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Friday, July 22, 2011

गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन अस्तित्व में


सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय प्रशासन की संभावनाओं को अमली जामा पहनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि जरूरत के हिसाब से ऐसे गठन होंगे, लेकिन राज्य किसी कीमत पर नहीं बंटने देंगे। इधर, सौ वर्षो से भी उपर के संघर्ष के बाद सोमवार को गोरखा समुदाय और हिल्स वासियों के चेहरे पर खुशी छलक रही थी। वे सिलीगुड़ी के पिंटल विलेज में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) यानी गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के गठन के साक्षी जो बन रहे थे। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गोजमुमो नेता विमल गुरुंग आदि की मौजूदगी में राज्य, केंद्र व गोजमुमो के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद जीटीए अस्तित्व में आ गया। इससे पहले केंद्र सरकार ने गोरखा आंदोलनकारियों के साथ हो रहे त्रिपक्षीय समझौते को मंजूरी दी। सोमवार की सुबह राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) ने गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया। सीसीपीए ने ही केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को इस समझौते पर दस्तखस्त के लिए पश्चिम बंगाल जाने को कहा। बैठक के तुरत बाद चिदंबरम सिलीगुड़ी के लिए रवाना हो गए और उनकी मौजूदगी में त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए। अलग गोरखालैंड की मांग के लिए कई प्राणों की आहुति देने वाले गोरखाओं के अस्तित्व को मिले मुकाम का गवाह बना हुआ था पिंटेल विलेज। हस्ताक्षर के दौरान ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र के विकास के लिए क्षेत्रीय प्रशासन का गठन तो होगा, लेकिन किसी कीमत पर बंगाल को बांटा नहीं जाएगा। चाहे कामतापुर हो या ग्रेटर कूचबिहार, सभी के विकास के लिए सरकार पूरी तरह से कृतसंकल्प है। उन्होंने कहा कि जीटीए का नाम मैंने नहीं दिया है। इसकी रूपरेखा 17 अगस्त 2010 को वाममोर्चे की सरकार ने बनाई थी, लेकिन लागू करने में कोताही बरती। पिछली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ममता ने कहा कि उनका काम विकास नहीं, बल्कि गोरखा, बंगाली और हिन्दी भाषियों को आपस में लड़ाकर उलझाए रखना था। राज्य की मौजूदा सरकार गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन अस्तित्व में समाधान निकाल दिया। पिंटल विलेज में केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम और पूरी जनता भी इसका गवाह बनी। ममता ने कहा कि जीटीए का संचालन पूरी तरह से निर्वाचिन प्रक्रिया के तहत होगा और इसका मुख्य मुद्दा होगा पहाड़ व समतल का विकास। आने वाले समय में दार्जिलिंग स्विट्जरलैंड से कम नहीं होगा। अगर पहाड़ बेहतर तभी समतल भी बेहतर होगा, क्योंकि पहाड़ पर पर्यटन के लिए आने वाले लोग सिलीगुड़ी के रास्ते ही दार्जिलिंग जाएंगे। इसलिए दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी सगी बहनें हैं और ग्रेटरकूच बिहार बड़ी दीदी हैं। इशारों-इशारों में दीदी सबको नसीहत दे गईं कि विकास होगा, लेकिन विभाजन नहीं। अमरा बंगाली के बंद पर चुटकी लेते हुए कहा कि अमरा बंगाली-अमरा बंगाली तो क्या हम कंगाली हैं? हम सबसे पहले भारतीय हैं। उसके बाद बंगाली, गोरखली और हिन्दी भाषी हैं। ममता ने पहाड़ पर ममता बरसाते हुए कहा कि यहां पूरी तरह से विकास के लिए पैकेज दिया जाएगा। इसमें स्कूल-कॉलेज, विश्र्वविद्यालय, आईटी सेंटर, टी रिसर्च सेंटर, नेपाली भाषा का विकास, हाई फैसेलिटी मेडिकल कालेज, हार्टिकल्चर रिसर्च सेंटर समेत विकास की सारी बातें होंगी। समारोह को संबोधित करते हुए पी चिदंबरम ने कहा कि आज आप, हम और बंगाल की मुख्यमंत्री एक ऐतिहासिक समझौते के गवाह बने हैं। इस क्षेत्र के बारे में मुझे पूरी तरह से पता है। अपने हक के लिए आप कई वर्षो से संघर्ष कर थे, जिसका परिणाम सामने है। इसमें गोजमुमो प्रमुख विमल गुरुंग, रोशन गिरि, दार्जिलिंग के सांसद जसवंत सिंह और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफी योगदान रहा है। मैं यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गंाधी के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद हूं। जीटीए तो एक शुरूआत है। पहाड़ समेत उत्तर बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर हरसंभव मदद देने के लिए तैयार भी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाषा, संस्कृति और सभ्यता भले ही अलग हो, लेकिन हम सभी पहले भारतीय हैं और पूरा बंगाल भारत का दिल है। चिदंबरम ने कहा कि मैं 18 सौ किमी की यात्रा करके सिर्फ यह देखने आया हूं कि परिवर्तन के इस राज्य में विकास की हवा क्या है। परिवर्तन का मूल उद्देश्य होता है कि आने वाला कल बेहतर होगा। इसलिए मैं घोषणा करता हूं कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) आज से प्रभावी होगा। गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग ने कहा कि 34 वर्षो से वाम मोर्चा के शासन में पहाड़ का विकास नहीं, विनाश हुआ है। आज से पहाड़ के विकास की ऐतिहासिक शुरूआत हो रही है। इसके बाद मुझे तराई और डुवार्स को सरकार को देना ही होगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनी कमेटी सर्वेक्षण के बाद तराई-डुवार्स को जीटीए में शामिल करने का फैसला खुद ही करेगी। जीटीए पर हस्ताक्षर गोजमुमो के रोशन गिरि, केंद्र सरकार की ओर से केके पाठक और राज्य सरकार की ओर गृह सचिव जीडी गौतम ने किया। पहाड़ पर रंग लाएगी नई व्यवस्था : विमल में रखकर किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार से हर विषय पर बिंदुवार चर्चा हो गई है और वह विकास कार्यो में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने देगी। इसके लिए सरकार ने मोर्चा को आश्वस्त किया है। विमल गुरुंग के साथ सभी विधायक, महासचिव रोशन गिरि भी मौजूद रहे।


दार्जिलिंग हिल्स के लिए नई व्यवस्था के कुछ अहम बिंदुकोलकाता : समझौते के मुताबिक दार्जीलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद (डीजीएचसी) का नाम बदलकर गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) कर दिया गया है। नई संस्था का गठन चुनाव के माध्यम से होगा। पर्वतीय क्षेत्र के स्कूल-कॉलेजों में नियुक्ति के लिए अलग चयन आयोग गठित होगा। इसी तरह अलग भविष्य निधि (पीएफ) कार्यालय भी खोला जाएगा। गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के पास चाय बगान की भूमि के लीज के नवीकरण का अधिकार होगा। लेकिन चाय बगान की भूमि पर कर संग्रह करने का अधिकार नहीं होगा। पर्वतीय क्षेत्र के इस स्वायत्त निकाय को केंद्र सरकार आर्थिक पैकेज का एलान किया है। इस धनराशि से विकास कार्य और जीटीए का संचालन होगा। राज्य सरकार की तरफ से भी निकाय को मदद दी जाएगी।