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Thursday, February 3, 2011

बदलते बिहार में पिछड़ता विपक्ष



संघ के खिलाफ षड्यंत्र की पटकथा लिख रहे हैं राहुल


राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने बुधवार को कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस महासचिव व उनके सहयोगी नेता संघ की छवि धूमिल करने के लिए षड्यंत्र की पटकथा लिख रहे हैं। संघ को हिंदू आतंकवाद का जनक बताने के साथ ही आतंकवादी गतिविधियों में गिरफ्तार लोगों को संघ के साथ जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मालेगांव व अजमेर प्रकरण में जारी जांच को राजनीति प्रेरित बताते हुए संघ ने आरोप लगाया कि सर संघचालक मोहन राव भागवत की हत्या के षड्यंत्र पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। आरएसएस की केंद्रीय समिति के सदस्य और पूर्व प्रवक्ता राम माधव बुधवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दिलचस्प पहलू यह है कि जांच एजेंसियां भी उसी दिशा में काम कर रहीं हैं जैसा कांग्रेस महासचिव बयान देते हैं। राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत के साथ बातचीत में कहा कि देश को हिंदू आतंकवाद से खतरा है। इसका खुलासा विकिलिक्स ने किया। इससे साफ जाहिर होता है कि जांच एजेंसियां कांग्रेस महासचिव के इशारों पर नाच रहीं हैं। राम माधव ने मालेगांव व अजमेर प्रकरण में जारी जांच को राजनीति प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि सर संघचालक मोहन राव भागवत की हत्या के षड्यंत्र पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने संघ विरोधी दुष्प्रचार को बेनकाब करने के लिए अवध प्रांत क्षेत्र में छह फरवरी से देशव्यापी संपर्क अभियान शुरू किया जा रहा है। माधव ने बताया कि केंद्र द्वारा कश्मीर में अलगाववाद का समर्थन करने , जेहाद से अधिक हिंदू आतंकवाद को खतरा बताने व अयोध्या प्रकरण के फैसले पर विवाद खड़ा करने के खिलाफ दस हजार स्वयंसेवकों की टोलियां 20 हजार गांवों में जाएंगी। छह से 20 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में घर-घर जाकर पत्रक व पुस्तिका वितरित की जाएंगी। राम माधव ने आरोप लगाया कि मालेगांव प्रकरण मुख्य आरोपी कर्नल पुरोहित व कथित शंकराचार्य पांडेय सर संघचालक मोहन राव भागवत की हत्या करने के षड्यंत्र में लगे थे। जिसके लिए हथियार भी खरीद लिए गए थे। इसकी जानकारी खुफिया विभाग व महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी दी गई थी। इसी आधार पर सर संघ चालक को सुरक्षा मुहैया कराई गई। उधर,पांच दिवसीय यात्रा पर अजमेर पहुंचे संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने राजस्थान के वरिष्ठ प्रचारकों के साथ जनजागरण अभियान की रूप-रेखा और नीति पर विचार-विमर्श किया। माना जा रहा है कि दरगाह ब्लास्ट में संघ के प्रचारकों और राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य इन्द्रेश कुमार का नाम आने से संघ अजमेर से ही जागरण अभियान की दिशा तय कर रहा है। अभियान के तहत हिंदू संगठनों, साधु-संतों के नाम बम ब्लास्ट जैसी घटनाओं में जबरन घसीटने का संघ कड़ा विरोध करेगा। अभियान में राम जन्मभूमि, मंदिर निर्माण, कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने जैसे मुद्दे भी शामिल किए गए हैं। इधर अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में राजस्थान एटीएस ने सक्रियता पहले से अधिक बढ़ाते हुए इन्द्रेश कुमार के निकट माने जाने वाले राजस्थान के संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं भाजपा नेताओं पर निगरानी रखना शुरू कर दिया है। एटीएस शीघ्र ही इन्द्रेश कुमार से भी पूछताछ करेगी।


पीएम के सामने नीतीश ने रखी 16 मांगें


बिहार चुनाव के वक्त केंद्रीय मदद को लेकर राजग और कांग्रेस के बीच चलते रहे घमासान में जीत कर आए नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सामने सोलह मांगे रख दी हैं। बिहार के प्रति केंद्रीय रुख को याद दिलाते हुए उन्होंने राज्य के लिए विशेष दर्जा, कोल लिंकेज, नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना में तेजी लाने जैसी मांगों पर निर्णय लेने का आग्रह किया। जबकि बिहार के योजना आकार में कटौती की चर्चा को पहले ही खत्म करने की कवायद में उन्होंने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से भी मुलाकात की। उन्होंने मंशा जता दी है कि वह योजना में 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी चाहते हैं। नीतीश ने केंद्र को स्पष्ट कर दिया है कि वह पहली मुलाकात को सिर्फ औपचारिकता तक खत्म नहीं होने देंगे। चुनावी जीत के बाद पहली बार बुधवार को प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे नीतीश ने उनके सामने 16 मुद्दे रख दिए। पहली चिंता राज्यों को मिलने वाली बजटीय सहायता को लेकर है। पहले प्रधानमंत्री और बाद में मोंटेक से मिलकर उन्होंने कहा कि बजटीय सहायता घटाने के प्रस्ताव से राज्यों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। इसके अलावा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई। सूखा भी नीतीश के लिए चिंता का सबब है। लिहाजा पूरी स्थिति बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की ओर से कृषि मंत्रालय को 6553 करोड़ रुपये का मेमोरेंडम भेजा गया था, लेकिन मिले महज 1459 करोड़। उन्होंने पूरी राशि जल्द जारी करने की मांग की। नीतीश की सूची में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए फंड, नई परियोजनाएं, एनएचडीपी-3 को जल्द पूरा करने जैसी मांगों के साथ साथ औद्योगिक विकास के लिए कोल लिंकेज देने व एथनाल बनाने की स्वीकृति दिए जाने पर विशेष जोर था। नीतीश ने दावा किया कि केंद्र बिहार की इन दो मांगों को मंजूरी दे तो निवेश की गति तेज हो जाएगी। दूसरी तरफ योजना आकार तय होने से पहले ही मोंटेक से मुलाकात कर नीतीश ने राज्य की जरूरतें बता दीं। विशेष दर्जा के साथ साथ उन्होंने बीआरजीएफ फंड, कृषि योजना, गरीबी संख्या तय करने वाली तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट के आधार पर खाद्यान्न का आवंटन जैसी मांगे भी रखी। नई पारी में बिजली भी नीतीश की प्राथमिकता में है। लिहाजा बाढ़ में तैयार होने वाले एनटीपीसी से उन्होंने 40 फीसदी बिजली देने का आग्रह किया। अंत में यह भी याद दिला दिया कि 2011-12 के लिए तय बीस हजार के योजना आकार में वह 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी चाहते हैं।