जन स्वाभिमान यात्रा के चौथे दिन रविवार को भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येद्दयुरप्पा की गिरफ्तारी से भाजपा के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यात्रा पर निकलने से पहले यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री का फैसला पार्टी की संसदीय समिति करेगी। राजनाथ ने कहा कि लोकायुक्त की रिपोर्ट आते ही पार्टी ने येद्दयुरप्पा से इस्तीफा ले लिया था। भ्रष्टाचार के सवाल पर विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के किसी भी बड़े नेता पर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है तो पार्टी उसे संरक्षण नहीं देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया। कहा, 2जी घोटाले में गृह मंत्री पी. चिदंबरम का नाम आने के बाद उनकी जांच कराने की बजाए खुद बचाव में उतर आए। प्रदेश की बसपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि नोएडा में ही वर्ष 2009-10 व 2010-11 में 38.22 लाख वर्गमीटर जमीन प्राधिकरण ने मनमाने तरीके से 8,131 करोड़ रुपये में बेच दी। सर्किल रेट के मुताबिक इसकी कीमत 16,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर घोटालों की जांच के लिए विशेष कमेटी गठित करने की बात कही। यह भी वादा किया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री को भी लोकायुक्त के दायरे में लाया जाएगा। भाजपा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व कर्नाटक की तर्ज पर पूरे देश में किसानों को एक प्रतिशत की दर पर खेती के कर्ज मुहैया कराना चाहती है। किसानों को उनकी फसल के एवज में न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ बोनस भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में हाउसिंग सेक्टर रीयल इस्टेट डेवलपर्स के हवाले है।
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Monday, October 17, 2011
कश्मीर पर प्रशांत भूषण की भाषा बोलीं मेधा पाटकर
टीम अन्ना के एक और सहयोगी मेधा पाटकर ने अलगाववादियों के सुर में सुर मिलाकर गांधीवादी नेता अन्ना हजारे के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पाटकर ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफास्पा) को कश्मीर समस्या की जड़ करार दिया है। इससे पहले प्रशांत भूषण ने पाकिस्तानी सरकार के रुख की हिमायत करते हुए कहा था कि कश्मीर की जनता अगर जनमत के जरिए विभाजन के पक्ष में फैसला करती है तो उसे देश से अलग कर देना चाहिए। विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने रविवार को कवयित्री व आंदोलनकर्ता इरोम चानू शर्मीला के छेड़े गए अभियान के तहत अफास्पा हटाने के लिए श्रीनगर में रैली निकाली, जिसमें करीब साठ लोगों ने हिस्सा लिया। इस पहले लाल चौक स्थित प्रेस कॉलोनी में धरना भी दिया गया। पाटेकर ने कहा कि इस कानून के कारण लोगों का लोकतंत्र से विश्वास उठ चुका है। जब तक यह कानून रहेगा तब तक राज्य में शांति बहाल नहीं हो सकती। इस कानून से लोग दहशत में हैं। वह खुलकर सांस नहीं ले पा रहे हैं। हमें कोशिश करनी चाहिए कि इन कानूनों को हटाकर लोगों को आजादी से सांस लेने दी जाए। तभी यहां के लोगों के दिल जीते जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर एक जटिल समस्या है। इसके लिए अफास्पा को हटाना जरूरी है। मणिपुर, पंजाब, असम व जम्मू-कश्मीर के लोगों को इस कानून का खामियाजा भुगतना पड़ा है। कश्मीर समस्या सियासी ढंग से ही हल की जा सकती है। कश्मीर में जनमत संग्रह के बारे में उन्होंने कहा कि हम यहां अफास्पा हटाने की मांग लेकर आए हैं। फिलहाल हमें इसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य प्रशांत भूषण के कश्मीर पर दिए गए बयान पर पाटकर ने कहा कि यह उनकी निजी राय है। केंद्र को कश्मीर समस्या से संबंधित रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि वार्ताकारों की सिफारिशों के साथ केंद्र को कश्मीरियों की सिफारिशों पर भी गौर करना चाहिए। कश्मीरी अफास्पा हटाने की सिफारिश कर रहे हैं। सरकार को जनशक्ति को ध्यान में रखते हुए अफास्पा हटाना ही होगा।
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