देश के चहुंमुखी विकास को लेकर सरकार भले ही लगातार डंका पीट रही हो, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इससे इत्तेफाक नहीं रखती हैं। विकास की राह में अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों तथा अल्पसंख्यकों के बहुत पीछे छूट जाने पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दलितों में बेरोजगारी की समस्या अत्यंत विकट है। वह सोमवार को यहां इंडियन फॉर्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव (इफको) द्वारा आयोजित 24वें नेहरू व्याख्यानमाला में बोल रही थीं। लोकसभा अध्यक्ष ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 8.2 फीसदी की आर्थिक विकास दर को जहां शानदार बताया, वहीं समाज के निचले तबके के लोगों के जीवन स्तर में सुधार न होने पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियां आज भी सबसे गरीब हैं। देश में 80 फीसदी बुजुर्ग गांवों में रहते हैं, जिन्हें सेवाएं देना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हम चाहे जितनी तरक्की कर लें, लेकिन किसानों की तरक्की के बगैर सही मायने में देश खुशहाल नहीं होगा। इन किसानों में खेतिहर मजदूर भी है, जो भूमिहीन है। उसके पसीने से नहाकर ही धरती अनाज उपजती है। पंडित जवाहर लाल नेहरू के सपने को मूर्त बनाने के लिए उनके सहकारिता के दृष्टिकोण को भारत की सोच बनाना होगा। उन्होंने सहकारिता में समय और परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव को जरूरी बताया। इफको समेत अन्य सहकारी संगठन यह बखूबी जानते हैं। मीरा कुमार ने कहा कि स्वयं सहायता समूह बैंक लिंकेज कार्यक्रम का पहला उद्देश्य वित्तीय नेटवर्क और सूदखोरी वाले अनौपचारिक ऋण स्रोतों के बीच के अंतर को खत्म करना था। लेकिन अध्ययन से पता चला है कि ऋण वितरण की स्थिति देश के निर्धन क्षेत्रों में अभी भी प्रतिकूल बनी हुई है। इसे ठीक करने के लिए ऋण सहकारिताओं को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। इस दौरान उन्होंने इफको के प्रबंध निदेशक उदयशंकर अवस्थी के प्रबंधन की प्रशंसा की। व्याख्यान के बाद राजस्थान के रणमल सिंह और उत्तर प्रदेश के समरपाल सिंह को इफको सहकारिता रत्न और आंध्र प्रदेश के डी. वेंकटराम रेड्डी को सहकारिता बंधु पुरस्कार प्रदान किया गया।
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Tuesday, November 22, 2011
राज्यों को अपेक्षाकृत छोटा होना चाहिए : नीतीश
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि राज्यों को अपेक्षाकृत आकार में छोटा होना चाहिए जिससे वहां की समस्याओं को तत्परता से दूर किया जा सके। मुख्यमंत्री ने अपने जनता दरबार कार्यक्र म से इतर संवाददाताओं से कहा कि छोटे राज्य के संबंध में मेरी प्रतिक्रि या को सही परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। छोटे राज्य ऐसे होने चाहिए जिससे वहां स्थिरता हो। मेरे बयान को उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने के प्रस्ताव या अन्य किसी राज्य के साथ छोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आबादी और क्षेत्रफल के तालमेल के आधार पर राज्यों का गठन हो तो वहां स्थिरता आएगी और विकास होगा। किसी भी राज्य में कम से कम 100 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए ताकि वहां राजनीतिक स्थिरता बनी रहे। यह इस प्रकार होना चाहिए कि राज्य अपनी समस्या को दूर करने में सफल रहे।
जरूरी है यूपी का विभाजन : अमर
उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में विभाजित करने संबंधी राज्य सरकार के प्रस्ताव को सोमवार को प्रदेश विधानसभा में पारित होने का राष्ट्रीय लोकमंच के अध्यक्ष अमर सिंह ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई राजनीतिक कदम जनहित में हो तो सिर्फ सियासत के लिए उसका विरोध करना ठीक नहीं है। विरोध करने वालों के दावे बेतुके हैं। उन्होंने कहा कि राममनोहर लोहिया छोटे राज्यों के हिमायती थे और आज कोई भी नेता लोहिया जितना बड़ा समाजवादी नहीं है। पत्रकारों से बातचीत में अमर सिंह ने कहा कि विभाजन प्रस्ताव लाने के मुख्यमंत्री मायावती के तरीके पर प्रश्न उठ सकते हैं, लेकिन बंटवारे के मुद्दे पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। मैं यही कहूंगा कि उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में विभाजित करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित होने से राज्य की जनता को काफी राहत मिली है। सिंह ने किसी दल का नाम लिए बिना कहा कि जो दल इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं, उनके दावे बेतुके हैं। उन्होंने जाहिरा तौर पर मायावती सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि मायावती को पूर्वांचल की जनता साधुवाद देना चाहती है। लोग इस प्रस्ताव को राजनीति से प्रेरित कहेंगे, लेकिन क्या किसानों का कर्ज माफ करने-जैसे कदम राजनीतिक नहीं होते। उत्तर प्रदेश को बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश, अवध और पूर्वांचल में विभाजित करने संबंधी प्रस्ताव सोमबार को विधानसभा में हंगामे के बीच पारित कराया गया। विभाजन प्रस्ताव का विरोध करने वाले दलों के बारे में अमर सिंह ने कहा कि जो नेता पूरे उत्तर प्रदेश में जाति और संप्रदाय के नाम पर राजनीति करते हैं, शायद उन्हें इस प्रस्ताव से व्यक्तिगत नुकसान होगा, लेकिन आम आदमी को इससे फायदा ही होगा। सिंह ने कहा कि विभाजन प्रस्ताव का विरोध करने वालों को राजनीतिक अस्थिरता और अल्प विकास का शिकार रहे झारखंड का ही उदाहरण नहीं देना चाहिए। आलोचकों को पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और गोवा जैसे छोटे राज्यों में हुए विकास को भी देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब गेंद केंद्र के पाले में है। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पूर्वाचल के दर्द को समझते हुए पटेल आयोग और पाणिक्कर आयोग का गठन किया था। केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार के पास अपने पुरखों का सम्मान करते हुए विभाजन को मंजूरी देने का स्वर्णिम अवसर है। इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा तेलंगाना जितना विवादास्पद नहीं है।
राममनोहर लोहिया भी छोटे राज्यों के थे हिमायती, आज कोई भी नेता लोहिया जितना बड़ा समाजवादी नहीं
यह माया सरकार का विदाई प्रस्ताव : भाजपा
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव को लोगों का ध्यान मूल मुद्दों से हटाने के लिए कांग्रेस द्वारा लिखी गई पटकथा पर बहुजन समाज पार्टी का चुनावी हथकंडा करार दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि यह राज्य के बटवारे का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और घोटालों से डोल रही मायावती सरकार का विदाई प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि यह एक ड्रामा है जिसकी पटकथा कांग्रेस ने लिखी है और इसका मंचन बसपा और समाजवादी पार्टी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मायावती ने यह प्रस्ताव पारित कर सरकार के ताबूत में खुद आखिरी कील ठोंक दी है। उन्होंने कहा कि माया सरकार ने अपने भ्रष्टाचार,अपराध और घोटालों पर पर्दा डालने के लिए यह प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव को जनभावना के खिलाफ बताते हुए उन्होंने कहा कि लोग इस सरकार से त्रस्त हैं और इससे मुक्ति चाहते हैं। यह मुक्ति राज्य के बंटवारे से नहीं बल्कि स्वच्छ सरकार और सुशासन से मिलेगी। नकवी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, बसपा और सपा राज्य में बेशक इस तरह का नाटक करें लेकिन केंद्र में ये कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। मायावती पर जब-जब संकट आता है तो कांग्रेस उन्हें मदद देती है इसके एवज में कांग्रेस नीत केंद्र सरकार जब-जब घोटालों और भ्रष्टाचार के चक्रव्यूह में फंसने लगती है तो बसपा और सपा उसकी नैया पार लगाती हैं। राज्यों के बंटवारे पर भाजपा के रुख के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से छोटे राज्यों की पक्षधर रही है लेकिन उसने इसे लेकर कभी राजनीति नहीं की। अभी जो हो रहा है वह जनभावना नहीं, चुनावी चकल्लस है। इस तरह के प्रस्तावों में नीति और नीयत बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक सवाले के जवाब में उन्होंने कहा कि अब मायावती कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 2007 में लिखी चिट्ठी का हवाला देकर कह रही हैं कि विभाजन का मामला पुराना है। उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल तक विभाजन का कोई जिक्र नहीं और चुनाव के मौके पर इस तरह का प्रस्ताव लाना उनकी मंशा पर अपने आप सवाल उठाता है।
यूपी बांटने का प्रस्ताव पास
उत्तर प्रदेश विधान मण्डल के दोनों सदनों में विपक्ष के भारी शोरशराबे और हंगामे के बीच सरकार ने न केवल वर्ष 2012-2013 के लिए एक लाख 91 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के अंतरिम बजट व 70733 करोड़ रूपये से ज्यादा के लेखानुदान विधेयक को पारित करा लिया बल्कि प्रदेश के चार भागों में बांटे जाने के महत्पूर्ण प्रस्ताव को भी सदन की मंजूरी दिलाने में कामयाबी पा ली। बिखराव के चलते एक बार फिर विधानसभा में विपक्ष की रणनीति जमींदोज हो गयी और मात्र 16 मिनट चली कार्यवाही में विधायी कायरे को अंजाम दे सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी। इतना ही नहीं मात्र एक दिन का सत्र इतिहास में भी दर्ज हो गया । दो दिवसीय सत्र का सोमवार को पहला दिन था जिसकी शुरुआत भारी शोर-शराबे, हंगामे और सरकार विरोधी नारों की गूंज से हुई। वन्देमातरम गान के तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने पहले अपने स्थानों, फिर सपा और भाजपा के सदस्यों ने सदन के फर्श पर आकर अल्पमत की सरकार को बर्खास्त करने की पुरजोर तरीके से मांग उठायी। अपनी घोषित रणनीति के तहत मुख्य विरोधी दल समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी सदन में सरकार के खिलाफ अविास प्रस्ताव लाना चाहती थी पर विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने इसकी मंजूरी नहीं दी। सपा और भाजपा के सदस्य पीठ से अनुमति न मिलने पर आक्रोशित हो उठे और पीठ की ओर बढ़ने लगे पर गार्ड के सख्त सुरक्षा घेरे को वे लांघ नहीं पाये। कुछ सदस्यों ने मेजों पर चढ़ कर पोस्टर भी लहराये जिन पर सरकार विरोधी नारे और अल्पमत की सरकार को बर्खास्त करने की मांग लिखी थी। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पूरे प्रश्नकाल के लिए स्थगित कर दी। तकरीबन एक घंटा 16 मिनट के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्ष के सदस्य फिर अपने स्थानों पर खड़े हो हंगामा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यसूची के अनुरूप कार्यवाही चलने देने की अपील करते हुए सदस्यों से शांत होने कर्ी
| अपील की पर जब शोर शराबा और हंगामा कम नहीं हुआ तो उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा से तय समय पर अनुपूरक बजट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। हंगामे के बीच वित्तीय वर्ष 2012-2013 का एक लाख 91 हजार 825 करोड़ 70,733 करोड़ रूपये अनुपूरक बजट व लेखानुदान पारित करा लिये गये। इस बीच स्थगन के बाद दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो सदन में मुख्यमंत्री सुश्री मायावती भी मौजूद थीं जिन्होंने अनुपूरक बजट और लेखानुदान के पारित होने के तुरंत बाद राज्य को चार भागों बांटने संबंधी प्रस्ताव अचानक सदन के पटल पर रख दिया जिसे हंगामे और शराबे के इसी माहौल में ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गयी। संसदीय कार्य मंत्री ने अध्यक्ष की अनुमति से सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने संबंधी प्रस्ताव पेश किया जिसे भी ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गयी। सदन में सरकार को घेरने की भारी तैयारी करके आये विपक्ष के बिखराव का सत्ता पक्ष ने एक बार फिर लाभ उठाया। सपा और भाजपा जहां सरकार के खिलाफ अपने अपने अविास प्रस्ताव को पेश करने में नाकाम रहीं तो कांग्रेस भी प्रदेश को विभाजन कर छोटे-छोटे राज्यों के गठन के प्रस्ताव को पटल पर नहीं रख सकी। दूसरी ओर भोजनावकाश के बाद विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होने पर अनुपूरक बजट और प्रदेश के विभाजन का प्रस्ताव पास कराने का जैसे ही प्रयास हुआ विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे और इस हंगामे के दौरान ही दोनों मामले पास कराने के साथ ही सदन की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन की बैठक भी मात्र 10-12 मिनट ही चल सकी। |
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