कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाने की राज्यपाल हंसराज भारद्वाज की सिफारिश के खिलाफ भाजपा ने राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का दरवाजा भी खटखटा दिया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने नेतृत्व में मुख्यमंत्री समेत 114 विधायकों ने बहुमत का आंकड़ा पेश कर राज्यपाल की सिफारिश को असंवैधानिक करार देते हुए उसे खारिज करने व भारद्वाज को तत्काल वापस बुलाने की मांग की है। वहीं, कांग्रेस भारद्वाज की सक्रियता पर तो मौन है, लेकिन कर्नाटक में येद्दयुरप्पा सरकार को असंवैधानिक और अनैतिक बताने में मुखर है। भाजपा नेतृत्व इस बार राज्यपाल भारद्वाज के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में है। चूंकि उसके पास बहुमत का पूरा आंकड़ा है, इसलिए तेवर भी तीखे हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री के यहां पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मोर्चा संभाला था, तो मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अगुवाई की। उनके साथ संसद में दोनों सदनों में विपक्ष के नेता व पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। पार्टी ने 223 (एक स्थान रिक्त) सदस्यीय विधानसभा में येद्दयुरपा सरकार के साथ 122 विधायकों का समर्थन होने का दावा पेश करते हुए 114 विधायकों को राष्ट्रपति के सामने पेश भी किया। बाकी आठ विधायकों में पांच जरूरी कामों के कारण नहीं आ सके, जबकि एक विदेश में व एक बीमार है। आठवें विधायक विधानसभा अध्यक्ष हैं। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद गडकरी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति के बहुमत प्राप्त सरकार को असंवैधानिक प्रयासों से हटाने की राज्यपाल की सिफारिश को नामंजूर करने की मांग की है। साथ ही राज्य सरकार को लगातार अस्थिर करने की कोशिश कर रहे राज्यपाल भारद्वाज को वापस बुलाने का भी आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने सत्र बुलाकर बहुमत साबित करने को कहा था, लेकिन राज्यपाल ने इसके बजाए सरकार को ही बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी। यह घोर असंवैधानिक व लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। इसके पहले गडकरी ने सुबह पार्टी मुख्यालय में सभी विधायकों से मुलाकात की। इस दौरान येद्दयुरप्पा ने राज्यपाल पर तीखे कटाक्ष करते हुए कहा कि वह तो राज्यपाल के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने भाजपा को पूरी तरह से एकजुट कर दिया है। दूसरी तरफ कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब कर्नाटक में भाजपा को सरकार में रहने का कोई हक नहीं है। वहीं, कांग्रेस में एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि राज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रिपोर्ट तो भेजनी ही थी। रिपोर्ट में क्या है, कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि कर्नाटक सरकार को यदि बर्खास्त भी किया जाए तो वह अवैधानिक नहीं होगा। लेकिन अभी यह विकल्प नहीं है। हालांकि, ऐसे किसी भी कदम के लिए कांग्रेस व सरकार का नेतृत्व अभी तैयार नहीं हैराज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रिपोर्ट तो भेजनी ही थी। रिपोर्ट में क्या है, कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि कर्नाटक सरकार को यदि बर्खास्त भी किया जाए तो वह अवैधानिक नहीं होगा। लेकिन अभी यह विकल्प नहीं है। हालांकि, ऐसे किसी भी कदम के लिए कांग्रेस व सरकार का नेतृत्व अभी तैयार नहीं है।
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Wednesday, May 18, 2011
बंगाल में चुनाव बाद हिंसा से चिदंबरम चिंतित
प. बंगाल में विधानसभा चुनाव तो बिना खूनखराबे के निपट गए, लेकिन अब राज्य में दलीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में हिंसक संघर्ष शुरू हो गया है। सूबे में बीते चार दिनों में चुनाव बाद हिंसा में 7 लोगों की मौत हो गई। इनमें से दो लोग तो उत्तरी 24 परगना में मंगलवार को काल का ग्रास बने। केंद्र सरकार ने चुनाव बाद हिंसा को गंभीरता से लेते हुए राज्य की कानून एवं व्यवस्था पर चिंता जाहिर की है। पी. चिदंबरम ने इस बारे में राज्यपाल और भावी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात भी की है। पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के बेलघोरिया थाने के कमराठी इलाके में तृकां समर्थक मोहम्मद इकबाल की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। जिले के शांतिपुर में माकपा समर्थक की उस वक्त मौत हो गई जब उसने बम भरे हुए थैले के साथ भागने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि छापा मारने के दौरान माकपा समर्थक बम से भरा थैला लेकर भागा। इसी दौरान हुए विस्फोट में उसकी मौत हो गई। इसी समयावधि में दक्षिण 24 परगना के कसबा क्षेत्र में माकपा के स्थानीय नेता पर जानलेवा हमला किया गया। घटना के पीछे तृकां समर्थकों का हाथ होने का आरोप लगाते हुए भीड़ ने पथराव कर जाम लगा दिया। कुछ लोग तृकां दफ्तर में तोड़फोड़ के इरादे से आगे बढ़े पर पुलिस देख वापस लौट गए। हुगली जिले में तृणमूल कार्यकर्ताओं ने स्थानीय नेताओं से रंजिश के बाद अपनी ही पार्टी के दफ्तर पर बमों से हमला कर दस लोगों को जख्मी कर दिया। बताया जाता है कि नेताओं ने कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के दुकानदारों से वसूली न करने को कहा था। इतना ही नहीं बाकुड़ा जिले में पुलिस ने कोताउल थानाक्षेत्र के चापड़ा गांव में तलाशी अभियान के दौरान एक तालाब के किनारे झाडि़यों में छिपा कर रखे गए 65 देशी बम बम और तालाब के भीतर से पांच रायफलें तथा 30 कारतूस बरामद किए। साथ ही जमीन में दबा कर रखी गई पांच रिवाल्वर भी जब्त कीं। इतनी भारी बरामदगी के बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान तेज कर दिया है।
Tuesday, May 3, 2011
अरुणाचल के सीएम का अब तक पता नहीं
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू और उनके हेलीकॉप्टर का रविवार दूसरे दिन भी कोई पता नहीं चला। खराब मौसम के कारण खोज अभियान में लगी वायुसेना और थल सेना की टीमों को कामयाबी हाथ नहीं लग सकी है। वायुसेना के दो सुखोई-30 एमकेआइ विमान संभावित दुर्घटना क्षेत्र का जायजा लेकर वापस बरेली लौट चुके हैं। संभावित घटनास्थल के आसपास बेहद धुंध होने के कारण इसरो के सेटेलाइट से ली गईं तस्वीरों से भी कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार ने मंत्री मुकुल वासनिक व वी नारायणसामी को खोजबीन अभियान की निगरानी के लिए ईंटानगर रवाना कर दिया है। पड़ोसी मुल्क भूटान से भी मदद मांगी गई है। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मे थिनले से बात कर भूटानी क्षेत्र में अरुणाचल मुख्यमंत्री के लापता हेलीकॉप्टर की खोज में सहयोग करने को कहा है। 36 घंटों के दौरान जारी कोशिशों के बारे में सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने कहा,अभी तक मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर का सुराग नहीं मिल सका है। सेना प्रमुख ने माना कि हेलीकॉप्टर की सुरक्षित लैंडिंग की खबरों के बाद खोज अभियान रोक दिया गया था, जिसे रविवार सुबह फिर शुरू किया गया। खांडू के हेलीकॉप्टर के भूटान में सुरक्षित उतरने को लेकर फैले भ्रम की वजह एक सैटेलाइट फोन से आयी कॉल थी। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि यह कॉल मुख्यमंत्री के सेटेलाइट फोन से किया गया। मुख्यमंत्री के लापता हेलीकॉप्टर की खोज में वायुसेना के चार और सेना के दो हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। वहीं सेना के खोजी व बचाव दल के लगभग तीस कॉलम भी उतारे गए हैं। हालांकि खराब मौैसम व बादलों के कारण इस बात की आशंका जताई जा रही है कि सुखाई-30 के कैमरों में कैद हुई तस्वीरें भी जमीन की पूरी हकीकत शायद न दे पाएं। रविवार सुबह दस बजे तवांग से खांडू को ईटानगर के लिए लेकर उड़े पवनहंस कंपनी के हेलीकॉप्टर का करीब 20 मिनट बाद ही रेडियो संपर्क टूट गया था।
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