देश के मौजूदा राजनीतिक हालात और तमाम नए मुद्दों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जल्दी ही भाजपा एवं अन्य आनुषंगिक संगठनों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में संघ की तरफ से भाजपा को दिए गए एजेंडे की पड़ताल तो होगी ही, साथ ही राजनीतिक मुद्दों पर समन्वय पर भी विचार होगा। संघ के प्रमुख नेताओं के बीच दायित्वों को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। पिछले दिनों असम में हुई संघ की महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए निर्णयों को इस बैठक में रखा जाएगा। नितिन गडकरी के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद संघ और भाजपा के बीच संबंधों में काफी बदलाव आया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत एवं गडकरी के बीच पहले से ही सहज और प्रगाढ़ रिश्ता होने से भाजपा और संघ के बीच पहले से चली आ रही व्यवस्था ज्यादा प्रभावी नहीं रही है। अभी संघ में सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी संघ की तरफ से राजनीतिक मामलों और भाजपा के साथ समन्वय का काम देखते हैं। सूत्रों के अनुसार अगले साल से नई व्यवस्था एवं दायित्वों में फेरबदल के तहत सोनी को भाजपा के साथ समन्वय के बजाए दूसरा महत्वपूर्ण दायित्व दिया जा सकता है। अगले माह उज्जैन में होने वाली इस बैठक में संघ भाजपा को दिए गए अपने एजेंडे की भी समीक्षा करेगा। इसमें इसका भी आकलन होगा कि अंत्योदय, आजीवन सहयोगी और अन्य कार्यक्रमों के जरिए भाजपा ने खुद को जमीन पर कितना मजबूत किया है। बैठक में संघ के खिलाफ कांग्रेस और केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान एवं भगवा आतंकवाद के आरोपों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
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Friday, July 22, 2011
गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन अस्तित्व में
सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय प्रशासन की संभावनाओं को अमली जामा पहनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि जरूरत के हिसाब से ऐसे गठन होंगे, लेकिन राज्य किसी कीमत पर नहीं बंटने देंगे। इधर, सौ वर्षो से भी उपर के संघर्ष के बाद सोमवार को गोरखा समुदाय और हिल्स वासियों के चेहरे पर खुशी छलक रही थी। वे सिलीगुड़ी के पिंटल विलेज में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) यानी गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के गठन के साक्षी जो बन रहे थे। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गोजमुमो नेता विमल गुरुंग आदि की मौजूदगी में राज्य, केंद्र व गोजमुमो के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद जीटीए अस्तित्व में आ गया। इससे पहले केंद्र सरकार ने गोरखा आंदोलनकारियों के साथ हो रहे त्रिपक्षीय समझौते को मंजूरी दी। सोमवार की सुबह राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) ने गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया। सीसीपीए ने ही केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को इस समझौते पर दस्तखस्त के लिए पश्चिम बंगाल जाने को कहा। बैठक के तुरत बाद चिदंबरम सिलीगुड़ी के लिए रवाना हो गए और उनकी मौजूदगी में त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए। अलग गोरखालैंड की मांग के लिए कई प्राणों की आहुति देने वाले गोरखाओं के अस्तित्व को मिले मुकाम का गवाह बना हुआ था पिंटेल विलेज। हस्ताक्षर के दौरान ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र के विकास के लिए क्षेत्रीय प्रशासन का गठन तो होगा, लेकिन किसी कीमत पर बंगाल को बांटा नहीं जाएगा। चाहे कामतापुर हो या ग्रेटर कूचबिहार, सभी के विकास के लिए सरकार पूरी तरह से कृतसंकल्प है। उन्होंने कहा कि जीटीए का नाम मैंने नहीं दिया है। इसकी रूपरेखा 17 अगस्त 2010 को वाममोर्चे की सरकार ने बनाई थी, लेकिन लागू करने में कोताही बरती। पिछली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ममता ने कहा कि उनका काम विकास नहीं, बल्कि गोरखा, बंगाली और हिन्दी भाषियों को आपस में लड़ाकर उलझाए रखना था। राज्य की मौजूदा सरकार गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन अस्तित्व में समाधान निकाल दिया। पिंटल विलेज में केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम और पूरी जनता भी इसका गवाह बनी। ममता ने कहा कि जीटीए का संचालन पूरी तरह से निर्वाचिन प्रक्रिया के तहत होगा और इसका मुख्य मुद्दा होगा पहाड़ व समतल का विकास। आने वाले समय में दार्जिलिंग स्विट्जरलैंड से कम नहीं होगा। अगर पहाड़ बेहतर तभी समतल भी बेहतर होगा, क्योंकि पहाड़ पर पर्यटन के लिए आने वाले लोग सिलीगुड़ी के रास्ते ही दार्जिलिंग जाएंगे। इसलिए दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी सगी बहनें हैं और ग्रेटरकूच बिहार बड़ी दीदी हैं। इशारों-इशारों में दीदी सबको नसीहत दे गईं कि विकास होगा, लेकिन विभाजन नहीं। अमरा बंगाली के बंद पर चुटकी लेते हुए कहा कि अमरा बंगाली-अमरा बंगाली तो क्या हम कंगाली हैं? हम सबसे पहले भारतीय हैं। उसके बाद बंगाली, गोरखली और हिन्दी भाषी हैं। ममता ने पहाड़ पर ममता बरसाते हुए कहा कि यहां पूरी तरह से विकास के लिए पैकेज दिया जाएगा। इसमें स्कूल-कॉलेज, विश्र्वविद्यालय, आईटी सेंटर, टी रिसर्च सेंटर, नेपाली भाषा का विकास, हाई फैसेलिटी मेडिकल कालेज, हार्टिकल्चर रिसर्च सेंटर समेत विकास की सारी बातें होंगी। समारोह को संबोधित करते हुए पी चिदंबरम ने कहा कि आज आप, हम और बंगाल की मुख्यमंत्री एक ऐतिहासिक समझौते के गवाह बने हैं। इस क्षेत्र के बारे में मुझे पूरी तरह से पता है। अपने हक के लिए आप कई वर्षो से संघर्ष कर थे, जिसका परिणाम सामने है। इसमें गोजमुमो प्रमुख विमल गुरुंग, रोशन गिरि, दार्जिलिंग के सांसद जसवंत सिंह और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफी योगदान रहा है। मैं यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गंाधी के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद हूं। जीटीए तो एक शुरूआत है। पहाड़ समेत उत्तर बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर हरसंभव मदद देने के लिए तैयार भी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाषा, संस्कृति और सभ्यता भले ही अलग हो, लेकिन हम सभी पहले भारतीय हैं और पूरा बंगाल भारत का दिल है। चिदंबरम ने कहा कि मैं 18 सौ किमी की यात्रा करके सिर्फ यह देखने आया हूं कि परिवर्तन के इस राज्य में विकास की हवा क्या है। परिवर्तन का मूल उद्देश्य होता है कि आने वाला कल बेहतर होगा। इसलिए मैं घोषणा करता हूं कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) आज से प्रभावी होगा। गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग ने कहा कि 34 वर्षो से वाम मोर्चा के शासन में पहाड़ का विकास नहीं, विनाश हुआ है। आज से पहाड़ के विकास की ऐतिहासिक शुरूआत हो रही है। इसके बाद मुझे तराई और डुवार्स को सरकार को देना ही होगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनी कमेटी सर्वेक्षण के बाद तराई-डुवार्स को जीटीए में शामिल करने का फैसला खुद ही करेगी। जीटीए पर हस्ताक्षर गोजमुमो के रोशन गिरि, केंद्र सरकार की ओर से केके पाठक और राज्य सरकार की ओर गृह सचिव जीडी गौतम ने किया। पहाड़ पर रंग लाएगी नई व्यवस्था : विमल में रखकर किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार से हर विषय पर बिंदुवार चर्चा हो गई है और वह विकास कार्यो में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने देगी। इसके लिए सरकार ने मोर्चा को आश्वस्त किया है। विमल गुरुंग के साथ सभी विधायक, महासचिव रोशन गिरि भी मौजूद रहे।
दार्जिलिंग हिल्स के लिए नई व्यवस्था के कुछ अहम बिंदुकोलकाता : समझौते के मुताबिक दार्जीलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद (डीजीएचसी) का नाम बदलकर गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) कर दिया गया है। नई संस्था का गठन चुनाव के माध्यम से होगा। पर्वतीय क्षेत्र के स्कूल-कॉलेजों में नियुक्ति के लिए अलग चयन आयोग गठित होगा। इसी तरह अलग भविष्य निधि (पीएफ) कार्यालय भी खोला जाएगा। गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के पास चाय बगान की भूमि के लीज के नवीकरण का अधिकार होगा। लेकिन चाय बगान की भूमि पर कर संग्रह करने का अधिकार नहीं होगा। पर्वतीय क्षेत्र के इस स्वायत्त निकाय को केंद्र सरकार आर्थिक पैकेज का एलान किया है। इस धनराशि से विकास कार्य और जीटीए का संचालन होगा। राज्य सरकार की तरफ से भी निकाय को मदद दी जाएगी।
यह सोनिया-राहुल की भाषा है
मुंबई विस्फोटों और आतंकवाद को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बयानों पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा है कि यह उनकी नहीं, बल्कि सोनिया और राहुल गांधी की भाषा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बम बनाने की फैक्ट्री चलाने और मुंबई की घटना में संघ का हाथ होने की आशंका जताने वाले कांग्रेस महासचिव की कड़ी भर्त्सना करते हुए पार्टी महासचिव रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व से देश से माफी मांगने को कहा है। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और आतंकवाद के मुद्दे पर फंसी कांग्रेस की एजेंडा बदलने की कोशिश करार दिया। प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद ही कहा था कि पार्टी में केवल प्रवक्ता ही बोलेंगे, फिर भी दिग्विजय सिंह लगातार बोल रहे हैं। इससे जाहिर है कि वे सोनिया और राहुल के कहने पर ही बोल रहे हैं। जब भी आतंकवाद और भ्रष्टाचार पर अभियान होते हैं, दिग्विजिय सिंह अपना एजेंडा लेकर आ जाते हैं। पहले राहुल गांधी ने हिंदू आतंकवाद को देश के लिए खतरनाक बताया था, उसके बाद दिग्विजय सिंह उनके झंडे को लेकर घूम रहे हैं। बटला हाउस मामले में वे आजमगढ़ पहुंच गए थे। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे और आतंकियों को निर्दोष बताने की कोशिश की थी। ओसामा बिन लादेन के मारे जाने पर उसे ओसामा जी कहा था। इतना ही नहीं, काले धन के खिलाफ अभियान चलाने पर बाबा रामदेव को ठग कहा और भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन करने वाले अन्ना हजारे को तो तानाशाह बता डाला था। इसी तरह राष्ट्रमंडल खेल घोटाले में जेल गए सुरेश कलमाड़ी को तो उन्होंने ही निर्दोष बता दिया। अब दिग्विजय सिंह सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को जानबूझ कर सांप्रदायिक जामा पहनाने में लगे हुए हैं। इससे मुंबई की आतंकी घटना की जांच को प्रभावित और दिग्भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। संघ राष्ट्रवादी संगठन है और भाजपा को उस पर गर्व है। उस पर आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सोनिया गांधी से आग्रह किया कि वे देश की एकता अखंडता को वोट बैंक की राजनीति के लिए दांव पर न लगाएं
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