ठ्ठजागरण ब्यूरो, लखनऊ महंगाई और मूल्य वृद्धि को लेकर बसपा और कांग्रेस नीत संप्रग सरकार टकराव के रास्ते पर है। बसपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को रिटेल सेक्टर में एफडीआइ को स्वीकृति तथा डीजल की कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 10 अक्टूबर को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में केंद्र को समर्थन देने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने अभी तक केंद्र को मुद्दों के आधार पर समर्थन दिया। मयावती ने खुदरा क्षेत्रों में एफडीआइ को हरी झंडी दिखाने पर केंद्र सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा कि केंद्र के फैसले के खिलाफ बसपा 9 अक्टूबर को संकल्प महारैली आयोजित कर अपना विरोध जताएगी। इसके अगले दिन यानी 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी। संप्रग के फैसलों को जनविरोधी करार देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने रसोई गैस और डीजल के दाम बढ़ाकर किसानों और गरीबों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे महंगाई और बढ़ेगी। अभी तक केन्द्र सरकार ने जो भी जनविरोधी फैसले किये हैं, हमारी पार्टी ने उसे काफी गंभीरता से लेते हुए समय समय पर इसका विरोध किया है।
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Monday, September 17, 2012
नरम पड़े केंद्र के सहयोगी
ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) और पेट्रो कीमतों में वृद्धि के विरोध में सहयोगियों ने सरकार के खिलाफ तलवारें भले निकाल ली हों, लेकिन रविवार को उनके नरम पड़े तेवरों से वह पूरी तरह बेफिक्र दिखाई दी। सरकार को भरोसा है कि सहयोगियों और विपक्ष के कड़े तेवरों के बावजूद मौजूदा मुद्दों को लेकर उस पर कोई खतरा नहीं है। तृणमूल की तरफ से सरकार न गिराने के संकेतों और इस बारे में सपा के भी दो टूक इन्कार के बाद उसके माथे का पसीना और कम ही हुआ है। सरकार की बेफिक्री का आलम यह है कि उसकी प्रमुख सहयोगी तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों के इस्तीफे के मिल रहे संकेतों को भी वह गंभीरता से नहीं ले रही है। यह बात अलग है कि सरकार व कांग्रेस के रणनीतिकार उससे पहले तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को एक बार मनाने का प्रयास कर सकते हैं। बात बन गई तो ठीक, नहीं तो उन्हें इस बात से भी संतोष है कि अपने मंत्रियों के इस्तीफे के बाद भी ममता संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन देती रहेंगी। शनिवार को इसका संकेत खुद ममता भी दे चुकी हैं। जबकि, द्रमुक जैसे सहयोगी से किसी कड़े फैसले की आशंका नहीं है। गौरतलब है कि रिटेल एफडीआइ के अलावा डीजल में 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि और सब्सिडी वाले छह रसोई गैस सिलेंडर देने के निर्णय वापस न लेने पर सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए ममता ने कड़े फैसले लेने की बात कही थी। अल्टीमेटम की अवधि खत्म होने के बाद ममता मंगलवार को अपना फैसला सुनाएंगी। वामपंथियों समेत छह दलों से हाथ मिलाकर 20 सितंबर को सरकार के खिलाफ आंदोलन करने जा रही सपा को लेकर भी सरकार के माथे पर शिकन नहीं है। सपा महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी एफडीआइ, डीजल मूल्यवृद्धि और विनिवेश के फैसलों के खिलाफ है, लेकिन वह इसके लिए सरकार से समर्थन वापस लेकर सांप्रदायिक ताकतों को मदद करने नहीं जा रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा, हम सरकार के गलत फैसलों का साथ नहीं देंगे। देश बड़ा है, सरकार नहीं। कोई सहयोगी अगर कत्ल करेगा तो विरोध तो होगा ही। बसपा प्रमुख मायावती ने डीजल मूल्य वृद्धि, सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों को कम करने और एफडीआइ का विरोध तो जरूर किया है, लेकिन सरकार से समर्थन वापसी पर फैसला 10 अक्टूबर को लेने का एलान किया है। इन स्थितियों के बीच, अब सारा मामला ममता के मंगलवार के फैसले पर टिक गया है। सूत्रों की मानें तो सरकार ने पेट्रो कीमतों की वृद्धि और एफडीआइ जैसे मामलों में सहयोगियों के संभावित विरोध का आकलन पहले ही करके ये फैसले लिए हैं। उसे पता था कि वे इसका समर्थन नहीं करेंगे, लेकिन कोई सहयोगी या फिर विपक्षी दल देश में अभी चुनाव नहीं चाहता। लिहाजा, ये फैसले वापस नहीं होंगे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार को खुद भी इन फैसलों को जरूरी बताते हुए वापस न लेने का संकेत दे चुके हैं। (पेज-3 भी देखें)
माया-मुलायम को सरकार का साथ छोड़ने को मनाएंगे शरद
ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली तमाम विरोध और धमकी के बावजूद खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश (एफडीआइ) को लेकर बेफिक्र दिख रही संप्रग सरकार के खिलाफ बड़ी लामबंदी की कोशिश शुरू हो गई है। राजग संयोजक शरद यादव ने संकेत दिया है कि वह बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से भी बात करेंगे। शरद ने ममता बनर्जी की तारीफ कर उन्हें अपने अल्टीमेटम पर अडिग रहने का संदेश भी दिया है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया पर अविश्वास जताते हुए शरद ने यहां तक कह दिया कि इन लोगों को देश की समझ ही नहीं है। एफडीआइ और डीजल मूल्य वृद्धि के खिलाफ 20 सितंबर को अलग-अलग ही सही लगभग समूचा विपक्ष सड़क पर उतरने जा रहा है। फिर भी सरकार आश्वस्त है तो इसका कारण बसपा को माना जा रहा है। ममता की समर्थन वापसी को लेकर भी राजग पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। ऐसे में रविवार को शरद ने पहली बार आक्रामकता के साथ सीधे प्रधानमंत्री की काबिलियत और मंशा पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि एफडीआइ के जरिए प्रधानमंत्री करोड़ों लोगों को बेरोजगार करने पर तुले हैं। विपक्ष यह नहीं होने देगा। उन्होंने कहा, मनमोहन, चिदंबरम और मोंटेक जैसे लोग देश को नहीं समझ सकते हैं। जीडीपी बढ़ाने के लिए वह देश में लूट होने देंगे। भारत को ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है। मनमोहन को वापस विश्व बैंक चले जाना चाहिए। सोनिया गांधी को चाहिए ऐसे लोगों से मुक्ति दिलाएं। राजग संयोजक ने मायावती और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से भी बातचीत का संकेत दिया। साथ ही पिछली बार इसके आड़े आने वाली ममता की जमकर तारीफ की। एक सवाल पर उन्होंने कहा, ममता कभी खोखली धमकी नहीं देती हैं। शरद ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर भी निशाना साधा और कहा कि केंद्र के दबाव और सीबीआइ के डर से वह एफडीआइ का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह किस स्तर से उठकर आए हैं।
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