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Saturday, October 15, 2011

कांग्रेस यदि दलित को पीएम बनाए तो मायावती भयभीत क्यों : अंबेडकर


आरपीआई नेता और भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने शनिवार को कहा कि यदि कांग्रेस दलित को प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्त करती है तो उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को पार्टी से भयभीत नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे मायावती से अधिक योग्य हैं। यह बयान मायावती की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के अगले साल होने वाले चुनावों के मद्देनजर दलित वोटों को काटने के लिए कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार या केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे को प्रधानमंत्री बना सकती है। प्रकाश ने संवाददाताओं से कहा, ‘यदि दलित प्रधानमंत्री बनता है तो उन्हें खुश होना चाहिए, मीरा और शिंदे दोनों ही मायावती से अधिक योग्य हैं।’
उन्होंने कहा कि इन दोनों के अलावा कांग्रेस के पास बूटा सिंह और केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के रूप में महत्वपूर्ण दलित चेहरे हैं। मीरा पूर्व भारतीय विदेशी सेवा अधिकारी रह चुकी हैं जबकि शिंदे जानेमाने राजनेता हैं जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘उनकी राजनीतिक छवि मायावती से बेहतर है।’

Monday, October 3, 2011

आडवाणी की यात्रा पर संगठन में कोई मनभेद नहीं

 वाराणसी भाजपा अपने आंतरिक कलह पर पर्दा डालने की कोशिशों में जुट गई है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी की मानें तो लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा को लेकर संगठन में कोई मतभेद या मनभेद नहीं है। यात्रा के लिए पार्टी ने आडवाणी से अनुरोध किया था। नकवी रविवार को महानगर में थे। पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालय में उन्होंने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत की। इससे पहले नकवी ने काशी क्षेत्र की बैठक में भी हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि आडवाणी की रथयात्रा का कार्यक्रम न सिर्फ गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी बल्कि भाजपा शासित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को विश्वास में लेकर तय किया गया है। उनके मुताबिक आडवाणी की यात्रा के 12 अक्टूबर को वाराणसी पहुंचने तथा अगले दिन यहां से रवानगी के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता व लोकलेखा समिति के अध्यक्ष डॉ.मुरली मनोहर जोशी भी मौजूद रहेंगे। वाराणसी व मथुरा से 13 अक्टूबर को शुरू होने वाली जन स्वाभिमान यात्राओं के जरिए पार्टी के सुशासन के संदेश को और मजबूती के साथ आमजन तक पहुंचाया जाएगा। कलराज मिश्र तथा राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली ये यात्राएं 350 विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी। भाजपा उपाध्यक्ष ने कहा विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार 288 सीटों पर भाजपा आम मतदाताओं को पहली पसंद के रूप में उभरी है। जरूरत इस बात की है कि इन मतदाताओं को मतदान के दिन बूथ तक पहुंचाया जाए। इस दिशा में प्रयास शुरु कर दिए गए हैं। अनुसूचित जाति/ जनजाति का आरक्षण कोटा बढ़ाने के लिए सूबे की मुख्यमंत्री मायावती की ओर से प्रधानमंत्री से की गई मांग को नकवी ने दिखावा करार दिया। कहा मायावती साढ़े चार वर्षो के शासन काल के दौरान अहंकार में तो उनकी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी थी। मायावती के भ्रष्टाचार का सिंहासन अब डोलने लगा है। अपने डोलते सिंहासन से घबराकर व चुनाव नजदीक देख मायावती को अब सामाजिक समीकरण की चिंता सताने लगी है।

प्रणब और चिदंबरम के बीच थे मतभेद

केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने स्वीकार किया है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बीच विवादास्पद 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर की गई टिप्पणी को लेकर कुछ मतभेद थे। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिए कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जल्द से जल्द इस विवाद का अंत चाहती हैं। उनके अनुसार सोनिया चाहती हैं कि प्रणब और चिदंबरम के कामकाज के दौरान के मतभेद को, मीडिया दो बड़े मंत्रियों के बीच टकराव के रूप में न पेश करे। दोनों के बीच कोई बड़े मतभेद नहीं हैं। इन सबके बीच विधि मंत्री ने चिदंबरम की पहले आओ पहले पाओ नीति का यह कहते हुए बचाव किया कि कैबिनेट के फैसले को वह बदल नहीं सकते थे। एक टीवी चैनल के टॉक शो में खुर्शीद ने कहा, क्या चिदंबरम अकेले कैबिनेट के फैसले को बदल सकते थे? उनके अनुसार जब कैबिनेट के किसी फैसले के संदर्भ में बड़ी संख्या में मंत्रियों और एक मंत्री के बीच असहमति हो या दो मंत्रियों के बीच असहमति हो, किसी एक बिंदु पर आपको हां कहना होगा..। उन्होंने 25 मार्च के नोट के बारे में कहा कि नोट में जो निष्कर्ष हैं उसमें विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों का नजरिया नहीं परिलक्षित होता। यह पूछे जाने पर कि मुखर्जी ने सिर्फ यह कहा कि नोट में उनके विचार नहीं परिलक्षित होते, उन्होंने यह नहीं कहा कि वह इससे असहमत हैं, खुर्शीद ने कहा कि यह एकमात्र तरीका है जिसमें कोई कह सकता है कि ये मेरे विचार नहीं हैं। यह व्यवहारिक भाषा है जिसका इस्तेमाल हम रोजाना की जिंदगी में करते हैं, खासकर भारतीय राजनीति में। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी चाहती हैं कि रोजाना के काम में फर्क और असहमति को मीडिया को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। इस तरह के मुद्दों को इस तरह नहीं पेश करना चाहिए कि दो बड़े मंत्रियों के बीच अहं का टकराव है। खुर्शीद ने भाजपा नेता अरुण जेटली के इस दावे का उपहास उड़ाया कि भ्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 13(1)(डी)(2) के तहत चिदंबरम लाइसेंस आवंटी को अनुचित आर्थिक लाभ देने के दोषी हैं। कानून मंत्री ने कहा, क्या आप विश्लेषण कर सकते हैं कि यह आपराधिक दोष कैसे हुआ। योजना आयोग के दस्तावेज के आधार पर हमारी राय यह थी कि हम वहां धन हासिल करने के लिए नहीं थे बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि अधिकतम कवरेज हो, लोगों को सस्ती दर पर टेलीफोन सुविधा मिल सके।खुर्शीद ने दावा किया, आज विश्व में न्यूनतम दर पर सबसे अधिक कवरेज भारत में है। अगर यह हमारी नीति थी तो हम सफल रहे। उन्होंने कहा कि एक खास कीमत पर स्पेक्ट्रम देने का 2001 का फैसला मिस्टर जेटली की सरकार ने लिया था। राजग सरकार ने 2003 में अतिरिक्त लाइसेंस आवंटित करने का फैसला किया था।