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Friday, August 12, 2011

मुरादाबाद दंगे पर मुलायम ने मांगा मायावती का इस्तीफा


नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दंगे को लेकर विपक्षी दल मायावती सरकार की घेरेबंदी में जुट गए हैं। सपा और भाजपा ने गुरुवार को इस मामले को लोकसभा में उठाया। सपा ने तो दंगे को लेकर ही मायावती का इस्तीफा तक मांग लिया है। जबकि भाजपा ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की है। सपा के मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा में शून्यकाल में यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि मुरादाबाद में जब भी दंगे की शुरुआत होती है, वह गंभीर रूप ले लेता है। 1980 में भी ऐसा हो चुका है। सपा सदस्य ने आरोप लगाया कि मुरादाबाद में स्थानीय पुलिस संप्रदाय विशेष के लोगों को परेशान कर रही है। स्थिति और बिगड़ सकती है। सरकार को इस पर बयान देना चाहिए कि हालात के मद्देनजर उसकी तैयारी क्या है? मुलायम के इस मामले के उठाने के साथ ही सपा के दूसरे सदस्य अपने स्थानों पर खड़े हो गए और मायावती सरकार का इस्तीफा मांगने लगे। मुलायम ने जैसे ही इस मामले को उठाया बसपा के दारा सिंह चौहान, विजय बहादुर और सुरेंद्र नागर समेत दूसरे सदस्य भी खड़े के गए। उन्होंने मुलायम का कड़ा विरोध किया। बसपा सदस्यों का कहना था कि यह राज्य की कानून-व्यवस्था का मामला है। उसे यहां नहीं उठाया जा सकता है। मुरादाबाद में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार हालात पर नजर रखे हुए है। सपा और बसपा सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही भाजपा के योगी आदित्यनाथ भी खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि चार दिनों से दंगे हो रहे हैं। हिंदुओं को उनके धार्मिक कार्यक्रमों से रोका जा रहा है। प्रशासन फेल हो गया है। लिहाजा मुरादाबाद में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जानी चाहिए।





मोदी विरोधी एक और आइपीएस अफसर पर शिकंजा


अहमदाबाद आइपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के बाद गुजरात सरकार ने राज्य के एक और आला पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त रवैया अख्तियार किया है। गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय, सत्तारूढ़ भाजपा के कई अहम नेताओं और पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा की गई फोन व मोबाइल कॉल्स से संबंधित सीडी नानावती आयोग व एसआइटी को सौंपने वाले आइपीएस राहुल शर्मा को गृह विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सरकार ने कहा है कि गोपनीयता भंग करने और अनुशासनहीनता के लिए क्यों न आप के खिलाफ कार्रवाई की जाए? शर्मा फिलहाल राजकोट में डीआइजी के पद पर तैनात हैं। गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव वरेश सिन्हा ने बुधवार देर रात गुजरात कैडर के आइपीएस अधिकारी राहुल शर्मा के खिलाफ नोटिस जारी किया। उन पर राज्य सरकार की इजाजत के बिना फोन कॉल्स की सीडी विभिन्न जांच आयोग और एसआइटी को देने का आरोप है। सरकार ने शर्मा के खिलाफ कार्यालयी गोपनीयता विधेयक, सेवा नियमों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता के आरोपों के तहत यह कार्रवाई की है। शर्मा ने सरकार की इस कार्रवाई को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार विरोधी पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप है। इस कार्रवाई को सरकार विरोधी पुलिस अधिकारियों को काबू में रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले राज्य सरकार ने गुजरात दंगों में मुख्यमंत्री मोदी की भी भूमिका बताने वाले आइपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को निलंबित कर दिया था। गुजरात दंगों के दौरान फरवरी, 2002 में भावनगर में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहते शर्मा ने हिंसक भीड़ को एक मदरसे पर हमला करने से रोक दिया था। इसके तत्काल बाद उनका तबादला अहमदाबाद पुलिस नियंत्रण कक्ष में कर दिया गया था। अहमदाबाद के तत्कालीन पुलिस आयुक्त पीसी पांडे ने शर्मा को ही शहर के नरोड़ा पाटिया दंगे की जांच सौंपी थी। जांच के दौरान शर्मा ने दंगे के वक्त मुख्यमंत्री कार्यालय, राज्य सरकार व संगठन के कई शीर्ष नेताओं, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों के साथ पुलिस के आला अधिकारियों के फोन और मोबाइल कॉल्स की जानकारी जुटाई थी। इसी जानकारी से संबंधित सीडी शर्मा ने नानावती-मेहता आयोग, बनर्जी आयोग और एसआइटी को उपलब्ध कराई थी। इसी सीडी के आधार पर महिला एवं बाल कल्याण राज्य मंत्री मायाबेन कोडनानी को मंत्री पद से हाथ धोना और जेल जाना पड़ा था। ताजा घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार सच बोलने वाले अधिकारियों की आवाज दबा रही है।