गोवा में भाजपा-महाराष्ट्रवादीगोमांतक पार्टी (एमजीपी) गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। सत्ता विरोधी लहर में दिगंबर कामत सरकार के आठ मंत्री चुनाव हार गए। राकांपा का खाता भी नहीं खुला। कामत ने राज्यपाल के शंकरनारायणन को इस्तीफा सौंप दिया। कांग्रेस को गोवा में मिले जख्म पर मणिपुर ने मरहम लगाया। मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता की चाबी अपने ही पास रखी। गोवा में भाजपा की जीत के नायक रहे मनोहर पार्रिकर, जिनकी अगुवाई में पार्टी ने 40 में 21 सीटें जीतकर अकेले दम बहुमत हासिल किया है। एमजीपी को तीन सीटें मिलीं। कांग्रेस सिर्फ नौ पर सिमट गई। क्षेत्रीय गोवा विकास पार्टी दो सीट जीतने में कामयाब रही। पांच सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं। मणिपुर में कांग्रेस ने 60 में 42 सीटें जीतीं। तृणमूल कांग्रेस को सात, मणिपुर स्टेट कांग्रेस पार्टी को पांच, नगा पीपुल्स फ्रंट को चार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी को एक-एक सीट मिली हैं। मुख्यमंत्री इबोबी सिंह और उनकी पत्नी लांधोनी देवी ने जीत हासिल की है। इबोबी सिंह पूर्वोत्तर राज्यों के ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने लगातार तीसरी बार कांग्रेस को सत्ता का स्वाद चखाया है। कांग्रेस की यह सफलता इसलिए अहम है क्योंकि कांग्रेस के विरोध में ग्यारह दल एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे थे।
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Wednesday, March 14, 2012
पंजाब में बादल फटे तो बह गई कांग्रेस
पंजाब में प्रकाश सिंह बादल की अगुआई वाले अकाली दल-भाजपा गठबंधन ने सत्ता विरोधी रुझानों को दरकिनार करते हुए स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता पर कब्जा बरकरार रखा। बादल ने जोरदार प्रदर्शन कर कांग्रेस को करारा झटका ही नहीं दिया बल्कि दूसरी बार सत्ता में वापसी की है, जो अपने आप में एक इतिहास है। चार दशक में कोई भी दल लगातार दूसरी बार सत्ता पर काबिज नहीं हो सका है। नई सरकार के शपथ-ग्रहण से पहले गुरुवार को अकाली दल और भाजपा के बीच बैठक की उम्मीद है। राज्य की 117 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में अकाली-भाजपा गठबंधन ने 68 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। अकाली दल को 56 सीटों पर विजय हासिल हुई है तो भाजपा को 12 सीटों पर फतह मिली है। कांग्रेस तमाम कोशिशों के बावजूद 46 सीटों पर आकर सिमट गई। तीन सीटें अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई हैं। पीपीपी एक भी सीट नहीं जीत सकी है और इस हार से यह साफ हो गया है पंजाब में तीसरा मोर्चा फिलहाल दूर की कौड़ी है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने लांबी क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार व अपने चचेरे भाई महेशिंदर सिंह बादल को 24,739 मतों से पराजित किया। जलालाबाद सीट पर सुखबीर बादल ने निर्दलीय उम्मीदवार को 50,246 मतों से हराया। भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने अमृतसर पूर्व से जीत हासिल की है। पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी व अकाली दल के प्रत्याशी परगट सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी जगबीर सिंह बरार को 6798 मतों से हराया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पटियाला शहरी क्षेत्र जीत गए, जबकि उनके बेटे रनिंदर सिंह समाना से चुनाव हार गए। प्रकाश सिंह बादल (84) ने अपने पुत्र सुखबीर के साथ बादल गांव स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, मैं पंजाब की जनता को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझमें दोबारा विश्वास दिखाया। पिता-पुत्र ने कहा, हम राज्य में शांति एवं विकास का एजेंडा लेकर लोगों के पास गए। मैं खुश हूं कि हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे। वहीं, अमरिंदर सिंह ने नतीजों पर हैरानी जताते हुए कहा, मैं हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। नतीजे चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा, देखेंगे कि कहां गलती हुई।
कांग्रेस चारों खाने चित्त
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने कांग्रेस को लगभग हाशिये पर धकेल दिया है। देश के सबसे बडे़ और राजनीतिक दृष्टि से अहम उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने सभी अनुमानों को ध्वस्त कर 403 सदस्यीय विधानसभा में 224 सीटें हासिल कर लीं। अभूतपूर्व बहुमत के साथ सपा ने बसपा को तो सत्ता से बेदखल किया ही, कांग्रेस को भी जोर का झटका दिया, जो कि राहुल गांधी के धुंआधार प्रचार के बल पर 22 सालों बाद सत्ता में वापसी का सपना देख रही थी। पंजाब और उत्तराखंड में सत्ता विरोधी लहर के भरोसे उम्मीदें पाले बैठी कांग्रेस को मायूसी ही हाथ लगी। बादल की अगुआई में भाजपा-अकाली गठबंधन ने 43 साल के इतिहास में पहली बार दोबारा सत्ता में लौट कर इतिहास रच डाला। उत्तराखंड में त्रिशंकु विधानसभा सामने आई। हालांकि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही, लेकिन बहुमत न मिलने से सत्ता की चाबी छोटे दलों एवं निर्दलियों के हाथ आ गई है। गोवा की सत्ता छीनकर भाजपा ने देश की सबसे पुरानी पार्टी को चारों खाने चित कर दिया। कांग्रेस के लिए राहत की खबर सिर्फ मणिपुर से आई जहां पार्टी तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी 224 सीटें जीतने के साथ ही अकेले प्रदेश की सत्ता संभालेगी। 16वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव के नतीजे पार्टी के लिए उम्मीदों से बहुत बड़ी जीत है, जबकि बसपा के लिए यह अनुमानों से बड़ी हार है। सत्ता विरोधी लहर के चलते बसपा 80 तक ही पहुंच पाई। साइकिल के कद्रदान यूपी ने कांग्रेस और भाजपा को क्रमश: 28 और 47 पर रोक दिया। हालांकि यह संख्या कांग्रेस के पिछले आंकड़े से छह ज्यादा है, लेकिन भाजपा को तो चार सीटों का नुकसान हुआ है। सपा की आंधी में माया के तमाम मंत्री और दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. रमापति राम त्रिपाठी, विस अध्यक्ष रहे केशरीनाथ त्रिपाठी, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष हरीश द्विवेदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीराम चौहान, ओम प्रकाश सिंह, पूर्व मंत्री व कांग्रेसी नेता जगदंबिका पाल के पुत्र अभिषेक पाल, कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी के भाई शेखर बहुगुणा, केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद, पूर्व मंत्री जनार्दन प्रसाद ओझा, अपना दल के बाहुबली नेता व पूर्व सांसद अतीक अहमद को भी जनता ने फेल कर दिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने शर्मनाक प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकारते हुए अपना इस्तीफा नितिन गडकरी को भेज दिया है। रिकार्ड तोड़ बहुमत से उत्साहित सपा ने बुधवार को संसदीय दल की बैठक बुलाई है, जिसमें नवनिर्वाचित विधानमंडल दल की बैठक बुलाने और सरकार बनाने का दावा पेश करने पर विचार किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सपा बुधवार को ही सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। शपथ ग्रहण होली बाद होगा। मुख्यमंत्री कौन होगा इस सवाल को अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा,मुख्यमंत्री नेता जी यानी मुलायम ही होंगे। सूत्रों के मुताबिक, सपा में शीर्ष स्तर पर इस पर सहमति बनी है कि मंत्रिमंडल छोटा रखा जाए और उसमें ऐसे लोगों का शामिल किया जाए, जिनकी छवि साफ सुथरी हो। अखिलेश यादव ने सपा सरकार की प्राथमिकताएं भी गिना दी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जनकल्याण योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
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