर्श करते रहे। इसके बाद राहुल ने सोनिया से भी इस मसले पर चर्चा की। तब कोर कमेटी के सभी सदस्यों को संदेश दे दिया गया कि कांग्रेस अध्यक्ष इस बैठक में नहीं आएंगी। सोनिया से विमर्श के बाद राहुल शाम साढ़े पांच बजे पीएम आवास पहुंचे। जबकि कोर कमेटी शाम छह बजे शुरू होनी थी। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बढ़ रही महंगाई ने राहुल की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर ठोस उपायों और दाम वापस लेने के मुद्दों को भी टटोला। कोर कमेटी में लोकपाल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इसके लिए कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी बैठक में शामिल हुए। गांधी जयंती के दिन राजघाट जाएंगी सोनिया संगठन और सरकार की बैठकों में सक्रिय हो चुकीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 2 अक्टूबर को जनता के सामने आ सकती हैं। 10, जनपथ के करीबी सूत्रों का कहना है कि गांधी जयंती के दिन पहली बार राजघाट जाकर वह राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। वैसे शुक्रवार को उत्तर प्रदेश चुनाव समिति की बैठक से पहले वह सरकार के तीन शीर्ष नेताओं के साथ बैठक कर चुकी हैं। बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल के अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनसे मिलने गए। इसके बाद सरकार में नंबर दो प्रणब मुखर्जी और रक्षा मंत्री एके एंटनी से भी उनकी मुलाकात हुई थी
कल्याण के झटके से सकते में भाजपा
उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह को साथ लाने की भाजपा नेतृत्व की मुहिम को करारा झटका लगा है। बेहद गुपचुप ढंग से शुरू हुई रणनीति परवान चढ़ने से पहले ही ध्वस्त हो गई। बात टूटने के पीछे कल्याण सिंह का अडि़यल रुख सबसे ज्यादा जिम्मेदार रहा। इस मामले के उजागर होने से भाजपा सकते में है, क्योंकि उसकी कोशिश पहल के परवान न चढ़ने पर भीतर ही भीतर दबा देने की थी, लेकिन मुखर हुए कल्याण ने मंसूबों पर पानी फेर दिया। यूपी में भाजपा को पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतारने के लिए पार्टी ने कल्याण को भी साथ लेने का मन बनाया था। शीर्ष नेतृत्व ने इस कवायद की शुरुआत बेहद संभलकर की थी। उसने अपने नेताओं को मोर्चे पर लगाने के बजाए गैर राजनीतिक दूत के जरिए कल्याण का मन टटोला था। इससे कल्याण भी अपनी अहमियत समझ गए और उन्होंने कुछ ज्यादा ही मांग रख दी। हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने उनकी ताकत और क्षमता पर कुछ सीटें देने की पेशकश की थी। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी से बाहर गए नेताओं को साथ लाने की मुहिम के तहत ही कल्याण का दांव भी खेला था। कल्याण को लेकर संघ का भी रुख नरम रहा है। शुरुआत में तो इस मुहिम के बारे में पार्टी के बड़े नेताओं तक को भनक नहीं थी, लेकिन जब कुछ को पता लगा तो विरोध भी हुआ। भाजपा नेतृत्व को झटका इससे नहीं लगा कि उसकी पहल परवान नहीं चढ़ सकी। बल्कि इसके उजागर होने से वह ज्यादा सकते में है। दरअसल, पूर्व में कल्याण भाजपा की इतनी फजीहत करा चुके हैं कि पार्टी में उनका काफी विरोध है। हालांकि, भाजपा आलाकमान को लगता था कि कल्याण सिंह भी अपने भविष्य के लिए फिर पार्टी के साथ जुड़ जाएंगे
Friday, September 16, 2011
मैंने भाजपा में वापसी का प्रस्ताव ठुकराया : कल्याण
लखनऊ जनक्रांति पार्टी राष्ट्रवादी के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का कहना है कि भाजपा ने उन्हें पार्टी में वापसी का प्रस्ताव भेजा था जिसे उन्होंने ठुकारा दिया। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही, योगी आदित्यनाथ एवं संजय जोशी लेकर अलग-अलग तारीखों में आए थे, लेकिन मैंने भाजपा में वापसी से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अब उनका एकमेव लक्ष्य अपनी पार्टी को मजबूत करना है। भाजपा से तो तालमेल भी नहीं करेंगे। कल्याण सिंह गुरुवार को पत्रकारों से मुखातिब थे। कुछ दिनों पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही कल्याण सिंह से मिलने उनके आवास गए थे। शाही ने इस मुलाकात को लेकर सफाई दी थी कि कल्याण सिंह का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उनकी मिजाजपुर्सी के लिए गया था,लेकिन गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में कल्याण सिंह ने इस मिजाजमुर्सी का राज उजागर कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा में वापसी का प्रस्ताव मैंने उनका प्रस्ताव खारिज कर दिया। यही नहीं उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि मेरी पार्टी का भाजपा से तालमेल भी नहीं होगा। कल्याण सिंह गुरुवार को भाजपा को लेकर काफी तल्ख नजर आए। उन्होंने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ कलराज मिश्र और भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी पर भी जमकर तंज कसे। कलराज को लेकर उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में वह भी किसी से पीछे नहीं रहे। मुझे वह दिन याद है जब मेरे मुख्यमंत्रित्व काल में विधानसभा में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सफाई देने के बजाए कलराज फफक-फफक कर रो रहे थे। राजनाथ को लेकर कल्याण ने कहा कि उनका इतिहास पार्टी को बर्बाद करने का रहा है। लालकृष्ण आडवाणी की प्रस्तावित रथयात्रा को भाजपा का निष्प्रभावी रस्मी कर्मकांड बताते हुए कल्याण सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी भाजपा को इस मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि खुद को राष्ट्रीय पार्टी कहने वाली भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है। जिसमें रिश्र्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा एक राष्ट्रीय अध्यक्ष और घूस लेने वाले सांसद आज भी जमे हुए है। कर्नाटक के रेड्डी बंधुओं से लेकर छत्तीसगढ़, झारखंड व उत्तराखंड में हुए घोटालों की सीबीआइ जांच हो जाए तो भाजपा के कई शीर्ष नेताओं के काले कारनामे सामने आ जाएंगे। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने के सवाल पर कल्याण ने कहा कि इससे साबित हुआ कि भाजपा ने पार्टी में पनपे भ्रष्टाचार की बात स्वीकारी। दावा किया कि सीएम बदलने से भी वहां भाजपा सत्ता में वापस नहीं हो सकेगी, क्योंकि प्रभारी राजनाथ सिंह है
सोनिया ने खूब किए सवाल-जवाब
नई दिल्ली सर्जरी कराने के बाद सेहत को लेकर छाया संशय दूर करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बृहस्पतिवार से पार्टी का कामकाज शुरू कर दिया है। अमेरिका से वापसी के बाद पहली बार सोनिया ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के नाम चयन को लेकर हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में शिरकत कर अपनी सक्रियता का एलान किया। सोनिया न सिर्फ पूरे एक घंटे बैठक में मौजूद रहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जटिल सीटों पर जमकर सभी से सवाल-जवाब भी किए। संगठन के कामकाज में सोनिया की वापसी पर पूरी पार्टी और सरकार के मंत्रियों में खासा उत्साह देखा गया। वापसी के बाद सीधे उत्तर प्रदेश से जुड़ी बैठक में हिस्सा लेकर सोनिया ने राज्य विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी गंभीरता का भी संदेश दिया है। बैठक में सोनिया ने कहा भी कि मैं उत्तर प्रदेश को लेकर बहुत आशान्वित हूं। ध्यान रहे अभी पिछले दिनों हुई कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में सोनिया ने शिरकत नहीं की थी, लेकिन बृहस्पतिवार को 10, जनपथ पर हुई इस बैठक में वह करीब एक घंटे मौजूद रहीं। आम तौर पर साड़ी में ही नजर आने वालीं सोनिया नीले रंग के सलवार सूट में थीं और बैठक शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगवानी करने कमरे के दरवाजे तक भी आई। बैठक में सोनिया-मनमोहन के अलावा, राहुल गांधी, मोती लाल वोरा, जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह, मोहन प्रकाश, रीता जोशी और केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी भी मौजूद रहे। बैठक के बाद उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव दिग्विजय सिंह ने अपने सिर पर हाथ रखकर कहा कि भगवान की दया से वह स्वस्थ हैं और उत्तर प्रदेश से उन्हें बेहद आशाएं हैं। मीडिया विभाग के चेयरमैन और महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बताया कि इस बैठक की प्रक्रिया या तौर-तरीके में कोई बदलाव नहीं था। पहले की तरह ही सब कुछ था और कांग्रेस अध्यक्ष अब सक्रिय हो रही हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि सेहत पहले जैसी होने में अभी कुछ वक्त जरूर लगेगा। वहीं, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पूरी तरह स्वस्थ नजर आ रही थीं और उन्होंने बैठक में सीटों पर चर्चा के दौरान खासी पूछताछ की और अपनी राय रखी। केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के काम पर वापस लौटने से वह सभी खुश हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है। इस बैठक में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के करीब छह दर्जन और प्रत्याशियों के नामों पर मुहर भी लगा दी
आडवाणी के रथ को मिलेगा यूपी में पास
नई दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी रथयात्रा से उत्तर प्रदेश में पार्टी की चुनावी रणनीति को झटका लगा है। पूरे प्रदेश में पार्टी का माहौल बनाने के लिए राजनाथ सिंह व कलराज मिश्र के नेतृत्व वाली जन स्वाभिमान यात्राएं, आडवाणी की यात्रा के प्रदेश से गुजरने के दौरान रुकी रहेंगी। प्रदेश की इन दोनों यात्राओं का दो चरणों के बीच दीवाली व छठ का ठहराव भी कुछ लंबा खिंच सकता है। इतना ही नहीं, समापन पर लखनऊ में होने वाली रैली की तारीख भी बदल जाएगी। उत्तर प्रदेश में भाजपा को भावी सरकार के विकल्प के रूप में जनता में पेश करने व कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से सक्रिय करने के लिए भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह व प्रदेश चुनाव अभियान समिति के मुखिया कलराज मिश्र की 13 अक्टूबर से प्रदेश व्यापी जन स्वाभिमान यात्राओं पर निकलेंगे। इसी समय आडवाणी की भी यात्रा होने से प्रदेश के नेताओं की पशोपेश बढ़ गई है। गुरुवार को प्रदेश के नेताओं ने आडवाणी व प्रदेश की यात्राओं में टकराव टालने व कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए लगभग छह घंटे तक कड़ी मशक्कत की। सूत्रों के अनुसार आडवाणी की यात्रा प्रदेश में सात नवंबर से 13 नवंबर के दौरान रहने की उम्मीद है। यह यात्रा वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली व रामपुर से गुजरेगी। इसलिए प्रदेश की नेताओं की यात्राओं को इस मार्ग से दूर रखा जाएगा। राजनाथ सिंह व कलराज मिश्र को अपनी जन स्वाभिमान यात्राओं का कार्यक्रम बदलना पड़ा है। दोनों नेताओं को दीवाली व छठ त्यौहारों के चलते 23 अक्टूबर से 12 नवंबर तक बीच में यात्रा स्थगित करनी थी। यह यात्राएं तब तक स्थगित रहेंगी, जब तक कि आडवाणी की यात्रा प्रदेश से गुजर नहीं जाती। इसलिए यात्रा का लखनऊ में समापन भी 21 नवंबर से आगे बढ़ जाएगा। क्योंकि आडवाणी 20 नवंबर को दिल्ली में रैली से यात्रा समाप्त करेंगे। पार्टी दिल्ली व लखनऊ की रैली में भी कुछ दिनों का अंतर रखेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश की दोनों जन स्वाभिमान यात्राएं 13 अक्टूबर को शुरू होगी। एक यात्रा पूर्व में काशी के भारत माता मंदिर से निकलेगी, जबकि दूसरी पश्चिम में मथुरा में दीनदयाल उपाध्याय धाम से शुरू होगी। काशी से शुरू होने वाली यात्रा प्रदेश के 28 जिलों व लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी, जबकि मथुरा से प्रारंभ होने वाली यात्रा लगभग 36 जिलों व 170 विधानसभाओं से गुजरेगी
गुजरात में ज्यादा समय उपवास की होड़
अहमदाबाद गुजरात में शांति, सद्भाव और एकता के लिए मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन दिन के उपवास के एलान के बाद सूबे में इस तरह के कार्यक्रमों की होड़ लगी है। मोदी के उवपास को फाइव स्टार उपवास बताते हुए राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने फुटपाथ सत्याग्रह की घोषणा की है। पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया ने मोदी से 3 घंटे अधिक उवपास का एलान किया। वहीं पूर्व गृह मंत्री हरेन पंड्या की पत्नी जागृति बेन भी 17 सितंबर को एक दिन के उपवास की तैयारी कर रही हैं। दर्पण अकादमी तथा क्रांति संगठन की ओर से 5 दिन के उपवास का आयोजन किया गया है। इस दौरान वे गरीबों को भोजन भी कराएंगे। वाघेला, मोढवाडिया तथा गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका की एक शोध समिति की रिपोर्ट को भाजपा अमेरिकी संसद की रिपोर्ट बताकर लोगों को गुमराह कर रही है। मोदी को वीजा से इंकार करने वाला अमेरिका अब कैसे उनकी वाह-वाह कर रहा है। मोढवाडिया ने कहा कि मोदी करोड़ों रुपये खर्च कर अमेरिकी संस्थाओं से प्रशंसा खरीद रहे हैं। सरकार कभी उपवास नहीं करती, सरकार को काम करके बताना चाहिए, उपवास व अनशन तो सत्ताविहीन लोगों का हथियार है। उन्होंने कहा कि मोदी के कारण गुजरात की पहचान नहीं है बल्कि यह गुजरातियों के पुरुषार्थ का कमाल है। देश-विदेश में गुजराती लोग अपने कौशल से सूबे का नाम रोशन कर रहे हैं। वाघेला ने गांधी आश्रम पर किए जाने वाले सत्याग्रह को राज्य सरकार के झूठ तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ बताया। वाघेला ने उपवास को राजनीतिक स्टंट तथा व्यक्तित्व विकास की कवायद बताते हुए कहा है कि उन्हें आत्मशुद्धि के लिए उपवास करना चाहिए, राजनीतिक प्रसिद्धि के खातिर नहीं। गोहिल ने कहा कि पिछले दस वर्ष से मोदी की सद्भावना कहां गई थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों को कठघरे में खड़ा करते हुए मशहूर नृत्यांगना व सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई एवं क्रांति संगठन के भरत झाला ने कहा कि कौमी एकता की बात करने वाले अब तक कहां थे
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