Showing posts with label पृष्ठ संख्या ७. Show all posts
Showing posts with label पृष्ठ संख्या ७. Show all posts
Friday, June 17, 2011
Saturday, June 4, 2011
Thursday, May 19, 2011
Saturday, May 7, 2011
नक्सली इलाकों में लाल दुर्ग बचाने की चुनौती
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का झंझावत उत्तर बंगाल से होते हुए अब जंगलमहल में प्रवेश कर रहा है। पांचवें चरण में नक्सल प्रभावित पश्चिमी मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरुलिया जिलों तथा बर्द्धमान की 12 विधानसभा सीटों समेत 38 निर्वाचन क्षेत्रों में शनिवार को मतदान है। यह इलाका कभी वाममोर्चा का दुर्ग रहा है, लेकिन पिछले दो वर्षो में तेजी से बदले राजनीतिक हालात ने इस लाल दुर्ग को हिलाकर रख दिया है। तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी द्वारा दिए गए परिवर्तन के नारे के बाद वाम मोर्चा इस दुर्ग को बचाए रखने में कितना कामयाब होगा, यह चुनाव परिणाम बताएगा। माकपा को जंगलमहल में दो मोर्चे पर लड़ाई लड़ रही है। एक ओर जहां हाथों में बंदूक थामे माओवादी माकपाइयों पर हमले बोल रहे हैं, वहीं तृणमूल सुप्रीमो परिवर्तन का नारा देकर शब्दों की मिसाइल दाग रही हैं। ऐसे में बांकुड़ा, पुरुलिया, मेदिनीपुर और बर्द्धमान में लालदुर्ग को सलामत रखना माकपा नीत वाममोर्चा के लिए कठिन हो रहा है। इलाके में सीटों के परिसीमन से भी राजनीतिक समीकरण बिगड़ा है। कुछ नई सीटें जुड़ी हैं तो कुछ समाप्त हो गई है। ऐसे में सीटों पर कब्जा बरकरार रखने को लेकर वाममोर्चा नई चुनौतियों से दो-चार है। पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो पश्चिमी मेदिनीपुर जिले की जिन 12 सीटों पर शनिवार को मतदान होना है, उनमें 10 पर माकपा व उसके सहयोगी दलों का कब्जा रहा है। मात्र दो सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी। इसी प्रकार पुरुलिया में सभी पांच, बांकुड़ा की सभी नौ और बर्द्धमान की 12 सीटों में से 11 सीटों पर माकपा व सहयोगी दलों का कब्जा रहा है। जबकि एक सीट तृणमूल के पास थी। पिछले लोकसभा चुनाव से स्थितियां बदलीं। बावजूद इसके बांकुड़ा व पुरुलिया में लाल दुर्ग सलामत रहा। इसी को लेकर बुद्धदेव भट्टाचार्य और अन्य वामनेता संतुष्ट हैं कि इस दफा स्थितियां उनके अनुकूल रहेंगी। इस चरण में माकपा के दिग्गज व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सूर्यकांत मिश्रा तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मानस भुइयां समेत 193 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। राज्य में कुल छह चरणों में मतदान होना है। 13 मई को मतगणना होगी।
Friday, May 6, 2011
प. बंगाल चुनाव में टूटा परिवारवाद का रिकॉर्ड
इस बार का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नेताओं के पुत्र, पुत्रवधू व सगे-संबंधियों को प्रत्याशी बनाने के मामले में ऐतिहासिक बनने वाला है। इस दफा विधानसभा चुनाव में परिवारवाद हावी है और चुनाव पारिवारिक मामला साबित हो रहा है। तृणमूल ने चार और कांग्रेस ने तीन और माकपा ने पार्टी नेताओं केपुत्र, पुत्रवधू और सगे-संबंधी को मैदान में उतार कर इतिहास रच दिया है। इनमें सेकुछ चार चरणों में हो चुके मतदान में लड़ाई का सामना कर चुके हैं तो कुछ पांचवें व छठे चरण में होने वाले मतदान की तैयारी में हैं। ये सभी उम्मीदवार अपने पिता व रिश्तेदारों के समर्थन के बूते जीत सुनिश्चित करने की कोशिश में हैं। राजनीतिक पंडित इसे नकारात्मक प्रवृति बताने के साथ-साथ बंगाल की राजनीति के लिए खतरा भी बता रहे हैं। रवीन्द्र भारती विश्व विद्यालय के राजनीतिक विश्लेषक और राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर सव्यसाची बसु राय चौधरी का कहना है कि यह एक नकारात्मक प्रवृत्ति है। बंगाल में इस समय राजनेताओं के दूसरी और तीसरी पीढ़ी चुनाव में है। यह एक नई और खराब शुरूआत है। यह प्रवृत्ति भविष्य में भी इसी प्रकार फलती-फूलती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह चलन बंगाल की राजनीति के लिए घातक साबित हो सकता है, क्योंकि राजनीति चाय का प्याला नहीं है चाहे जिसे परोसा दिया जाए। राजनीति के लिए परिपक्वता के साथ प्रतिभा का होना जारूरी है जो अधिकांश वर्तमान राजनेताओं के दूसरी अथवा तीसरी पीढ़ी के बच्चों में नहीं है। पांचवें चरण का प्रचार थमा मतदान शनिवार को माओवाद गतिविधियों व राजनीतिक हिंसा के लिए सुर्खियों में रहने वाले पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर समेत चार जिलों की 38 विधानसभा सीटों पर पांचवें चरण में शनिवार को होने वाले मतदान केलिए चुनाव प्रचार गुरुवार की शाम थम गया। प.मेदिनीपुर की 12 पर 55, बर्द्धमान की 12 पर 51, बांकुड़ा की 9 पर 49 और पुरुलिया की 5 सीटों पर 38 समेत कुल 193 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। चारों जिलों में मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई है और केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती शुरू गई है। चुनाव कर्मी शुक्रवार से ही तीन जिलों के आठ हजार से अधिक बूथों पर पहुंच जाएंगे। इन क्षेत्रों के 38,93, 732 पुरुष और 35,09,274 महिलाओं समेत 74,03,006 मतदाता शनिवार को मतदान करेंगे। चुनाव आयोग के पास वोटरों को धमकाने की दो लाख शिकायतें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में एक ओर जहां मतदान प्रतिशत शिखर पर है तो दूसरी ओर मतदाताओं को धमकी देने की शिकायतों का भी पहाड़ खड़ा हो गया है। 18 मार्च से शुरू हुए चुनाव का चौथा चरण तीन मई को समाप्त होने तक चुनाव आयोग को करीब दो लाख शिकायतें मिली हैं। ये शिकायतें वोटरों को डराने व धमकाने की हैं जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब एक हजार कार्यकर्ताओं व नेताओं पर आरोप लगाया गया है। सबसे अधिक संख्या में मतदाताओं को डराने व धमकाने की शिकायतें हावडा, हुगली, पूर्व मेदिनीपुर और वर्द्धमान से मिली हैं। अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी एनके सहाना ने बताया कि उक्त चार जिलों के विभिन्न इलाकों से औसतन सात शिकायतें प्रतिदिन मिल रही है जो काफी चिंताजनक है। यही वजह रही है कि इन जिलों में मंगलवार को शांतिपूर्ण व निर्बाध मतदान समाप्त कराने के लिए 600 से अधिक केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात की गई थीं। राजनीतिक हिंसा के लिए अतिसंवेदनशील क्षेत्र सिंगुर और नंदीग्राम में कानून-व्यवस्था व मतदाताओं को भयमुक्त करने के लिए मतदान से पूर्व ही सुरक्षा बलों की गश्त तेज कर दी गई थी। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ में 2007 हिंसात्मक विरोध में 14 लोग मारे गए थे। इन प्रदर्शनों की मदद से तृणमूल कांग्रेस वाममोर्चा के ग्रामीण वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही थी।
Thursday, April 28, 2011
Saturday, March 26, 2011
जाट आंदोलन : राज्यों को साथ लेकर ही आगे बढ़ेगा केंद्र
जाट आंदोलन की मार झेल रही जनता की परेशानी और अदालत की सख्ती को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ बेहतर तालमेल की पहल की है। इस सिलसिले में शनिवार को उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करने का फैसला हुआ है। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक इन तीनों राज्यों के आला अधिकारियों के साथ बैठक में यह रणनीति बनाई जाएगी कि किस तरह इस आंदोलन का जनजीवन पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके। खास कर दिल्ली को घेरने की जाट नेताओं की धमकी को देखते हुए दिल्ली से लगी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मुकम्मल व्यवस्था की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता गृह सचिव जीके पिल्लई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ही अपने आदेश में कहा है कि दिल्ली में पानी, दूध और दूसरी जरूरी सामानों की सप्लाई को ठप नहीं करने दिया जाए। यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों को दी गई है। लेकिन इनके बीच तालमेल के लिए केंद्र को स्वाभाविक तौर पर पहल करनी होगी। इससे पहले बुधवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम के साथ हुई बैठक के दौरान दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्री साफ तौर पर कह चुके हैं कि इस मामले में केंद्र सरकार को ही मोर्चा संभालना होगा। हालांकि तब चिदंबरम ने साफ कर दिया था कि यह मामला सिर्फ उनके बस का नहीं है और न ही इतनी जल्दी किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। इस मामले पर केंद्र सरकार जाट नेताओं से बातचीत शुरू कर चुकी है। 15 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) ने यह बातचीत शुरू करने का फैसला किया था। यह काम गृह मंत्री पी चिदंबरम और सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक को सौंपा गया है। जाट नेताओं दो दौर की बातचीत भी हो चुकी है। जाट नेता चाहते हैं कि सरकार इस पर फैसले के लिए कोई समय सीमा बताए। यहां भारी पुलिस बल व आरएएफ की टुकडि़यां भट्टू कलां में पहुंची हुई हैं। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि समुदाय दिल्ली की सीमा सील करने के अपने इरादे पर कायम है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विभागों के जरिए आंदोलन को अदालत में ले जा रही है। जेपीनगर जिले के काफूरपुर में चल रहे जाटों के धरने को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा कि जाटों को हताश होने की जरूरत नहीं है। वह दिन दूर नहीं जब उन्हें केंद्र में आरक्षण का लाभ मिलेगा। मलिक ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में जाटों के आंदोलन से खलबली मची हुई है|
Monday, March 7, 2011
Thursday, February 24, 2011
Tuesday, February 22, 2011
Sunday, January 30, 2011
आडवाणी की रथ यात्रा से पनपा आतंकवाद
पिछले कुछ महीनों में कभी हिंदू आतंकवाद तो कभी संघी आतंकवाद का नाम लेकर राजनीतिक हलचल मचाते रहे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को आडवाणी को घेरते हुए कहा कि सांप्रदायिक तनाव उनकी रथ यात्रा के बाद से ही पनपा है। आडवाणी की रथ यात्रा के कारण ही उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और अन्य क्षेत्रों में आतंकवाद का जन्म हुआ। यदि देखा जाए तो रथ यात्रा ही आतंकवाद का आधार बनी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से यह कहता आया है कि भारत सरकार को भारतीय मुस्लिमों पर विश्वास नहीं है, लेकिन आडवाणी की रथ यात्रा के बाद पड़ोसी देश का यह आरोप भी पूरी तरह हकीकत बनकर सामने आया है क्योंकि हजारों मुस्लिम युवकों का उत्पीड़न और शोषण किया गया, उन्हें गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा गया। इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित राज्य हिंदू आतंकियों को प्रश्रय दे रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे सभी मामलों की जांच एक ही एजेंसी से कराई जाए तथा संघ परिवार को बाहर से आ रहे पैसों की भी जांच हो। यहां एक समारोह में दिग्विजय सिंह ने गुजरात का नाम लेते हुए कहा कि आखिर प्रज्ञा ठाकुर और असीमानंद जैसे लोगों को वहां क्यों शरण मिली। जो बम बनाते हैं, वे गुजरात में जाकर संरक्षण पा लेते हैं। इस तरह के तत्वों को भाजपा सरकारें सरंक्षण दे रही हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात की तरह ही मध्य प्रदेश में भी संघी आतंकियों को शरण दी जाती है। कांग्रेस में मुस्लिम हितों के लिए एक बड़ा चेहरा बने दिग्विजय ने कहा कि धर्म से परे हर आतंकी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मुस्लिमों को इसका शिकार नहीं बनाना चाहिए। बटला हाउस मुठभेड़ पर फिर से सवाल उठाते हुए उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी से पूछा कि आखिर पकड़ा गया हर आतंकवादी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का क्यूं है। समारोह में मौजूद माकपा नेता सीताराम येचुरी और लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने भी भाजपा पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने आरएसएस की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पर अंकुश जरूरी है। यही विचारधारा महात्मा गांधी की हत्या का कारण थी।
Sunday, January 23, 2011
तिरंगा फहराने की जिद ने उड़ाई उमर की नींद
श्रीनगर के लाल चौक में 26 जनवरी को तिरंगा फहराने निकली भाजपा की युवा ब्रिगेड से निपटने के लिए दिल्ली आए राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गृहमंत्री पी चिदंबरम व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर उन्हें राज्य के हालात की जानकारी दी है। इधर भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने उमर और केंद्र सरकार के रवैये की तीखी आलोचना करते हुए दो टूक कहा है कि 26 जनवरी को देश के किसी भी हिस्से में तिरंगा फहराने के लिए उसे किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। जैसे-जैसे 26 जनवरी का दिन पास आता जा रहा है, उमर सरकार की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अब दिल्ली आकर इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। गृहमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मुलाकातों में उमर ने स्पष्ट किया है कि 26 जनवरी और 15 अगस्त के दिन सारे देश में सतर्कता बरती जाती है और जम्मू-कश्मीर में तो अतिरिक्त सावधानी रखी जाती है। ऐसे में भाजपा की यात्रा के जाने से तमाम मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। राज्य सरकार इस यात्रा को जम्मू से आगे नहीं जाने देना चाहती है, जबकि भाजपा फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने उमर व केंद्र दोनों पर निशाना साधते हुए गृहमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा है कि भाजपा को भारत के किसी भी हिस्से में तिरंगा फहराने के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। भाजयुमो देश की एकता-अखंडता के लिए यात्रा निकाल रहा है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को तो उसका स्वागत करना चाहिए। उमर विरोध कर रहे हैं तो उन्हें यह स्पष्ट भी करना होगा कि इससे क्या खतरा है? शाहनवाज ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि एक मुख्यमंत्री भी यासीन मलिक जैसे अलगाववादी नेताओं की भाषा बोल रहे हैं। इधर भाजपा में इस यात्रा के समापन को लेकर मंथन तेज हो गया है। पार्टी इस यात्रा का राजनीतिक लाभ किसी भी सूरत में विरोधी खेमे में नहीं जाने देना चाहती है। इसलिए वह बेहद सतर्क है और यात्रा के जम्मू-कश्मीर में समापन को लेकर रणनीति बनाने में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार पार्टी जम्मू रैली को अपने यात्रा समापन का सबसे बड़ा कार्यक्रम बनाने जा रही है।
Saturday, January 15, 2011
भाजपा कश्मीर में तिरंगा फहराने की जिद छोड़े : उमर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को फिर हुर्रियत कांफ्रेंस को कश्मीर समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय वार्ताकारों से बातचीत करने और सच को स्वीकारने की सलाह देते हुए भाजपा को 26 जनवरी पर कश्मीर में तिरंगे की सियासत करने पर आडे़ हाथ लिया। उन्होंने कहा कि मुझे आज तक यह समझ में नहीं आया कि वर्ष 1992 के बाद अब ही भाजपा को लालचौक में 26 जनवरी को झंडा लहराने का ख्याल क्यों आया। बीते 18 सालों में वह कहां थी। शीरी (बारामूला) में पुलिस नवारक्षकों के दीक्षांत समारोह के बाद पत्रकारों से उन्होंने कहा कि भाजपा का 26 जनवरी को लालचौक में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का एलान गलत है। इससे पहले 1992 में भाजपा ने लालचौक में तिरंगा फहराया था। यह सब वोटों की सियासत है। इससे कश्मीर में सुधरे हालात फिर बिगड़ सकते हैं। इसलिए भाजपा को इस मामले को प्रतिष्ठा का सवाल बनाने से परहेज करते हुए अपनी इस यात्रा से कश्मीर को बाहर ही रखना चाहिए। यहां हर साल राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। हर जिला मुख्यालय और सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और लोग भी इसमें शामिल होते हैं। इससे पूर्व यहां डाउन-टाउन के जैनाकदल में एक सामुदायिक भवन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने हुर्रियत नेताओं को कश्मीर समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय वार्ताकारों के साथ बातचीत के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिंसा या हड़ताल से कुछ हासिल नहीं होता और अब आम अवाम भी हड़ताली सियासत से तंग आ चुका है। उमर ने कहा कि हुर्रियत नेता प्रो. अब्दुल गनी बट ने जो सच उजागर किया है, वह उनके साथियों को भी स्वीकार कर लेना चाहिए। अभी ऐसे कई कड़वे सच सामने आएंगे और आम अवाम हैरान रह जाएगा। हुर्रियत को हकीकत को समझना चाहिए। कश्मीरी अवाम की बेहतरी के लिए उसे भी कश्मीर समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आगे आना चाहिए। वह कश्मीर समस्या के राजनीतिक समाधान के लिए पूरे प्रयास कर रहे हैं।
Sunday, January 9, 2011
सुषमा और जेटली संभालेंगे चुनाव वाले राज्यों की कमान
प्रभावी नेताओं की कमी से जूझ रहे भाजपा संगठन को एक बार फिर अपने संसदीय दल के नेताओं की तरफ ही देखना पड़ा। इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की कमान राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को सौंपी गई है। जेटली असम व पश्चिम बंगाल का चुनाव संभालेंगे तो सुषमा के हवाले तमिलनाडु, केरल व पांडिचेरी रहेंगे। वेंकैया नायडू पर संगठन की विशेष जिम्मेदारी डाली गई है। एक तरह वह संगठन महामंत्री से ऊपर होंगे। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान चुनाव वाले राज्यों की स्थितियों में समीक्षा करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यह घोषणाएं की हैं। अरुण जेटली इस समय राज्यसभा में पार्टी की कमान संभालने के साथ कर्नाटक मामलों के भी विशेष प्रभारी हैं। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के समय भी राज्य में दो महासचिवों अनंत कुमार व धर्मेद्र प्रधान के प्रभारी व सह प्रभारी होने के बावजूद जेटली को ही कमान संभालनी पड़ी थी। अब असम व पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी उन पर डाली गई है। असम में असम गण परिषद के साथ पार्टी का गठबंधन अभी तक तय नहीं है। ऐसी स्थिति में पार्टी को अकेले ही चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज दक्षिण के तीनों राज्यों की चुनावी रणनीति संभालेंगी। केरल में पार्टी अकेले ही चुनाव मैदान में उतरेगी, जबकि तमिलनाडु व पांडिचेरी में वह अन्नाद्रमुक के साथ तालमेल की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि इसके अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। सुषमा स्वराज व अरुण जेटली के हवाले पांचों राज्यों के चुनाव की कमान सौैंपने के साथ ही यह भी लगभग साफ हो गया है कि पार्टी संगठन के पास कुशल रणनीतिक प्रबंधकों की बेहद बेहद कमी है। भले ही वह उसमें युवा ऊर्जा से भरपूर है। नितिन गडकरी ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू को विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय करने और केंद्रीय कार्यक्रमों को लागू कराने व उसकी समीक्षा की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। नायडू पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों व मोर्चो पर भी निगाह रखेंगे और देशभर का दौरा कर पार्टी संगठन की सेहत के बारे में राष्ट्रीय अध्यक्ष को हर स्थिति से अवगत करायेंगे।
Subscribe to:
Posts (Atom)