नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने दलित कार्ड खेलते हुए झुग्गियों में रहने वाले अनुसूचित जाति के लोगों को मुफ्त में आवास देने का फैसला किया है। राजीव रत्न योजना के तहत सरकार द्वारा मुफ्त आवास वितरित किए जाने के निर्णय को उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना के तहत लगभग 70 हजार आवासों का निर्माण किया जाना है। सरकार के अनुसार 14 हजार आवास आवंटन के लिए तैयार हैं। राजीव रत्न योजना को लेकर लोकायुक्त की टेड़ी नजर को झेल रही मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दलितों की हमदर्दी बटोरने की कोशिश की है। झुग्गीवासियों को पुनर्वास के लिए जिन मकानों के लिए 60 हजार रुपये अदा करने थे, अब सरकार ने यह राशि स्वयं अदा करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सोमवार को यह फैसला लिया गया है। दिल्ली सरकार की इस योजना का विरोध करते हुए एक भाजपा नेत्री ने लोकायुक्त से शिकायत की थी। इसमें सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगाया गया था। दीक्षित ने कहा कि कांगे्रस सरकार अनुसूचित जाति समेत समाज के कमजोर वर्गो के उत्थान के लिए पूर्ण निष्ठा से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महत्वाकांक्षी राजीव रत्न योजना के तहत कम लागत के आवास आवंटन के लिए तैयार हंै। मंत्रिमंडल ने झुग्गी झोंपड़ी के अनुसूचित जाति के निवासियों के पुनर्वास के समय उनके आवास आवंटन के लिए अंशदान को पूरी तरह माफ कर राहत देने का मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति के झुग्गी निवासियों को राजीव रत्न आवास योजना के तहत दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा पुनर्वासित किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें अपने अंशदान के 60 हजार रुपये का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इस राशि को दिल्ली सरकार वहन करेगी। लेकिन गैर अनुसूचित जाति के लोगों को अपने हिस्से का अंशदान पूर्ववत अदा करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इन आवासों की अनुमानित लागत 3.34 लाख रुपये है। इनमें से भारत सरकार का योगदान 1.19 लाख, दिल्ली सरकार का योगदान 62 हजार और जमीन के स्वामित्व वाली एजेंसी का योगदान 93 हजार रुपये है। दीक्षित ने कहा कि दिल्ली को स्लम मुक्त शहर बनाने के मकसद से सरकार ने पुनर्वास योजना बनाई है। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के गठन से राजीव रत्न आवास योजना के तहत कम लागत के आवास के निर्माण की गति तेज हुई है। पुनर्वास का काम शुरू होते ही विकसित कॉलोनी में सभी नागरिक सुविधाओं के साथ आवास का सपना साकार हो जाएगा
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Tuesday, September 20, 2011
संघ के दबाव में कल्याण को मनाएंगे गडकरी
भाजपा को मरा सांप बताकर कल्याण सिंह ने भले ही दोस्ती या गठबंधन के लिए अपने दरवाजे बंद करने का एलान कर दिया हो, लेकिन संघ के दबाव में भाजपा उन्हें (कल्याण) मनाने की एक कोशिश और करने जा रही है। सिंह की तल्खी खत्म करने के लिए पार्टी पहले उनके एक बेहद करीबी को मध्यस्थ बनाएगी। उसके बाद नितिन गडकरी खुद कल्याण से बात करेंगे। भाजपा को कल्याण सिंह की पार्टी से गठबंधन पर कोई एतराज नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिलों कल्याण सिंह ने भाजपा को लेकर जो तल्ख तेवर दिखाए, उसके मद्देनजर यह माना गया है कि अगले दौर की बातचीत शुरू होने से पहले उनकी तल्खी खत्म की जाए। इसके लिए तय हुआ है कि उनके किसी बेहद करीबी को मध्यस्थ बनाया जाए। हालांकि इस काम के लिए कुसुम राय का नाम चर्चा में है, लेकिन राय ने ऐसे किसी प्रयास की जानकारी से इंकार किया है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा में कल्याण से दोस्ती के लिए इतनी बेताबी की दो वजह हैं। पहली वजह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है। संघ उप्र में भाजपा की हर कीमत पर वापसी चाहता है और उसे यह स्वीकारने में गुरेज नहीं है कि कल्याण उप्र में एक ताकत है। 2002 के विस और 2009 के लोस चुनाव में उनकी पार्टी में न रहने की कीमत भाजपा को चुकानी पड़ी है। 2012 के चुनाव में संघ कोई चूक नहीं चाहता है,इसलिए उसका दबाव है कि कल्याण से बातचीत का सिलसिला जारी रखा जाए। दूसरी वजह यह है कि पार्टी के अंदर राष्ट्रीय स्तर पर राजनाथ सिंह की एंटी लाबी यूपी में राजनाथ को कांउटर करने के लिए कल्याण को वापस लाना चाहती है, जो कि राजनाथ के धुर विरोधी माने जाते हैं। ऐसे में राजनाथ की एंटी लाबी भी कल्याण का चैप्टर बंद होने नहीं देना चाहती है। यह संयोग ही है कि उप्र में भाजपा अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही कल्याण विरोधी नहीं है। कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में शाही शाही उनके प्रिय मंत्रियों में शुमार थे। कल्याण के भाजपा से बाहर रहने के दौरान शाही ने उनसे कभी अपने रिश्ते खराब नहीं किए। कल्याण उन्हें आज भी बहुत पसंद करते हैं और शाही भी उनका बहुत सम्मान करते हैं। कल्याण को लेकर यह जिद कतई नहीं है कि वह भाजपा में वापस ही आएं। भाजपा उनसे गठबंधन कर चुनाव लड़ने में ज्यादा फायदा देख रही है। ऐसे में तल्खी खत्म होने के बाद जब बातचीत होगी तो वह गठबंधन के एक निश्चित फार्मूले के साथ और वह बातचीत नितिन गडकरी भी कर सकती हैं। भाजपा कल्याण सिंह के लिए 30-35 सीटें देने को तैयार है लेकिन मध्यस्थ की बातचीत में क्या निकलता है, इसके बाद बहुत कुछ निर्भर करेगा
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