बहुजन समाज पार्टी ने महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा उत्तर भारतीयों के संबंध में दिए गए बयान की निंदा करते हुए कहा कि राज ठाकरे भी तो आतंकियों जैसा ही कार्य कर रहे है। बसपा प्रवक्ता ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि जहां आतंकवादी सिलसिलेवार बम विस्फोट का सहारा लेकर देश की एकता एवं अखंडता को क्षति पहंुचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं राज ठाकरे देश की संवैधानिक व्यवस्था, एकता एवं अखंडता को चोट पहुंचाने के लिए अपने गैर जिम्मेदाराना बयान का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे को समझना चाहिए कि इस प्रकार के बयान से आतंकवादी व अन्य विघटनकारी ताकतों को बढ़ावा मिलेगा। प्रवक्ता ने कहा कि राज को मालूम होना चाहिए कि यदि आज मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी माना जाता है तो इसके पीछे उत्तर प्रदेश व बिहार के लाखों कामगारों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। प्रवक्ता ने कहा कि राज को यह भी नही भूलना चाहिए कि मुंबई में उत्पादित वस्तुओं की खपत उत्तर भारत सहित पूरे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं द्वारा की जाती है और यही तथ्य मुंबई की आर्थिक खुशहाली का प्रमुख आधार है, इसलिए मनसे नेता को गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी करने से पहले तथ्यों की समग्र जानकारी अवश्य कर लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को देश के किसी भी राज्य में जाकर रोजी रोटी कमाने व बसने का मौलिक अधिकार प्राप्त है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से संबंधित हो अथवा किसी भी प्रदेश का निवासी हो। मुंबई भारत का ही अंग है, इसके लिए कोई अलग संविधान नही है, जिसके अनुसार वहां देश के दूसरे राज्यों के लोग जाकर रोजी रोटी न कमाएं और वहां जाकर न बस सकें।
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Saturday, July 16, 2011
राहुल के ही शब्द दोहरा रही कांग्रेस
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने शत-प्रतिशत आतंकी हमलों को रोकना मुश्किल क्या बताया कि पूरी कांग्रेस अब यही लाइन दोहरा रही है। इस मुद्दे पर भड़के विपक्ष पर उल्टे हमलावर रुख अपनाते हुए कांग्रेस राहुल गांधी के साथ गृहमंत्री पी. चिदंबरम और आतंकी धमाकों के वक्त फैशन शो में मौजूद एक और केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के बचाव में खुलकर सामने आ गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने भी शुक्रवार को कहा कि पूरी चौकसी बरतने के बावजूद आतंकी हमले पूरी तरह रोकना मुश्किल है। वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने राहुल के बयान पर विपक्ष के हमलों को निंदनीय करार दिया। विपक्ष की तरफ से इसे मुद्दा बनाए जाने पर कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और महाराष्ट्र के राजनीतिक मामलों के प्रभारी मोहन प्रकाश ने तीखे अंदाज में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मसले पर विपक्ष को छींटाकशी और राजनीति से बचना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने चिदंबरम का इस्तीफा मांग रही भाजपा पर उल्टे सवाल दाग दिए। शकील ने पूछा कि क्या जब अक्षरधाम, कंधार या संसद पर हमला हुआ तो भाजपा ने तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से इस्तीफा मांगा था। उल्टे उन्हें उप प्रधानमंत्री बना दिया और बाद में प्रधानमंत्री पद का दावेदार। शकील ने दावा किया कि संप्रग के कार्यकाल में आतंकी घटनाओं में काफी कमी आई है। राजग के कार्यकाल में आतंकी घटनाएं ज्यादा हुई थीं इसलिए विपक्ष को कुछ भी सोच-समझकर बोलना चाहिए। मुंबई धमाकों के समय केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के एक फैशन शो में होने पर शकील अहमद ने कहा, यह देखना चाहिए कि जब वह समारोह में थे तो उन्हें इस घटना की जानकारी थी या नहीं।
भूल थी राकांपा को गृह मंत्रालय देना : चह्वाण
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण के मुंह से शुक्रवार को राज्य का गृह मंत्रालय अपने पास न होने की कसक निकल ही गई। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय राकांपा को देना बड़ी भूल थी। हालांकि मामला तूल पकड़ता, उससे पहले ही गृहमंत्री आरआर पाटिल की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री अपनी बात से पीछे हट गए। दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी ने मोहन प्रकाश ने भी यह कहते हुए चह्वाण के बयान से किनारा कर लिया कि उन्हें मुख्यमंत्री के बयान की जानकारी नहीं है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने एक टीवी चैनल को साक्षात्कार में कहा कि पहले गृह एवं वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय मुख्यमंत्री अथवा उनके दल के पास ही रखने की परंपरा थी, लेकिन शिवसेना-भाजपा की सरकार जाने के बाद जब 1999 में राज्य में कांग्रेस-राकांपा की सरकार बनी तो उसने भी शिवसेना-भाजपा वाला सूत्र अपनाते हुए ये दोनों महत्वपूर्ण मंत्रालय कांग्रेस ने अपने सहयोगी दल को दे दिए। मुख्यमंत्री के अनुसार इस निर्णय पर पुनर्विचार होना चाहिए। चह्वाण के बयान के बाद यह खबर फैली कि मुंबई की कानून-व्यवस्था एवं यहां होने वाली आतंकी घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री गृह जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय राकांपा के पास होने से संतुष्ट नहीं हैं। लेकिन इस खबर पर राकांपा की प्रतिक्रिया आती, उससे पहले ही मुख्यमंत्री ने एक बार फिर टीवी पर आकर गृह मंत्री पाटिल की बाकायदा तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ये बातें मुंबई विस्फोटों के संदर्भ में नहीं कही थी। इसलिए इस प्रसंग को यहीं खत्म किया जाना चाहिए। चह्वाण भले ही सहयोगी दल के साथ रिश्ते मधुर रखने के लिए सफाई देते नजर आ रहे हों, लेकिन उनकी पहले व्यक्त की गई भावना को ही कांग्रेस की मूल भावना माना जा रहा है। 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनेवाले अशोक चह्वाण भी कह चुके हैं कि गृह विभाग मुख्यमंत्री या उनके दल के पास रहने से राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज्यादा आसान होता है।
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